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​​​​​​​MP में होगा उपचुनाव, क्या कमलनाथ बचा पाएंगे CM की कुर्सी ?

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भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत एक बार फिर उपचुनाव के आसपास खड़ी हो गई है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने 114 विधायकों के साथ बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। कमलनाथ को विधायक दल का नेता मनोनित करने कर दिया गया। जिसके बाद सोमवार को  कमलनाथ ने प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में सीएम का पदभार संभाल लिया। नियमों के अनुसार, अब उन्हें 6 महीने के अंदर विधानसभा का सदस्य भी बनना पड़ेगा, कमलनाथ वर्तमान में छिंडवाड़ा से लोकसभा के सदस्य हैं। ऐसे में उन्हें लोकसभा सदस्य का इस्तीफा देकर विधानसभा का चुनाव लड़ना होगा, और उसमें जीत भी दर्ज करनी होगी। ऐसे में  कयास लगाया जा रहा है कि कमलनाथ किसी सुरक्षित सीट से ही एमएलए का चुनाव लड़ेंगे।

यह हैं CM की नियुक्ति की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत की जाती है। राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति या तो आम चुनाव के बाद करता है या फिर तब करता है, जब मुख्यमंत्री के त्यागपत्र देने के कारण या बर्ख़ास्त कर दिए जाने के कारण उसका पद खाली हो जाता है। आम चुनाव में किसी एक ही दल को विधानसभा में बहुमत प्राप्त हो जाए और उस दल का कोई निर्वाचित नेता हो, तब उसे मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त करना राज्यपाल की संवैधानिक बाध्यता है। यदि मुख्यमंत्री अपने दल के आन्तरिक मतभेदों के कारण त्यागपत्र देता है, तो उस दल के नए निर्वाचित नेता को मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त किया जाता है। चुनाव में किसी पक्ष के बहुमत प्राप्त न करने की स्थिति में या मुख्यमंत्री की बर्ख़ास्तगी की स्थिति में राज्यपाल अपने विवेक से मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है और उसे नियत समय के अन्दर विधानसभा में बहुमत साबित करने का निर्देश देता है।

सीएम की योग्यता
मुख्यमंत्री पद के लिए संविधान में कोई योग्यता विहित नहीं की गई है, लेकिन मुख्यमंत्री के लिए यह आवश्यक है कि वह राज्य विधानसभा का सदस्य हो। इस प्रकार मुख्यमंत्री में राज्य विधानसभा के सदस्य की योग्यता होनी चाहिए। राज्य विधानसभा का सदस्य न होने वाला व्यक्ति भी मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि वह छह महीने के अंदर राज्य विधानसभा का सदस्य निर्वाचित हो जाए। 21 सितम्बर, 2001 को उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार किसी सजायाफ़्ता को मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य माना जाएगा।

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अगर उपचुनाव होते हैं तो कमलनाथ के लिए कौन करेगा सीट खाली
राजनीतिक विशलेषकों की राय है की कमलनाथ अपने गृह जिले छिंदवाड़ा के किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं। कमलनाथ छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से ही 9 बार सांसद रहे हैं। छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेंत्र में सात विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से अमरवाड़ा, परासिया, पान्दुर्ना एसटी कैटगरी और जुन्नारदेव सीट एससी कैटगरी के लिए रिजर्व है। ऐसे ही बाकि तीन सीटें छिंदवाड़ा, सौंसर और चोराई जनरल कैटगरी की हैं। कमलनाथ जनरल कैटगरी से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में संभव है कि वह छिंदवाड़ा, सौंसर और चोराई सीटों में से किसी एक सीट से चुनाव लड़ेंगें। ऐसे में देखना ये होगा कि कमलमाथ कांग्रेस की किसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ते हैं। या फिर ऐसी सीट का चुनाव करते हैं जहां से बीजेपी उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंचता है।

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