संत राम मोहनदास ने कहा- राम कथा जीवन जीने की कला,
महामंडलेश्वर बालक दास बोले- यह आध्यात्मिक जागरण का महाअभियान है
केके यदुवंशी
सिवनी मालवा। नर्मदा तट बाबरी में चल रहे भव्य 1111 कुंडात्मक महायज्ञ के अंतर्गत श्री राम कथा के द्वितीय दिवस पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु पहुंचे, जिससे पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
कथा वाचक संत श्री राम मोहनदास महाराज ने भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र का वर्णन करते हुए कहा, “श्रीराम केवल ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा, त्याग और आदर्श जीवन के जीवंत प्रतीक हैं। उनके आदर्शों को अपनाने से समाज में सुख, शांति और सद्भाव स्थापित होगा। राम कथा मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली जीवन कला है शिक्षा-संस्कार का मार्मिक वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। पूरे पंडाल में भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम दिखा।
आयोजनकर्ता महामंडलेश्वर बालक दास महाराज ने कहा, “यह महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक जागरण का महाअभियान है। हमारा उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ना है।”
आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए बैठने, प्रसाद, जल आदि की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई। पधारे संत-महात्माओं की उपस्थिति से आयोजन की दिव्यता और बढ़ गई।
आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अधिक संख्या में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया।

