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महिलाओं में होने वाले विभिन्न रोग, इनके कारण एवं बचाव जाने डॉ. भावना राय पटेल से

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मकड़ाई समाचार भोपाल। प्रजनन तंत्र के संक्रमण या प्र.तं.सं. विभिन्न कीटाणुओं से होने वाले जनन अंगों के संक्रमण हैं। हालांकि प्र.तं.सं. पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकते हैं, ये महिलाओं में अधिक होते हैं क्योंकि उनके शरीर की रचना और कार्यप्रणाली कीटाणुओं के आसानी से प्रवेश के लिए अधिक अनुकूल है।

जो प्र.तं.सं. यौनिक संपर्क के द्वारा फैलते हैं, उन्हें यौन संचारित रोग (एस.टी.डी.), यौन संचारित संक्रमण ( यौ.सं.सं.) या राजित रोग (वी.डी.) कहते हैं। जनन अंग क्षति पहुंचने (जैसे कि डिलीवरी, सहवास, या रासायनिक पदार्थों के प्रयोग से कारण, डिलिवरी, गर्भपात, कॉपर-टी लगाने की प्रक्रिया में अस्वच्छता के कारण) तथा योनि में सामान्यत: पाये जाने वाले कीटाणुओं की अत्यधिक वृधि के कारण भी संक्रमित हो सकते हैं। सामान्य स्वास्थ्य का खराब स्तर, जनन अंगों की अस्वच्छता तथा कम आयु में यौनिक क्रिया की शुरुआत आदि से महिला में प्र.तं.सं. के होने की संभावना अधिक हो जाती है।

प्रजनन तंत्र के संक्रमण के प्रति लापरवाही आमतौर पर महिलाएं असामान्य योनि स्त्राव तथा जनन अंगों पर जख्म आदि जैसी व्यक्तिगत समस्याओं के विषय में चर्चा करने में बहुत झिझकती व शर्माती हैं। उन्हें यौन संबंधित समस्याओं पर चुपचाप रह कर बर्दाश्त करते रहना सिखाया गया है। एक यह भी डर रहता है कि अगर कोई महिला प्र.तं.सं., विशेषत: एस.टी.डी., से पीड़ित पाई जाती है तो उसे “बदचलन” कहा जा सकता है। अपर्याप्त यौन शिक्षा तथा चिकित्सा सुविधाओं की कम उपलब्धता के कारण उपचार करवाने में झिझक होती है। घर के निर्णय लेने वाले, जैसे कि सास, महिला को गर्भ सम्बंधित समस्याओं, जैसे कि गर्भावस्था तथा निःसंतानता, के लिए तो स्वास्थ्यकर्मी के पास ले जाने की अनुमति दे देंगे। लेकिन “अधिक योनि स्त्राव “ जैसे “मामूली” लक्षणों के लिए नहीं।

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प्र.तं.सं. को गंभीरता से न लेने का एक अन्य कारण यह भी है कि उनसे जान को सीधा खतरा नही होता है। वे महिला के शरीर में घर बना लेते हैं और लंबे समय तक चलने वाला पेट दर्द या कमर दर्द अथवा निःसंतानता जैसी समस्याएं उत्पन्न कर देते हैं।

प्रजनन तंत्र के संक्रमण के लक्षण
प्र.तं.सं. (यौ.सं.रोगों. तथा गैर यौ.सं.रोगों) के कारण महिला में मुख्यतः ये लक्षण होते हैं :

1- असामान्य योनि स्त्राव जो दुर्गन्धपूर्ण तथा सामान्य से अधिक मात्रा में होता है।
2-बाह्रय जनन अंगों पर जख्म या घाव।
3-पेल्विक एन्फ्लामेंट्री डिजीज (पी.आई.डी.) के कारण पेडू में दर्द।

प्रजनन तंत्र के संक्रमण की उपस्थिति का संकेत इन लक्षणों से भी मिल सकता है :
1-संभोग के दौरान दर्द या रक्त स्त्राव होना।
2-जांघों में दर्दनाक गांठें (गिल्टियां ) होना।
3-पेशाब करते समय जलन व दर्द।
4-जनन अंगों के आस-पास खुजली होना।

अगर प्र.तं.सं. का शीघ्र उपचार नहीं किया जाए तो कई जटिलताएं उत्पन्न हो सकती है जैसे कि पी.आई.डी., निःसंतानता, एच.आई.वी. संक्रमण होने की अधिक संभावना, गर्भाशय से बाहर गर्भधारण (एक्टोपिक गर्भ ), गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर तथा मृत्यु। इनके अतिरिक्त गर्भावस्था सम्बंधित जटिलताएं भी हो सकती हैं जैसे कि समय से पहले प्रसव, जन्म के समय बच्चे का कम वजन, मृत बच्चा पैदा होना, गर्भपात या जन्मजात विकार। जन्म के समय योनि में से गुजरते हुए बच्चे को आंखों का संक्रमण हो सकता है जिससे अंततः निमोनिया तथा अंधापन हो सकता है।

असामान्य योनि स्त्राव
योनि से थोडा सा गीलापन होना एक सामान्य बात है। यह योनि द्वारा अपने सफाई करने का एक प्राकृतिक तरीका है। स्त्राव की मात्रा तथा प्रकार माहवारी चक्र के विभिन्न दिनों में अलग-अलग तरह का हो सकता है। प्रजनन काम के दौरान यह स्त्राव मात्रा में अधिक तथा पानी जैसा साफ व पतला हो जाता है।

योनि से स्त्राव की मात्रा, रंग तथा गंध में परिवर्तन संक्रमण का संकेत हो सकता है परंतु इससे संक्रमण के प्रकार का पता चलाना कठिन हो सकता है। आपको स्वास्थ्यकर्मी द्वारा परिक्षण करवा कर संक्रमण के प्रकार का पता करवाना चाहिए। ध्यान रखिए कि कभी-कभी कैंसर जैसी किसी अन्य समस्या के कारण भी स्त्राव हो सकता है।

महत्वपूर्ण :
अगर आपको योनि से स्त्राव के साथ पेडू में भी दर्द होता है तो आपको पी.आई.डी., जो कि एक गंभीर संक्रमण है, हो सकता है।

असामान्य योनि स्त्राव के आम कारण कई प्रकार के संक्रमणों के कारण असामान्य योनि स्त्राव हो सकता है। नीचे कुछ ऐसे ही संक्रमणों का उनके सबसे आम लक्षणों के साथ वर्णन दिया गया है:

यीस्ट (फफूंद संक्रमण, केन्डीडा, सफेद पानी) :

आम तौर पर यह यौ.सं.रोग नहीं होता है और न ही इससे कोई जटिलताएं होती हैं परंतु इससे जनन अंगों में काफी परेशान करने वाली खुजली होती है। यीस्ट संक्रमण होने की संभावना तब अधिक होती है जब आप गर्भवती हैं या एंटीबायोटिक्स दवाईयों का सेवन कर रही हैं या मधुमेह अथवा एच.आई.वी./एड्स जैसी बीमारी से पीड़ित हैं।

लक्षण :

दही जैसा, सफेद दानों या धागों जैसा स्त्राव।
योनि के बाहर तथा अंदर की खाल चमकदार तथा लाल हो जाती है जिससे खून भी जा सकता है।
योनि के अंदर तथा बाहर खुजली होना।
पेशाब करते समय जलन महसूस होना।
डबलरोटी के बनाने जैसी दुर्गन्ध आना।
सहवास के दौरान दर्द होना।

जीवाणु-जनित योनि संक्रमण यह यौ.सं.रोग नहीं है। अगर आप गर्भवती हैं तो यह समय से पहले ही प्रसव प्रेरित कर सकता है।
लक्षण :

सामान्य से अधिक योनि स्त्राव होना।
योनि से मछली की गंध आना विशेषकर सहवास के पश्चात तथा माहवारी के दौरान। योनि के आस-पास हल्की खुजली होना।
उपचार:

दवाईयां केवल प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख में ही लेनी चाहिए।

जनन अंगों पर जख्म या घाव
जनन अंगों पर होने वाले अधिकतर जख्म या घाव यों.सं.रोगों के कारण होते हैं। यह कहना कठिन है कि ये किस रोग के कारण हो रहें हैं क्योंकि सिफलिस (आतशक) तथा सेंक्राइड द्वारा होने वाले जख्म एक जैसे ही दीखते हैं। जनना अंगों पर होने वाले जख्म या घाव एच.आई.वी . (एड्स एक विषाणु) के शरीर में प्रवेश का सबसे सरल तरीका है।

पेल्विक एन्फ्लामेंट्री डिजीज (पी.आई.डी. )
पी.आई.डी. महिला के पेट के निचले भाग में स्थित जनन अंगों के संक्रमण को दिया गया नाम है। इसे आप तौर पर “पेल्विक संक्रमण” भी कहा जाता है। यह तब हो सकता है जब आपको गोनोरिया (सूजाक ) या क्लेमाइडिया जैसे कोई यों.सं.रोग हुआ हो और उसका उपचार नहीं किया गया हो। अगर निकट पूर्व काल में प्रसव या स्वत: गर्भपात या गर्भपात अस्वच्छ परिस्थितियों में किया गया हो तो भी यह रोग हो सकता है।

पेल्विक संक्रमण करने वाले कीटाणु योनि तथा गर्भाशय ग्रीवा में से होते हुए गर्भाशय, फैलोपियन नलियों तथा अंडाशयों तक पहुंच जाते हैं। अगर इस संक्रमण का समय पर उपचार नहीं किया जाता है तो इससे लंबे समय तक रहने वाला दर्द, गंभीर बीमारी या मृत्यु हो सकती है। फैलोपियन नालियों में संक्रमण से वहां स्कार बन सकते हैं जिनसे आपको निःसंतानता या गर्भाशय के बाहर गर्भ ठहरने (“एक्टोपिक गर्भ”) का खतरा हो सकता है।

लक्षण : (आपको इनमें से एक या अधिक लक्षण हो सकते हैं )

० पेट या कमर के निचले भाग में दर्द।
० तेज बुखार, कंपकंपी।
अत्यधिक बीमार या कमजोर महसूस करना।
० योनि से दुर्गन्ध युक्त पीला या हरा स्त्राव।
० संभोग के दौरान दर्द या खून जाना।
० माहवारी की अनियमितताएं।
जनन अंगों में खुजली

इनके अनके कारण हो सकते हैं :

अगर यह योनि द्वारा के आस-पास है तो यह यीस्ट या ट्राइकोमोनास के कारण हो सकती है।अगर यह जनन अंगों के तुरंत उपर के बालों या जनन अंगों के पास है तो यह खाज (स्केबिज) या जुओं के कारण हो सकती है। इस भाग को शेव करके सारे बालों को साफ कर लें। प्रभवित भाग में बेंजाइल बेंजोएट लोशन लगाकर, रातभर के लिए छोड़ दें। नीम की पत्तियों तथा हल्दी का पेस्ट बनाकर वहां लगा सकते हैं और रात भर छोड़ दें। अन्य और भी दवाईयां आप दवाई की दुकान से प्राप्त कर सकती हैं।

सुगन्धित साबुनों तथा दुर्गन्धनाशकों के प्रयोग से भी खुजली हो सकती है।

यौन संचारित रोग अर्थात एस.टी.डी. यौन संचारित रोग या एस.टी.डी. एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति को यौन संबंधों से फैलने वाले रोग हैं। किस प्रकार के यौन संबंध-योनि, मुख या गुदा का एस.टी.डी कर सकते हैं। कभी-कभी ये रोग केवल संक्रमित लिंग या योनि को अन्य व्यक्ति के जनन अंगों से रगड़ने से भी हो सकते हैं। एस.टी.डी. किसी संक्रमित गर्भवती महिला से उसके बच्चे को जन्म से भी पहले गर्भ में या प्रसव के दौरान संचारित हो सकते हैं।

भारत में एस.टी.डी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि प्रतिवर्ष उपचार किये जा सकने वाले यौन संचारित संक्रमणों के लगभग 33.3 करोड़ नये मामले विश्व में होते हैं। भारत में यौ.सं.रोगों के नयें मामलों की अनुमानित वार्षिक दर 5% है। इसका अर्थ है कि प्रतिवर्ष यौ.सं.रोगों के लगभग 5 करोड़ नये मामले हो जाते हैं। यौ.सं.रोग शहरों तथा गावों दोनों में पाए गए हैं और ये 15 -45 वर्ष की महिलाओं में सबसे अधिक होने वाले संचारी रोग हैं।

महिलाओं तथा पुरुषों-दोनों को एस.टी.डी. हो सकते हैं परंतु महिला से पुरुष को फैलने की तुलना में पुरुष से महिला का संक्रमती होना कहीं अधिक आसान होता है। ऐसा लिंग-योनि सहवास क्रिया में महिला की योनि एक बड़ा भाग लिंग के संपर्क में आने तथा संक्रमित वीर्य का योनि में देर तक पड़े रहने के कारण होता है। इससे महिला को गर्भाशय, फैलोपियन नलिकाओं तथा अंडाशयों में संक्रमण होने की संभावना अधिक हो जाती है।

किसी महिला के लिए एस.टी.डी. से बचना एक कठिन कार्य हो सकता है क्योंकि उसे अकसर ही अपने साथी की सहवास क्रिया के लिए मांग पूरी करनी पड़ती है। इसके आलावा उसे यह भी नहीं पता होता है कि उसका साथी एस.टी.डी से पीड़ित है या वह अन्य महिला से सहवास कर सकता है तो वह अपनी पत्नी को संक्रमित कर सकता है। दोनों यौन साथियों की एस.टी.डी से रक्षा करने के लिए कंडोम एक अच्छा साधन हैं परंतु एक महिला के लिए पुरुष को कंडोम प्रयोग करने के लिए राजी करना कठिन हो जाता है।

प्रकट हुए लक्षणों के बिना यौ.सं.रोगों के होने की संभावना महिलाओं में अधिक होती है।अकसर ही इनके कारण कुछ ऐसे भागों में जख्म हो सकते हैं जो रोगी को दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि ऐसे परिक्षण उपलब्ध हैं जिनसे महिला में यौ.सं.रोग की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है परंतु ये परिक्षण काफी महंगे व हर जगह उपलब्ध नहीं होते हैं और कभी-कभी ये पूर्णतया सही परिणाम भी नहीं देते हैं।

एस.टी.डी. के परिणाम-पुरुषों की तुलना में महिलाओं से अधिक विविधता वाले तथा गंभीर होते हैं। इनके कारण महिलाओं को मानसिक तनाव भी अधिक होता है।

शीघ्र तथा पूर्ण उपचार न होने से एस.टी.डी के कारण :

महिलाओं और पुरुषों में निसंतानता हो सकती है।
गर्भपात तथा बच्चे की गर्भ में मृत्यु हो सकती है।
गर्भाशय से बाहर, जैसे कि फैलोपियन नलियों में गर्भ ठहर सकता है (एक्टोपिक गर्भ)।
कमजोर, आकार में छोटे, समय से पहले या जनसे से अंधे बच्चे पैदा हो सकते हैं।
नवजात शिशुओं में निमोनिया हो सकता है।
पेट में लंबे समय तक चलने वाला दर्द रह सकता है।
गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर हो सकता है।
एच.आई.वी./एड्स हो सकता है।
गंभीर संक्रमण या एड्स के कारण मृत्यु हो सकती है।

उपचार :

इनमे से कोई भी लक्षण होने पर नजदीकी स्वस्थ केंद्र मै अथवा किसी प्रशिक्षित स्त्री रोग विशषज्ञ से जाकर मिलें।

भवदीय:
डॉ भावना राय पटेल
Gynaecologist
(Mother n baby care center-Bhopal)/counselor/ psychologist

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