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फिल्म हॉली डे की तर्ज पर आतंकी बना रहे थे योजना, फिदायीन हमले की थी साजिश

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नई दिल्ली: फिल्म हॉली डे की तर्ज पर आईएसआईएस के हैंडलर आतंकी संगठन हरकत उल हर्ब ए इस्लाम ने राजधानी दिल्ली समेत यूपी के कई शहरों में सीरियल ब्लास्ट,फिदायीन हमले की तैयारी की थी। उसी तर्ज पर उन लोगों ने अपने स्लीपर मॉड्यूलर को तैयार किया था, जिसमें इंजीनियर से लेकर बिजनेसमैन और युवा लोगों को शामिल किया।

फिल्म की तरह ही इन लोगों को 29 दिसम्बर को अपनी-अपनी जगह पहुंच जाना था और 31 दिसम्बर की रात को अपना मिशन कामयाब करना था, लेकिन फिल्म ही तरह ही एनआईए एक हीरो की तरह आई और पूरे मिशन को एक साथ खत्म कर दिया। हालांकि ये मिशन इतना आसान नहीं होता अगर इंजीनियर अनास यूनुस अगर व्हट्सअप से भेजा गया कोड मैसेज अगर एनआईए की पकड़ में नहीं आता तो ये आतंकी नववर्ष की पूर्व संध्या के जश्न को मातम में बदल देते। हरकत उल हर्ब ए इस्लाम जो आईएसआईएस का हैंडलर है इसने पूरी प्लानिंग कर ली थी और ये भी तय हो चुका था कि कौन किस तरह से कहां पर विस्फोट करेगा और कौन रॉकेट लांचर से हमला करेगा। इसके लिए बाकायदा घड़ी बम तैयार हो चुके थे और पूरा मैप भी बन चुका था,बस सामान लोगों को डिलीवर किया जाना था,लेकिन इसी बीच एनआईए ने इन्हें धरदबोचा, जिससे ये बड़ी आतंकी हमले की साजिश नाकाम हो गई।

अमरोहा का है मुख्य सरगना, मस्जिद में है मौलवी 
जांच में पाया गया कि मैसेज की शुरुआत दिल्ली के जाफराबाद इलाके से शुरू हुई, इसके रिकॉर्ड जब खंगाले गए तो ये नंबर अमरोहा के एक मौलवी का था। इसका नाम मौलवी सुहैल जो करीब 3 माह से दिल्ली के जाफराबाद में रहता था। हालांकि ये जाफराबाद में गत 12 सालों से रह रहा था, लेकिन मौलवी बनने के बाद इसने जाफराबाद छोड़ दिया था, लेकिन गत तीन माह से लगातार ये जाफराबाद इलाके में रह रहा था।

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महज तीन माह में सुहैल ने बना डाली आंतकियों की टीम
सुहैल जिस संगठन से जुड़ा है वह संगठन देश में करीब एक साल पहले ही खड़ा किया गया था। इस संगठन ने अभी तक कोई आतंकी गतिविधि नहीं की थी, और न ही कहीं अपना विरोध जताया था,इसलिए इस पर किसी एजेंसी की निगाह कभी नहीं गई। सुहैल ने इस संगठन की आड़ में आईएसआईएस की विचारधारा को ऐसे युवकों में भरा जो छात्र या बिजनेसमैन थे। इसने अपने संगठन में एमिटी यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र फिर ऑटो ड्राइवर, मौलवी, गारमेंट्स का बिजनेस करने वाले युवकों को शामिल किया। शमिल करते समय ये ध्यान रखा गया कि लोगों की उम्र 20 से 30 साल के बीच की ही हो। संगठन में महिलाओं को भी शामिल किया था।

पकड़ में न आएं, इसलिए वाट्सअप और टेलीग्राम पर करते थे बात 
एजेंसियों की निगाह इन पर न पड़े इसलिए ये लोग वाट्सअप और टेलीग्राम पर एक-दूसरे से बात करते थे। इनके पास से 100 से ज्यादा मोबाइल फोन मिले हैं और करीब 135 सिम कार्ड, इसके अलावा इतने ही कार्ड ये लोग फेंक चुके हैं। बताया जाता है कि एक बार बात करने के बाद ये लोग उस नंबर को कभी दोबारा प्रयोग नहीं करते थे और मैसेज करने के बाद तत्काल फोन भी तोड़ देते थे। इसके अलावा 100 से ज्यादा लैपटॉप भी बरामद किए गए है। इन लैपटॉप का इस्तेमाल ये  लोग अपने साथियों से बात करने और विदेश में बैठे अपने आका को मैसेज करने के लिए करते थे।

रिमोट कंट्रोल और फिदायीन हमले की थी साजिश
सभी संदिग्ध विदेशी व्यक्ति के संपर्क में थे। आतंकी संगठन आईएस से प्रभावित इन लोगों का हैंडलर विदेशी था। ये लोग आपस में बातचीत करने के लिए व्हाट्सअप और टेलीग्राम के माध्यम से बातचीत करते थे। एनआईए ने बताया कि इन लोगों की बहुत सारे बम बनाने की योजना थी। बड़े पैमाने पर अलार्म घड़ी और पाइप बरामद किए गए हैं। जिससे पता चलता है कि ये पाइप बम बनाने की फिराक में थे। ये लोग सीरियल ब्लास्ट की साजिश रच रहे थे। साथ ही, इनकी रिमोट क्रंट्रोल और आत्मघाती हमला करने की भी योजना थी।

ये हैं गिरफ्तार आतंकी 
1.  मुफ्ती मोहम्मद सुहैल (29) उर्फ हजरत पुत्र हफीज अहमद,(मुख्य सरगना) मूल निवासी अमरोहा, पेशा हकीम महताब उद्दीन हाशमी रोड मदरसे का मौलवी वर्तमान में दिल्ली के जाफराबाद में ठिकाना, माहिर पाइप-बम और घड़ी बम बनाने में तैयार करने के लिए हथियार, फंड से लेकर सभी विस्फोटक सामान इसी ने खरीदे और जोड़े।

2. अनस यूनुस (24) निवासी जाफराबाद दिल्ली। नोएडा के विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। आतंकी साजिश को बढ़ाने में यह बिजली की वस्तुओं, अलार्म घडिय़ों और बैट्री आदि की खरीद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

3. राशिद जफर राक उर्फ जफर (23) निवासी जाफराबाद दिल्ली। यह कपड़ों का कारोबार करता था।

4. जुबैर मलिक (20) गुल्जार अहमद निवासी जाफराबाद दिल्ली, ये दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था।

5. जैद मलिक (22) पुत्र गुल्जार अहमद निवासी जाफराबाद दिल्ली। जैद मलिक, जुबैर मलिक का भाई है। ये दोनों भाई जैद और जुबैर आतंकवादी साजिश में शामिल थे। ये दोनों फर्जी दस्तावेजों पर बैट्री, कनेक्टर, सिम कार्ड खरीदने और बम बनाने वाली सामग्री खरीदने की जिम्मेदारी निभा रहे थे।

6. मोहम्मद आजम पुत्र हाफिज अहमद निवासी चौहान बाजर, गाशी मेंदु, दिल्ली। यह सीलमपुर, शाहदरा में एक मेडिकल की दुकान चलाता है और हथियारों की व्यवस्था करने में मास्टर-माइंड मुफ्ती की मदद करता था।

7. रईस अहमद निवासी सैदपुर, इम्मा जिला अमरोहा यूपी। रईस, सईद का भाई है। इसकी भी वेल्डिंग की दुकान है। दोनों भाई सईद और रईस ने एलईडी और पाइप बम तैयार करने के लिए भारी विस्फोटक सामग्री / गन पाउडर (लगभग 25 किलोग्राम) की खरीद की थी। इन दोनों ने आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए एक रॉकेट लॉन्चर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

8. सईद (28) निवासी सैदपुर इम्मा अमरोहा यूपी, इसकी अमरोहा में एक वेल्डिंग की दुकान है।

9. साकिब इतेकर (26) पुत्र इतेकर निवासी थाना सिम्भावली, जिला हापुड़, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। ये जामा मस्जिद, बक्सर, उत्तर प्रदेश में इमाम के रूप में काम करते था। इसने मास्टर-माइंड मुफ्ती मोहम्मद की मदद की और हथियारों की खरीदारी में सुहैल।

10. मोहम्मद इरशाद पुत्र इश्तियाक निवासी मोहल्ला काजी जादा जिला अमरोहा, उत्तर प्रदेश। यह एक ऑटो-रिक्शा चालक था और मोहम्मद सुहैल द्वारा खरीदी किए गए बम सामग्री को छिपाने में मदद करता था।

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