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बिहार में विपक्ष मजबूत, सीट बंटवारे को लेकर शुरु होगी बातचीत

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नई दिल्लीः बिहार में भाजपा नीत राजग के घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा होने के बाद कांग्रेस, राजद और दूसरी सहयोगी पार्टियां भी सीटों के तालमेल को जल्द अंतिम रुप देने की कोशिश में हैं और इसी के तहत अगले हफ्ते से औपचारिक बातचीत शुरु होगी।कांग्रेस का कहना है कि सीटों के तालमेल में कोई दिक्कत नहीं आएगी और उचित समय परे निर्णय हो जाएगा।

पार्टी के राज्य प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा, यह तय हुआ है कि अगले हफ्ते किसी भी दिन राजद, कांग्रेस और दूसरे सहयोगी दल के नेता बैठेंगे। अभी ऐसा नहीं है कि इसी बैठक में सबकुछ तय हो जाएगा। यहां से बातचीत की औपचारिक शुरुआत होगी।  उन्होंने कहा, इस बैठक में सीटों के तालमेल के साथ चुनाव प्रचार अभियान और इस रणनीति पर विचार किया जाएगा कि हम कैसे ज्यादा से ज्यादा सीटें जीत सकते हैं। सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसले की अवधि पूछे जाने पर गोहिल ने कहा, उचित समय पर इसका निर्णय हो जाएगा।

दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 सीटों में से 27 पर राजद और 12 पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था। एक सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी राकांपा के खाते में गई थी। उस चुनाव में राजद ने चार सीटों पर और कांग्रेस ने दो और राकांपा ने एक सीट पर जीत हासिल की थी। इस बार कई और पार्टियां महागठबंधन में शामिल हैं। इनमें उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हमे और शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल शामिल है।ऐसी भी चर्चा है कि वाम दलों को भी साथ लेने की कोशिश हो सकती है।

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माना जा रहा है कि महागठबंधन में पार्टियों की संख्या बढ़ने के कारण राजद और कांग्रेस को 2014 की तुलना में अपनी सीटें कुछ कम करनी पड़ सकती हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस इस बार 2014 के चुनाव से कम सीटों पर मान जाएगी तो गोहिल ने कहा, यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम कितनी सीटों पर लड़ते हैं, बल्कि यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि महागठबंधन कैसे ज्यादा से ज्यादा सीटें जीते। गोहिल ने कहा, महागठबंधन वैचारिक प्रतिबद्धता पर आधारित है, इसलिए सीटों के तालमेल में दिक्कत नहीं आएगी। गौरतलब है कि राजग के घटक दलों ने हाल ही में सीटों के तालमेल की घोषणा की जिसके तहत भाजपा और जदयू 17-17 तथा लोक जनशक्ति पार्टी छह सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

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