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लोकसभा में सवर्णों को 10% आरक्षण पर संशोधन बिल पेश, 2 बजे होगी बहस

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नई दिल्लीः भाजपा नीत राजग सरकार ने शिक्षा एवं नौकरियों में आर्थिक तौर पर कमजोर वर्गों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू करने से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया है। इस बिल पर अब 2 बजे बहस होगी। थावरचंद गहलोत ने सदन में बिल पेश किया। बता दें कि बिल को लेकर भाजपा ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर मंगलवार को संसद में मौजूद रहने को कहा था। संविधान संशोधन विधेयक को पास करने के लिए सरकार को दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी है। लोकसभा में पारित होने के बाद इसे राज्यसभा को भेजा जाएगा।

संसद में सरकार के सामने चुनौती
इस प्रस्ताव पर अमल के लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित कराने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में जरूरी संशोधन करने होंगे। संसद में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में कम से कम दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा। लोकसभा में तो सरकार के पास बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में उसके पास अपने दम पर विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी संख्याबल का अभाव है। हालांकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने कहा कि वे इसका समर्थन करेंगे। मोदी सरकार ने सोमवार को जब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की तो किसी भी राजनीतिर दल ने इसका विरोध नहीं किया, हालांकि इसे केंद्र का चुनावी स्टंट जरूर कहा।
इनको मिलेगा आरक्षण का लाभ

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  • प्रस्तावित कानून का लाभ ब्राह्मण, राजपूत (ठाकुर), जाट, मराठा, भूमिहार, कई व्यापारिक जातियों, कापू और कम्मा सहित कई अन्य अगड़ी जातियों को मिलेगा।
  • अन्य धर्मों के गरीबों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा।
  • ऐसे लोगों के पास नगर निकाय क्षेत्र में 1000 वर्ग फुट या इससे ज्यादा क्षेत्रफल का फ्लैट नहीं होना चाहिए और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में 200 यार्ड से ज्यादा का फ्लैट नहीं होना चाहिए।
  • सालाना आय 8 लाख से कम हो।
  • जो अभी तक किसी भी तरह के आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते थे।
  • जिनके पास 5 हेक्टेयर से कम की खेती की जमीन हो
  • अब तक संविधान में एससी-एसटी के अलावा सामाजिक एवं शैक्षणिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसमें आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का कोई जिक्र नहीं है।

ये है मोदी कैबिनेट का फैसला
लोकसभा चुनावों से पहले बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए नौकरियों एवं शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण के फैसले को मंजूरी दे दी। भाजपा के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को भी आरक्षण दिया जाए। प्रस्तावित आरक्षण अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को मिल रहे आरक्षण की 50 फीसदी सीमा के अतिरिक्त होगा, यानी आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए आरक्षण लागू हो जाने पर यह आंकड़ा बढकर 60 फीसदी हो जाएगा।

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