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डीएनए तकनीक के प्रावधान वाला विधेयक लोकसभा में हुआ पारित

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नई दिल्लीः अपराधियों, संदिग्धों, विचाराधीन कैदियों, लापता बच्चों और लोगों, आपदा पीड़िताें एवं अज्ञात रोगियों की पहचान के उद्देश्य से डीएनए तकनीक का इस्तेमाल करने के नियनम संबंधी विधेयक को मंगलवार को लोकसभा ने पारित कर दिया। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने सदन में डीएनए प्रौद्योगिक उपयोग और लागू होनी नियमन विधेयक, 2018 पेश करते हुए कहा कि विधेयक की नींव 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पड़ी थी और तब से लगभग 15 साल में यह विभिन्न स्तरों पर हर पहलू पर विस्तृत अध्ययन और पड़ताल से गुजर चुका है।

उन्होंने कहा कि न्यायिक निर्णयों में डीएनए प्रौद्योगिकी का उपयोग दुनिया के कई देशों में पहले से हो रहा है। हर्षवर्धन ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य डीएनए प्रयोगशालाओं की मान्यता का मानकीकरण करना है। नई प्रयोगशालाएं बनाना है और डीएनए डेटा बैंक स्थापित करना है। इसके अलावा देश में लावारिस शवों, लापता बच्चों की पहचान में भी डीएनए प्रोफाइंलिग कारगर होगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा देश में व्रूर अपराधियों को पकड़ने में भी यह तकनीक काम आएगी और कानूनी उद्देश्यों से डीएनए प्रोफाइल का उपयोग किया जा सकेगा। हर्षवर्धन ने बताया कि इसके तहत एक डीएनए नियामक बोर्ड बनाया जाएगा जो उक्त विषय पर केंद्र और राज्यों को सुझाव देगा।

उन्होंने कहा कि गृह, विदेश, रक्षा और महिला एवं बाल विकास मंत्रलय समेत छह मंत्रलयों को इस विधेयक के पारित हो जाने से लाभ होगा। सीबीआई, एनआईए जैसी जांच एजेंसियों और आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को भी यह सीधा लाभ पहुंचाएगा। मंत्री ने आश्वासन दिया कि इसमें निजता, गोपनीयता और डेटा संरक्षण का गहराई से ध्यान रखा गया है। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के शशि थरुर ने मांग की कि विधेयक को वापस लिया जाए और स्थाई समिति को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि हाल ही में उच्चतम न्यायालय द्वारा एक मामले में निजता के अधिकार पर दिये गये फैसले के अनुरुप विधेयक में कुछ भी नहीं लाया गया है। थरुर ने मांग की कि इस तरह के किसी भी विधेयक को लाने से पहले सरकार को डेटा संरक्षण कानून बनाना चाहिए।

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उन्होंने डीएनए प्रोफाइंलिग का देश में दुरुपयोग होने की आशंका व्यक्त की हैं। थरुर ने कहा कि इन सबको देखते हुए विधेयक को वापस लिया जाए और स्थाई समिति को वापस भेजा जाए। भाजपा के संजय जायसवाल ने कहा कि यह विधेयक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसमें स्वास्थ्य मंत्रलय को भी शामिल किया जाना चाहिए था, क्योंकि डीएनए जांच की प्रक्रिया स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के व्रियान्वयन को पूरी तरह बाबुओं पर नहीं छोड़ा जाए क्योंकि ऐसा करने से इसका मकसद पूरा नहीं होगा।

जायसवाल ने कहा कि इससे जुड़े नियामक बोर्ड का चेयरमैन जिसे भी बनाया जाए उसे डीएनए प्रौद्योगिकी की पूरी जानकारी होनी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि देश के लोगों को महसूस होना चाहिए कि वे सुरक्षित हैं और इसमें इसका पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह विधेयक बहुत पहले आ जाना चाहिए था क्योंकि इससे न्यायिक मामलों में मदद मिलेगी। माकपा के पीके बीजू ने कहा कि सरकार को इस विधेयक में सुनिश्चित करना चाहिए कि इसका दुरुपयोग नहीं हो और लोगों की निजता के साथ समझौता नहीं हो।

टीआरएस के वी एन गौड़, जदयू के कौशलेंद्र कुमार और एसडीएफ के पी डी राय ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। चर्चा का जवाब देते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि जहां तक दुरुपयोग की बात है तो डॉक्टरों के पास दिए जाने वाले सभी रक्त नमूनों के दुरुपयोग की भी गुंजाइश रहती है। उन्होंने कहा कि गहन विचार-विमर्श के बाद यह विधेयक लाया गया है। मंत्री ने कहा कि अगर आगे जरुरत पड़ेगी तो इसमें संशोधन किया जाएगा। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया।

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