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दहेज रूपी दानाव पर अगर समाज अंकुश लगा दे तो हर बेटियाँ अपनी ससुराल मै खुश रह सकती है मदन गौर

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हरदा। मकड़ाई समाचार

मॉडर्न और इंटरनेट के जमाने में देखा देखी और शान शौकत में आदमी कुछ भी करने को तैयार होता है और अपनी जिंदगी पूरी कर्जे में ही गुजार देता है अपने बेटा बेटी जब शादी योग होते और अब उनकी शादी ब्याह अपने स्तर से कर तो देता है फिर भी अगर थोड़ी सी कमी बीसी रह जाती है तो दहेज के लोभियो क पेट नहीं भरता और ताने देने लगते हैं वैसे तो हर पिता अपनी बेटी को को अपनी हैसीयत से दहेज देता ही है मगर लालची और लोभियों का पेट नही भरता और लेने की लालसा दिल मै बनाऐ रखते है। अगर दहेज रूपी दानव का तिरस्कार करें और हर व्यक्ति बहु को बेटी के रूप में अगर देखें तो यह नौबत देश प्रदेश और गांव में कभी नहीं आएगी जैसा आए दिन अखबारों में पढ़ने को और सुनने को मिलती है दहेज की वेदी पर एक ओर जहां आए दिन बेटियों की बलि की घटनाएंं आम हो गई है। वहीं, समाज के समाजिक बंधुओं इस खर्चीली शादियां पर अंकुश लगाना चाहिए जिससे समाज मै जागरूकता आऐ अपने बेटे बेटियाँ की शादी सामूहिक विवाह मै करना चाहिए इस माँडल जमाने की चकाचौंध मै लोग लिप्त होते जारहे है घर से शादी करके फिजूलखर्ची करते है इसका त्याग कर समाज के लिए अनूठी नजीर और दहेज के दानवों के लिए एक सबक बन कर समाज को एक अच्छा संदेश दिया जाना चाहिए।मदन गौर ने जानकारी के अनुसार बताया कि दहेज जैसी सामाजिक बुराई को समाज में जड़ से खत्म करना है। इसके लिए हम सब को मिलकर प्रयास करने होंगे।मदन गौर का कहना है कि दहेज से किसी का पेट नहीं भरता। बल्कि बेटे को ही ऐसा काबिल बनाया जाए कि दहेज लेने की जरूरत ही ना पड़े। शादी के बाद परिजनों और परिवार पूरी जिन्दगी अमन चैन से गुजार सके और कर्जा से बचे बेटी है तो कल है।

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