Mjaghar

छत्तीसगढ़ की माउंटेन गर्ल पर्वतों का सीना चीरकर पहुंचती है शिखर पर

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जगदलपुर। ‘कौन कहता है कि बाजुओं के जोर से फतह होती है मंजिल, हौसले ही हैं जो पहुंचाते हैं शिखर तक” इस पंक्ति को बस्तर की माउंटेन गर्ल के नाम से प्रसिद्ध नैना सिंह धाकड़ पूरी तरह चरितार्थ करती हैं।पुलिस पिता की यह बिटिया जिगर के मामले में पुरुषों को भी मात देती है। बचपन से पहाड़ों की चोटियां इसे आकर्षित करती थी। थोड़ी बड़ी हुईं तो कराते सीखने लगीं। इसमें तीन बार नेशनल भी खेला। फिर पर्वतारोहण से जो लगाव हुआ तो आज उनके नाम कई सफलताएं दर्ज हो चुकी हैं।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी उन्होंने जगह बनाई है। राज्य की एकमात्र पर्वतारोही नैना 2512 मीटर ऊंचे भागीरथी-दो को फतह कर तिरंगा और पुलिस ध्वज फहरा चुकी हैं। इस उपलब्धि के बाद बस्तर पुलिस ने उन्हें 2017 में अपना एम्बेसडर बनाया है

इसके पूर्व नेपाल, भूटान व हिमांचल प्रदेश में भी वे पर्वतारोहण कर चुकी हैं। उनकी ख्वाहिश अब दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवरेस्ट को फतह करने की है।
Ashara Computer

मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली नैना के पिता पुलिस में थे। वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। दो भाई हैं, जो परिवार संभालते हैं। स्कूली दौर में कराते की खिलाड़ी थीं। तब सोचा नहीं था कि पर्वतारोहण के क्षेत्र में वे कभी जाएंगी।

जब बछेंद्री पाल ने बदली दिशा 

पढ़ाई खत्म होने के बाद वर्ष 2011 में नैना जॉब के सिलसिले में जमशेदपुर टाटा जाना हुआ। वहां अचानक उनकी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली देश की पहली महिला महिला बछेंद्री पाल से मुलाकात हुई।

बस्तर का संदर्भ सुनते ही पाल उनसे प्रभावित हुईं और उन्हें एक माह के ट्रेनिंग में चलने को कहा। उन्होंने फौरन हां कर दी। फिर क्या था देश की अलग-अलग राज्यों से अन्य 11 महिलाओं के साथ उन्हें एक माह की यात्रा पर भूटान ले जाया गया।

इस यात्रा को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में जगह मिली। श्रीमती पॉल की सलाह पर उन्होंने वर्ष 2012 में दार्जिलिंग स्थित हिमालय पर्वतारोहण संस्थान से पर्वतारोहण का कोर्स पूरा किया। कोर्स पूरा करने के बाद दार्जिलिंग की पहाड़ी सम्बिट करने में सफल हुई। साथ ही एएमसी, एचएमआइ, एनआइएम, बेसिक एडवांस रॉक क्लेमिंग कोर्स भी पूरा किया।

यह रहा टर्निंग प्वाइंट 

कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 2010 में एनएसएस की ओर से उन्हें पर्वतारोहण का पखवाड़े भर का कैम्प करवाने का मौका मिला। हिमांचल प्रदेश में लगे इस ट्रेनिंग कैम्प के दौरान उन्हें देश के ख्यात पर्वतारोहियों ने माउंटिंग, रॉक क्लाइविंग, रिव्हर क्रॉसिंग और ग्लेसियर के कुछ पार्ट की सीख दी गई। वहीं नैना के लिए टर्निंग प्वाइंट था। उसके बाद पर्वतारोहण के लिए जो जुनून पैदा हुआ तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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