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मन की बात नही अब काम की बात हो जाए मोदी जी – विजया पाठक

अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के माध्यम से देश को संबोधित किया लॉक डाउन में प्रधानमंत्री का तीसरा संबोधन था संबोधन में प्रधानमंत्री ने लॉकडॉउन के दौरान देशवासियों को हो रही परेशानी के लिए माफी मांगी इसके साथ ही लॉकडाउन मे लोगों के सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया ! अच्छी बात है कि मन की बात के माध्यम से पीएम ने वैश्विक महामारी के चलते उत्पन्न हालातों पर सरकार की मंशा जाहिर की लेकिन सवाल बरकरार है कि लॉक डाउन के बाद कि स्थिति का आकलन हम आसानी से लगा सकते हैं कि वर्तमान परिपेक्ष में करोड़ों लोगों ने अपना रोजगार खो दिया होगा, और यह भी सत्य है कि इस लॉक डाउन के कारण रोजगार देने वाले सेक्टर उस स्थिति में नहीं होंगे कि वह तत्काल लोगों को रोजगार दे सके मोदी जी कोरोना के कारण देश में जो परिस्थितियां निर्मित हुई है। उस महामारी के बाद देश में आर्थिक क्षेत्र में क्या करने की आवश्यकता है! मोदी जी से अपील है कि लॉक डाउन के बाद सरकार का क्या स्टैंड रहेगा वह भी स्पष्ट करें कोरोना वायरस कि लड़ाई सिर्फ सरकार भर ने नहीं लड़ी, हर एक देशवासी ने लड़ी है । सबकि आर्थिक रूप से कमर टूटी है ! व्यापारी वर्ग ने निम्न वर्ग ने, मजदूर और गरीब वर्ग, मध्यम वर्ग ने सभी ने कोरोना से जंग लड़ी ! भविष्य की तस्वीर क्या निर्मित करेंगे वह भी स्पष्ट होना चाहिए ! क्योंकि देश का हर नागरिक अभी असमंजस में है कि आगे क्या होगा ! अगर ग्रह युद्ध से बचना है तो सरकार को भविष्य की तस्वीर बतानी होगी लोगों में विश्व के अनेकों देशों ने वहां के नागरिकों को आर्थिक राहत देने की पहल की है क्या भारत को ऐसी पहल की आवश्यकता नहीं है इस बात की अनदेखी नहीं की जा सकती है! वर्तमान में भारत की जनसंख्या लगभग 137 करोड है! इसमें से लगभग 103 करोड काम करने की उम्र में है 15 साल से ऊपर किसी भी प्रकार के साथ सशुल्क काम, औपचारिक अनौपचारिक- वेतन, दैनिक वेतन या किसी प्रकार के स्वरोजगार को शामिल करने के लिए हमें रोजगार की व्यापक परिभाषा लेनी चाहिए !
इस परिभाषा का उपयोग करते हुए फरवरी 2020 में प्री कोरोनावायरस महामारी और लॉकडाउन, लगभग 40. 4 करोड़ भारतीयों को नियोजित किया गया था ! जैसा कि महीने के लिए CMIE रिपोर्ट के अनुसार उस समय 3.4 करोड़ बेरोजगार थे ! पिछले सप्ताह के आंकड़ों से उनकी तुलना करें CMIE का अनुमान है कि तालाबंदी शुरू होने के 1 सप्ताह के भीतर काम करने वाली आबादी का केवल 27.7% (103 करोड़ ) कार्यरत था ! जितनी नौकरी इस समय मिली उससे काफी ज्यादा नौकरियां गई और उसकी संख्या रूस की पूरी जनसंख्या के बराबर हो सकती है सी.एम. आई के निर्देशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मुताबिक इस सप्ताह के दौरान बेरोजगारी दर 23.4 प्रतिशत है, 36 प्रतिशत कि LPR ( श्रम भागीदारी दर ) और 27.7 प्रतिशत रोजगार दर ! अब 20% बेरोजगारी किसी देश के लिए बुरी खबर साबित हो सकती है जबकि यह आंकड़ा और भयानक तब होता दिख रहा है जब कामकाजी उम्र का केवल 27.7% कार्यरत है । बेरोजगारी का संकेत सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनमी( CMIE ) का सर्वेक्षण में दिखा है इस संगठन ने मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में टेलीफोनिक साक्षात्कार करके सैंपल जुटाया! हो सकता है इनका सर्वेक्षण इतना व्यापक ना हो पर इसमें से जो संकेत उभर कर आया है वह भयावह दिखता है । भारत देश में कोरोनावायरस के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के कारण नौकरी विनाश का पहला अनुमान है । इनकी संख्या भी चौंकाने वाली है और इस संदर्भ में गंभीरता दिखाना अत्यंत आवश्यक है । फरवरी माह में करीब तीन चार करोड़ बेरोजगार थे CMIE के मुताबिक कुल 40 करोड़ भारतीय मै से 27.7 % का रोजगार इन तीन हफ्ते मै चला गया है अर्थात करीब करीब 12 करोड़ बेरोजगार लोग देश में बढ़ गए हैं और इनमें से अगर 8 करोड लोग अपने परिवार के मुख्य केवल आजीविका वाले हैं तो इस लॉ डाउन में 25 करोड़ के लगभग भारतीय बेरोजगार हुए हैं मतलब इस लोक दल ने देश की कुल 18 दशमलव 25% नागरिकों के पास जीविका चलाने का कोई साधन नहीं रहा ।
अमेरिका में बेरोजगारी ने पिछले दो हफ्तों में सुर्खियां बटोरी क्योंकि लगभग 10 मिलियन(1 करोड़ ) अमेरिका ने बेरोजगारी लाभ के लिए दायर किया है! कुछ दूरी से सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं ! और यहां हम उसी अवधि के दौरान भारत में 12 करोड नौकरी के नुकसान के बारे में बात कर रहे हैं इसकी तुलना अमेरिका मैं ग्रेट डिप्रेशन में करें! इसकी ऊंचाई पर 1932-33के आसपास, लगभग 1.5करोड़ बेरोजगार व्यक्ति थे ! आप उस समय यूरोप के सभी बेरोजगारों की जाँच सकते थे ! भारतीय लोक डॉन ने स्पष्ट रूप से इतिहास में दर्ज सबसे बड़ा एक स्ट्रोक नौकरी विनाश का कारण बना वहीं दूसरी तरफ लोगों में रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पर्याप्त खाद्यान्न होने के बावजूद लोग भूखे मरने को मजबूर है प्राप्त आंकड़े बताते के समय 2 वर्ष का खाद्यान्न भंडारों में भरा है क्या सरकार है जनता को वह खाद्यान्न नहीं बांट सकती मुसीबत की इस घड़ी में सरकार को संवेदनशीलता का परिचय देना होगा लोगों के सब्र का इम्तिहान नहीं लेना चाहिए यही वह समय है जब सरकारों को अभी भी आगामी समय में आने वाली परेशानियों से निपटने के लिए खाका तैयार करना होगा कोरोना से लड़ाई लड़ने के साथ-साथ आर्थिक लड़ाई भी लड़नी होगी समय रहते स्थिति नहीं सुधरी तो भविष्य की तस्वीर भयावह होगी मोदी जी आप निश्चित रूप से हर एक पहल पर नजर रखे हुए हैं और हो सकता है कि आगामी कदमों के विषय में भी सोचा होगा लेकिन उस मंशा को देशवासियों के सामने भी रखना होगा ! जिससे लोगों को विश्वास हो कि उसकी चिंता सरकार को है !हमारी पुन : अपील है कि सरकार कुछ ऐसा करें जिससे देश के अंदर अराजकता ना फैल सके !

विजया पाठक वरिष्ठ पत्रकार

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