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शहीद कभी मरते नहीं है, इसलिए इस जांबाज IPS को मिल रही ऐसी सुविधाएं

रायपुर। यह एक शहीद पुलिस अफसर से जुड़ी हैरान कर देने वाली दास्तान है। कीर्ति चक्र के अलावा सरकार ने उन्हें एक ऐसा सम्मान भी दिया, जो इस मुल्क में शायद ही किसी बिरले शहीद को हासिल हो। ये हैं छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में तैनात रहे पुलिस अधीक्षक आईपीएस विनोद कुमार चौबे। दरअसल, 11 अप्रैल 2009 को एक भीषण नक्सली हमले में आईपीएस विनोद कुमार समेत 29 जवान भी जांबाजी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

यह राज्य इतिहास के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक था। अपने वीर कप्तान की शहादत को सरकार ने अभूतपूर्व सम्मान दिया। शहादत के बाद भी सम्मानस्वरूप उनकी सेवा को बरकरार माना गया। जिस सरकारी बंगले में वह रह रहे थे, देवेंद्र आवासीय परिसर में मौजूद उस बंगले पर उनके नाम की तख्ती आज भी सजी हुई है।

यही नहीं, बंगले पर सरकारी गनर और गार्ड मुस्तैद रहते हैं। सरकारी गाड़ी, जिसका वे इस्तेमाल किया करते थे, आज भी बंगले पर खड़ी रहती है…। यह सब इसलिए ताकि याद रखा जा सके कि शहीद कभी मरा नहीं करते, वे तो अमर हो जाते हैं।

विनोद कुमार जीवित होते तो 22 सितंबर 2019 को रिटायर होते, उन्हें पूरे रीति-रिवाज के साथ अगले बरस रिटायर किया भी जाएगा। यह एक अमर शहीद को राज्य सरकार का सैल्यूट है। कीर्ति चक्र पाने वाले राज्य के पहले अफसर भारत सरकार द्वारा उन्हें 18 मार्च 2011 को कीर्ति चक्र प्रदान किया गया। मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में यह सम्मान पाने वाले पहले आइपीएस थे विनोद कुमार चौबे।

लगा दी थी जान की बाजी

11 जुलाई 2009 का वो दिन, जब राजनांदगांव के नक्सल प्रभावित क्षेत्र मदनबाड़ा में नक्सलियों ने भीषण हमला किया, पुलिस जवान नक्सलियों के हमले का जवाब दे रहे थे। एसपी विनोद कुमार अपने ड्राइवर के साथ मुठभेड़ स्थल के लिए रवाना हो गए

मानपुर का इलाका पार ही हुआ था कि उनके काफिले पर नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। उनकी फॉलो गाड़ी के ड्राइवर को गोली लगी, वे रुके और घायल को तत्काल अस्पताल के लिए रवाना करवाया, फिर आगे बढ़े।

इसी दौरान सूचना आई कि नक्सलियों के एंबुश में एक यात्री बस भी फंस गई है, बस में कई यात्री मौजूद थे। एसपी विनोद कुमार जैसे-तैसे यात्री बस तक पहुंचे और किसी तरह उसे एंबुश्ा से बाहर निकालकर राजनांदगांव की ओर रवाना किया।

इधर, गोलीबारी जारी थी इसलिए वे तुरंत जवानों के नजदीक पहुंचे, तभी धमाका हो गया। यह दिन उनकी शहादत के लिए याद किया जाता है। हर वर्ष इस दिन, इस घटना में शहीद हुए सभी जवानों के परिजन राजनांदगांव में जुटते हैं।

– हमारे एसपी विनोद कुमार चौबे जी को राज्य सरकार ने शहादत के बाद यह सम्मान दिया है। पुलिस विभाग के साथ ही इस राज्य के लिए उनका अति उल्लेखनीय योगदान रहा है। शहीद कभी मरते नहीं, वे अमर हो जाते हैं, वे अमर हैं। – डीएम अवस्थी, स्पेशल डीजी, नक्सल ऑपरेशन, छत्तीसगढ़।

एक बार ड्राइवर ने मुझसे कहा कि मैडम, साहब को समझाएं कि अकेले ही न निकल जाया करें। अब तो उनके बारे में कई ऐसी जानकारियां मिलती हैं जो अभी तक मुझे ही नहीं पता थीं। अभी इसी 14 अगस्त को पता चला कि उन्होंने ही यहां महिला सेल का गठन किया था। मैंने उन्हें कभी यह कहते नहीं सुना की यह मैंने किया, वे हमेशा ‘हम” कहते थे। – रंजना चौबे, धर्मपत्नी, आइपीएस विनोद कुमार चौबे

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