Mjaghar

यहां चूक गए बड़े अधिकारी और खुल गई रिश्वत की पोल

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नई दिल्ली: फोन टेपिंग, व्हाट्सएप से वीडियो कॉलिंग, मैसेज इनसे हर वो शातिर बचता है जो गलत कामों या भ्रष्टाचार से जुड़ा होता है। लेकिन हैरानी तब होती है जब इसी के जरिए केसों की तह तक पहुंचने वाले जब इन्हीं टेक्नोलॉजी के जरिए फंस जाए। कुछ ऐसा ही हुआ है सीबीआई के स्पेशल निदेशक राकेश अस्थाना से जुड़ी 2 करोड़ की जांच में। सीबीआई के राकेश अस्थाना और डिप्टी एसपी देवेन्द्र कुमार अपनी मोबाइल लोकेशन, वीडियो कॉलिंग और उन मैसेजों से फंसते दिख रहे हैं जो उन्होंने आरोप लगाने वाले सतीश सना के साथ किए हैं। आरोप लगाने वाले सतीश सना उनसे शातिर निकला, उसे शुरू से लग रहा था कि कुछ गड़बड़ है, शायद इसलिए उसने जब तक राकेश अस्थाना को वीडियो कॉलिंग के जरिए सीधे बात करते नहीं देखा तो उसने रिश्वत की रकम नहीं दी। अब यही वीडियो कॉलिंग राकेश अस्थाना के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है।

पैंडलर सोमश के घर लंदन में रुके थे अस्थाना 
सना का यह बयान सीआरपीसी की धारा 164 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया गया है जो अब कोर्ट में भी मान्य होगा। इन बयानों में सना ने कहा है कि सोमेश ने मुझे बताया कि राकेश अस्थाना मेरे सीबीआई केस का ध्यान रखेंगे, जिसके एवज में पांच करोड़ रुपए में पहले ही सहमति दी जा चुकी थी। बयानों में कहा कि सोमश ने भी बताया कि किस तरह उसने अस्थाना के पैसों को दुबई और लंदन में इंवेस्टमेंट कर मैनेज किया है। बयानों में ये तारीख भी बताई गई कि कब अस्थाना लंदन में सोमेश के घर पर रुके थे। बयानों में बताया कि सीबीआई अफसर की फोटो सोमेश के व्हाट्सएप पर देखी है और उनकी पहचान अस्थाना के रूप में की थी। सतीश बाबू सना ने बताया कि उसने मनोज को दुबई में एक करोड़ रुपए पहली किश्त के रूप में दिए थे। 1.95 करोड़ रुपए मनोज के जानने वाले सुनील मित्तल को 12 दिसम्बर 2017 को दिल्ली में रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की पार्किंग में दिए थे। इसके अलावा मनोज को 10 अक्तूबर 2018 को 25 लाख रुपए दिए और दुबई में तकरीबन उसी दौरान 25 हजार दिरहम (लगभग 5 लाख रुपए) और 30 हजार दिरहम (लगभग 6 लाख रुपए) भी दिए थे।

कौन है मनोज और सोमेश 
गिरफ्तार मनोज ने मोइन कुरेशी से जुड़ा मामला खत्म करवाने के लिए पांच करोड़ रुपए मांगे थे। मनोज दुबई में इंवेस्टमेंट बैंकर के रूप में कार्य करता है। जबकि मनोज का भाई सोमेश राकेश अस्थाना के धन के निवेश के मामलों को देखता था। सीबीआई ने मामले में उसे भी अभियुक्त बनाया है। एजेंसी की जांच में पता चला है कि रिश्वतखोरी मामले में दिसम्बर 2017 से अक्तूबर 2018 के बीच पांच बार धन का लेन-देन हुआ।

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आलोक वर्मा के एक करीबी ने मिलवाया सना को
बताया जाता है कि जब कैबिनेट सेक्रेटरी की शिकायत पर कुछ नहीं हुआ तो इसी बीच उसकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जो निदेशक आलोक वर्मा का करीबी था। उसके जरिए वह 14 अक्तूबर को सीबीआई निदेशक से मिला। जिसके बाद सीबीआई निदेशक ने अगले ही दिन कैबिनेट सेेक्रेटरी को भेजे गए पत्र और सना से एक शिकायत ली और तत्काल अस्थाना सहित सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दे दिए।

अधिकारी ऐसे हो गए ट्रैप 
मामला शुरू हुआ 12 अक्तूबर 2017 को। जब एक व्यक्ति ने अधिकारी बन कर हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना को फोन किया कि तुम मोइन कुरेशी की चल रही जांच में आरोपी बनाए जा रहे हो। इसी कॉल से सना बेहद डर गया, जिसके बाद एकाएक दो दिन में ही उसे एसआईटी के नाम से नोटिस मिला, जिसमें उसे जांच में शमिल होने के लिए कहा गया। इससे सना को साफ हो गया है कि वह फंसने वाला है। सीबीआई उसे लगातार ट्रैप कर रही थी, इसलिए जब वह दुबई गया तो उसकी मुलाकात होटल में एक पैंडलर मनोज प्रसाद से हुई। मनोज प्रसाद ने उसे सोमेश नामक व्यक्ति से मिलवाया। सना को पहले यकीन नहीं हुआ लेकिन जब मनोज प्रसाद ने कुछ फोटो दिखाए तो सना को यकीन हो गया ये व्यक्ति सीबीआई के नजदीक है। यहीं गलती कर गया मनोज प्रसाद, प्रसाद से सीधे फोन देवेन्द्र कुमार को मिला दिया और वहीं से बातचीत की। ये बातचीत रिकॉर्ड पर सीबीआई ने ले ली है। इसके बाद जब सतीश हैदराबाद पहुंचा तो उसने अपने करीबी एक राज्यसभा सदस्य को ये बातें बताईं।

सीबीआई से जुड़ा था मामला
मामला सीबीआई से जुड़ा था इसलिए सलाह दी गई कि बचना है तो पैसा दिया जाए,लेकिन ये भी बताया गया पैसा सही जगह दिया जाए। जिसके बाद से ही जहां सीबीआई के अधिकारी देवेन्द्र उसे डरा कर रिश्वत वसूल रहे थे वहीं सना भी लगातार उन पर नजर रख रहा था। इसी बीच प्रफुल्ला नामक व्यक्ति से भी सना की मुलाकात हुई। सूत्रों के मुताबिक ये व्यक्ति रॉ अधिकारी सामंत कुमार गोयल के साथ था। सामंत ने जब अपना परिचय सना को दिया तो उसे यकीन हो गया कि अब वह बच जाएगा। इसलिए उसने मांगी गई 5 करोड़ की रिश्वत में से 2 करोड़ की रिश्वत दे भी दी। ये रिश्वत दो बार में दी गई। अधिकारी ट्रैप न हो इसलिए वे रिश्वत सीधे नहीं बल्कि पैंडलरों के जरिए मांग रहे थे, वहीं सीबीआई ऑफिस में बयानों के जरिए देवेन्द्र कुमार उसे बचाव का रास्ता बता रहे थे और उसके बयानों को लिख रहे थे।

अस्थाना को लग गई थी भनक इसलिए खुद की पहल, और फिर घिर गए
बताया जाता है कि 24 अगस्त को सतीश सना ने कैबिनेट सेकेट्ररी को एक पत्र लिख राकेश अस्थाना समेत सभी लोगों की शिकायत की थी, क्योंकि सना को पता चल चुका था कि उसे जिस केस में फंसाने की बात की जा रही है उसमें उसका रोल नहीं साबित हो सकता। यही नहीं वे ये जान चुका था कि उसे जबरन धमका ये रिश्वत ली जा ही है। सूत्रों के मुताबिक ये पत्र अस्थाना के हाथ लग गया,जिसके बाद एकाएक अस्थाना ने अपने बचाव के सीवीसी से सीधे सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा सहित ईडी के अधिकारियों की शिकायत की और अंदेशा जताया कि उन्हें भ्रष्टाचार के केस में फंसाया जा सकता है। लेकिन वे यहीं चूक कर गए क्योंकि उनकी शिकायत सना के लगाए गए आरोपों के बाद की गई। दूसरी तरफ पीएमओ के करीबी होने का अस्थाना फायदा उठा चुके थे और उन्होंने मोइन कुरेशी से जुड़ी जांच अपने हाथ में ले ली थी।

       कौन हैं राकेश अस्थाना

  • राकेश अस्थाना 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस हैं।
  • पहली बार 1996 में चर्चा में आए, जब उन्होंने चारा घोटाला मामले में लालू यादव को गिरफ्तार किया
  • 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व भी राकेश अस्थाना ने किया
  • अहमदाबाद ब्लास्ट और आसाराम केस की जांच भी इन्होंने ही की
  • 2017 अक्तूबर को पीएमओ के निर्देश पर सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर नियुक्त हुए
  • इससे पहले वह अतिरिक्त निदेशक के पद पर काम कर चुके हैं
  • ये वडोदरा और सूरत के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके हैं और इन्हें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का करीबी भी माना जाता है

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