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क्या छात्रों के जीवन का मोल नहीं है ?

राखी सरोज :-

शिक्षा जिसका महत्व हम सभी के जीवन में है,और रहेगा। 

कोरोनावायरस ने हमारे जीवन में आकर बदलाव का खेल इस तरह से खेला है कि अब लगता है जैसे पहले जैसा कुछ रहा ही नहीं है। नौकरी, पढ़ाई या जीवन सब कुछ बदल गया है। बिमारी का बढ़ता खतरा हमारे सर पर मंडरा रहा है और हम इस से बचने के  हर उपाय कर रहे हैं। किंतु हमारी सरकार और शिक्षा व्यवस्था को बच्चों की समस्याओं से कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें बस यह चाहिए कि हमारे सभी पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा जल्द से जल्द हो जाए, ताकि वह अपना अगला सत्र शुरू कर सकें। आज हमारे देश में 70 हजार के आसपास एक दिन में केस आ रहे हैं, कोरोनावायरस के। ऐसे में यदि हम बच्चों को परीक्षा के लिए सेंटर पर बुलाते हैं तब उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। पीने का पानी, हवा, प्रत्येक परीक्षार्थी द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी आवश्यक वस्तु क्या उतनी सुरक्षित होंगी जितना उन्हें होना चाहिए। 
कोरोनावायरस ने जिस प्रकार से हमारे जीवन को बदला है तब क्या हमारे फैसले बहुत जरूरी है यह विचार करने के लिए हम आने वाले समय में अपनी समस्याओं को बढ़ाते हैं या कम करतें हैं। बच्चों के जीवन के साथ होने वाला खिलवाड़ है यह सभी प्रवेश परीक्षा, जिसे यूजीसी इस वक्त आयोजित करने जा रहा है। छात्रों का विरोध बेमतलब हो सकता है किन्तु उनका जीवन नहीं। लाखों करोड़ छात्रों की जान से होने वाला यह खिलवाड़ किस आधार पर। जब 100 की गिनती में हमारे यहां केस आ रहें थें, तब इन परीक्षाओं पर रोक लगाई गई और आज जब हजारों की संख्या में केस आ रहें हैं तब आप बच्चों को परीक्षा देने के लिए बुला रहें हैं। क्या यह बच्चों के आम व्यक्ति होने की सज़ा है। जिसकी सुनवाई ना अदालतों में और ना सरकारों में। आज लोकतंत्र बस एक कठपुतली बन गया है चंद लोगों के हाथों का, वह जैसे चाहते हैं उसके साथ खिलवाड़ करते हैं ऐसा लग रहा है। काश हमारे यहां भविष्य के सपने देखने वाले बच्चों की सुनी जाती। कोई उनकी तकलीफ और परेशानियों को समझाता।
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