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अयोध्या विवाद: राम मंदिर मामले में जनवरी से शुरू होगी सुनवाई

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लखनऊः सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर हुई सुनवाई जनवरी तक के लिए टल गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने अब इस मामले के लिए जनवरी 2019 की तारीख तय की है। वहीं मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच बनाने के आसार हैं। बता दें कि, राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को फैसला आना था।

क्या है अयोध्या मामला? 
राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर, 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था। फैसले में कहा गया था कि विवादित जमीन को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। दूसरी तरफ, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी।

इसके बाद, इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई। एक पक्ष ने कहा कि मामला संवैधानिक पीठ में जाए और अन्य ने कहा कि इसे जल्द निपटाएं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई, 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में इसके बाद से यह मामला लंबित है।

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जानिए कब-कब इस मामले में क्या-क्या हुआ?

  • 1527 में पहले मुगल सम्राट बाबर ने बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया।
  • ये मस्जिद उस जगह बनवाई गई, जिसे हिंदू अपने आराध्य राम का जन्मस्थान मानते हैं।
  • 1853 में पहली बार सांप्रदायिक उन्माद फैला।
  • 1859 में अंग्रेज शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी। परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।
  • 1949 में पहली बार भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में मिली. जिसके बाद दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया. फिर सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला जड़ दिया।
  • 1984 में कुछ हिंदुओं ने एक समिति का गठन किया, जिसकी अगुवाई लालकृष्ण आडवाणी ने की।
  • 1986 में जिला मजिस्ट्रेट ने हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दे दी।
  • 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज़ किया और विवादित स्थल के पास राम मंदिर की नींव रखी।
  • 1990 में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को कुछ नुकसान पहुँचाया।
  • 1992 में विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद देश भर में हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे, जिसमें 2000 से ज़्यादा लोग मारे गए।
  • साल दर साल कार्रवाई का दौर जारी रहा और आखिरकार 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। जहां रामलला विराजमान हैं वह और आसपास की जमीन राम मंदिर के लिए दी गई। एक तिहाई सुन्नी वक्फ बोर्ड को और एक तिहाई जमीन निर्मोही अखाड़ा को दी गई।
  • 9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
  • 21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही।
  • 19 अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।
  • 9 नवंबर 2017: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने बड़ा बयान दिया था। रिजवी ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनना चाहिए, वहां से दूर हटके मस्जिद का निर्माण किया जाए।
  • 16 नवंबर 2017: आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने की कोशिश की उन्होंने कई पक्षों से मुलाकात की।
  • 5 दिसंबर 2017: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने 8 फरवरी तक सभी दस्तावेजों को पूरा करने के लिए कहा।
  • 8 फरवरी 2018: सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर नियमित सुनवाई करने की अपील की., लेकिन पीठ ने उनकी अपील खारिज कर दी।
  • 14 मार्च 2018: वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कोर्ट से मांग की कि साल 1994 के इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के फैसले को पुर्नविचार के लिए बड़ी बेंच के पास भेजा जाए।
  • 20 जुलाई 2018: सुप्रीम कोर्ट ने राजीव धवन की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 27 सितंबर 2018: कोर्ट ने इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के 1994 का फैसला, जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं है’। इसे बड़ी बेंच को भेजने से इनकार करते हुए कहा था कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला सिर्फ भूमि आधिग्रहण के केस में ही लागू होगा।

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