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किसानो को मोहरा बनाकर पार्टियां सेंक रही राजनीतिक रोटियां

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कैलाश सेजकर मध्यप्रदेश देश में आज सबसे ज्यादा चर्चित मुद्दा किसान आंदोलन है।जिसमें पंजाब और हरियाणा के किसानों ने दिल्ली को चारो ओर से घेर रखा हैं।किसानों ने सरकार द्वारा बनाए किसान कानून का विरोध करते हुए धरना आंदोलन तेज कर दिया है। स्थिति यह है कि यह किसान जिन किसान नेताओं के कहने पर आए अब वो सरकार की भी नही सुन रहे हैं।

किसानो को बनाया मोहरा

Shreegrah

पंजाब में राजनीतिक सत्ता पाने के लिए कांग्रेस अकाली दल दोनो भिड गए हैं।अपने अपने हथकंडो से किसानो को लुभावने की कोशिश कर रहे है।वहीं दिल्ली की सरकार किसानों की मेहमानवाजी में पीछे नही है। इस प्रकार तीनों पार्टी किसानों को अपने अपने तरीके से करीब लाना चाहती है। आज इन तीनों पार्टियों के नेतृत्व की राजनीतिक लोलुपता का खामियाजा किसानों और दिल्ली की जनता को भुगतना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी ने शहीन बाग वाले मामले में भी आंदोलनकारियों को सपोर्ट किया था। आज भी वही कर रही हैं ये कैसी राजनीति हैं किसानों को मोहरा बना कर अपने सियासत की महत्वकांक्षा को पूरी करने के लिए किसानों को आंदोलन की आग में झोंक दिया है।इन सब से अलग हटकर कुछ और नाम भी सामने आ रहे है।

पंजाब में विधानसभा चुनाव 2022 में

इन तीनों दलों के नेताओं समझ इतनी है कि अगर हम किसानों को अपने पाले ले आते हैं तो आगामी विधान सभा चुनाव पंजाब हैं उसका फायदा मिल जायेगा। वहीं पुराने ढर्रा जिसमें भाजपा को घेरने के लिए सारे दल एक हो जाते हैं। आज फिर एक बार वही स्थिति बनी हैं। सब का टारगेट अमित ष्षाह और नरेद्र मोदी की छवि खराब करना हैं।राजनीति महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए इस किसानों का सहारा लिया हैं।इससे पूर्व दिलली चुनाव के समय शहीन बाग का आंदोलन का सहारा लिया और दिल्ली की जनता को ेदंगे की आग में झौंक दिया सरेआम बंदूके चली पुलिस वालो जख्मी हुए।कई घरों से पत्थर विस्फोटक सामग्री मिली थी आज फिर एक बार आज एक बार दिल्ली में भय और दहशत का माहौल बन गया हैं। दिल्ली की जनता अभी पशेपेश में है न जाने कब क्या हो जाए।

कानून बापिस ले सरकार

पंजाब हरियाणा और दिल्ली के नेताओं ने किसान बिल के विरोध में किसानों को भडकाकर सरकार के विरुद्ध खड़ा किया हैं।यहीं एक अच्छा मौका था तीनो कानून को किसानों को अपने तरीके से उसकी नाकामियां गिनाई हैं और लोगो भडकाया है। वहीं सरकार से इस संबंध में बातचीत भी नही करना चाहते है। किसानों का कहना है सरकार यह कानून वापिस ले ऐसी जिद पर अडे किसान किसी की नही सुनना चाहते है।

केंद्र सरकार को आया पसीना

भाजपा की केंद्र सरकार की मुसीबते कम नही हो रही है। एक के बाद एक समस्या खडी हो रही हैं।जहां एक ओर कोरोना से निपटने के लिए जदृदोजहद कर रही हैं।दूसरे किसानों का यह आंदोलन ने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमितषाह की नींद हराम कर दी है।वे किसानों से बातचीत करना भी चाहे तो अभी किसान उनकी सुनने वाले नही है।किसानों का नेतृत्व करने वाले नेता सरकार को अपनीश्षर्तो पर झुकाना चाहते हैं।

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