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अपनी बात :- आइए ! डेल्टा वेरिएंट में आपका स्वागत है !

मकड़ाई समाचार हरदा । ये शीर्षक मज़ाक नहीं । बल्कि इनदिनों शहर में भीड़भाड़ के जो हालात हैं। इसको देखके लगता है कि आप हम सब कोरोना के नए वेरिएंट के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
ये हैरत अंगेज ही है कि एक माह पहले एक दिन में दो दो दर्जन मौतों पर मारे डर के मुक्तिधाम तो छोड़िए घर से बाहर न निकलने वाले हम लोग अब एक भीड़ में तब्दील होकर सड़क पर उतर आए हैं।

अर्थव्यवस्था के चलते अब बार बार बाजार बंद होना भी सम्भव नहीं। पब्लिक बताए बाजार में ऐसा क्या है जो सबके सब एक साथ बाजार में आ गए हैं। एक भारी भीड़ के रूप में। हरदिन भीड़ बाज़ार।

पक्ष विपक्ष के जिम्मेदार सियासतदांओं ने भी जैसे कोरोना पे विजयश्री हासिल कर ली हो। इनके प्रदर्शन जमघट से आये दिन इस बात के पूरे प्रमाण मिलते हैं।

ऐसा लगता है कोरोना की गाइड लाइन भी मानों विज्ञापन की ही विषय वस्तु हो। मास्क लगाना, दो गज की दूरी, सोशल डिस्टेंसिंग सब कुछ कागजों पर सीमित।

हैरानी इस बात की है कि केंद्र सरकार अखबारों में विज्ञापन देकर वैक्सीन के फ्री होने की बात बता रही । वहीं प्रदेश सरकार विज्ञापन पे खर्च कर डिस्टेंसिंग मास्क हाथ धोने को लेकर जागरूक कर रही। फिर वैक्सीन अभियान के लिए मंच तैयार कर इन्हीं बातों के दुहराव के क्या मायने !

इधर , हरदा में मिशन वैक्सीन को लेकर आज आयोजित कार्यक्रम में जिस तरह प्रोटोकॉल के विरुद्ध दृश्य सामने आए, उसकी चर्चा राजधानी तक गयी।

कठघरे में जनता –

अब फ्री की वैक्सीन लगाने के लिए इनाम दिए जाएं, निमंत्रण दिया जाए तो ये जनता की जागरूकता पर, सक्रियता पर सवाल खड़े करता है ? ये जन जन की नैतिक जिम्मेदारी है कि वो बताए गए सेंटरों पर जाकर अनिवार्य रूप से वैक्सीन लगवाएं। किसी मनुहार की आवश्यकता क्यों है आखिर आपको।

एक दैनिक अखबार की खबर के मुताबिक प्रदेश में कोरोना काल मे 1 अप्रैल से 1 जून तक 3000 करोड़ रुपए निजी हॉस्पिटलों ने कोरोना पीड़ितों के इलाज से अर्जित किये हैं।

अब जब वैक्सीन से इतर कोरोना को लेकर कोई कारगर इलाज नहीं है। ये आप हम सब का दायित्व है कि हम निजी हॉस्पिटल के भारी बिल भरने या मुक्तिधाम में हमारे अपनों के प्रोटोकॉल में लपेटे जाने की बात भूलें नहीं। हमने एक एक इंजेक्शन, ऑक्सीजन सिलेंडर, गोली के लिए कितना संघर्ष देखा, ज़रा याद करें।

अभी बच्चों तक इस बीमारी का कहर नहीं आया है। ईश्वर करे न आये। अन्यथा, हम किसके आगे अपना दुःख कहेंगें। इस पर विचार करें।

संघठनों का योगदान –

हरदा जिले में सामाजिक संगठनों ने कोरोनाकाल में ऑक्सीजन, भोजन व्यवस्था व अन्य व्यवस्था में जो सक्रिय सहयोग दिया वो वंदनीय, अनुकरणीय है।

एक सुझाव –

प्रशासन को चाहिए कि वार्ड स्तर पे पार्षद, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से गणना हो कि हर घर मे वैक्सीन की क्या स्थिति है। वार्ड में ही एक स्थान पर टीकाकरण की व्यवस्था हो। समस्त वार्डवासियों को जो 18 से 45 और ऊपर हों उन्हें प्रथम, द्वितीय टीकाकरण समय पर लग सके। इससे शहर में वैक्सीन सेंटर पर भीड़ भाड़ पर नियंत्रण लग सकेगा।

एक निवेदन –

हरदा की जनता से करबद्ध प्रार्थना है कि बापू द्वारा हृदय नगरी के नाम से पुकारे जाने वाले हरदा को स्वयं संभालें। भीड़भाड़, अनावश्यक बाज़ार मोह को कुछ समय के लिए त्यागें। अन्यथा ये बाज़ार तो हमारा आख़िरी बाजार करने के लिए पूरी तरह से तैयार है ही ।

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