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कब है कबीर दास जयंती, उनके जीवन से जुड़े तथ्य और जानें कहां हो रहा आयोजन

Kabirdas Jayanti 2021 : 24 जून 2021 को ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन कबीर दाज जी की जयंती मनाई जाएगी। आज भी समाज सुधार के क्षेत्र में कबीर दास जी का नाम सर्वोपरी है। संत कबीरदास जी की प्रसिध्द रचनाओं में बीजक, सखी ग्रंथ, कबीर ग्रंथावली और अनुराग सागर शामिल है। कबीरदास जी की रचनाएं इतनी ज्यादा प्रभावशाली हैं कि इनका गुणगान भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी किया जाता है। इनकी रचनाओं से आकर्षित होकर विदेशी लोग भी इसमें रम गए हैं। कबीरदास जी के कार्यों की पहचान उनके दो पंक्तियों के दोहे से है, जिन्हें ‘‘कबीर के दोहे’’ के नाम से जाना जाता है।

संत कबीर दास जी का जन्म काशी के समकक्ष लहरतारा ताल में 1398 में हुआ था। इनके माता-पिता के विषय में लोगों का कहना है कि जब दो राहगीर, नीमा और नीरू विवाह कर बनारस जा रहे थे, तब वह दोनों विश्राम के लिए लहरतारा ताल के पास रूके। उसी समय नीमा को कबीरदास जी कमल के फूल में लपटे हुए मिले थे। कबीर जी ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। उन्होनें अपना संपूर्ण जीवन समाज की बुराइयों को दूर करने में लगा दिया। दोहे के रूप में उनकी रचनाएं आज भी गायी गुनगुनाई जाती हैं। इन्होनें अपने पूरे जीवन काल में पाखंड, अंधविश्वास और व्यक्ति पूजा का विरोध करते हुए अपनी अमृतवाणी से लोगों को एकता का पाठा पढ़ाया।

संत कबीर के दोहे हमें प्रेरणा देते हैं और साथ ही अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने का काम करते हैं। आज भी इनकी वाणी अमृत के समान है, जो व्यक्ति को नया जीवन देने का काम कर रही है। कबीरदास जी की हर रचनाओं का प्रयास यही था की लोग उनकी रचनाओं से अपने अंदर प्रेम, सद्भाव और एकता कायम करें। इनके नाम से कबीर पंथ संप्रदाय की स्थापना भी की गई थी। धर्मदास ने उनकी वाणियों का संग्रह ‘‘बीजक’’ नाम के ग्रंथ में किया जिसके तीन मुख्य भाग हैं। -साखी, सबद, रमैनी

कबीरदास जी की रचनाओं से प्रेरणा पाकर हिन्दू-मुसिलम धर्म के लोग काफी प्रभावित हुए थे। जब कबीरदास जी का मगहर में देहावसान हो गया था तो उनके हिन्दू और मुस्लिम भक्तों में उनके शव के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की स्थिति भी पैदा हो गई थी। ऐस कहा जाता है कि उस समय जब उनके मृत शरीर से चादर हटाई गई थी तब वहां पर लोगों को सिर्फ फूलों का ढेर ही मिला। जिसके बाद दोनो धर्म के लोगो ने उस फूल का बंटवारा करके अपने-अपने अनुसार अंतिम संस्कार को अंजाम दिया।

बतादें कि मंगलवार से शुरू होने जा रहे नानपारा से सटे कबीर आश्रम पर 3 दिवसीय सेवा, पूजन व भंडारे का आयोजन होने जा रहा है। महंत राम निवास दास ने बताया कि कबीर दास जी की जयंती के अवसर पर 3 दिवसीय कबीर वाणी, पूजन व सूक्ष्म भंडारे का आयोजन ग्राम भटेहटा के कबीर आश्रम पर किया जा रहा है। जिसमें कोरोना निर्देश का पालन करते हुए सादगी से कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। साथ ही यहां पर दूसरे आश्रमों से कबीर पंथ के संत भी आएंगे।

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