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घर में कर रहे थे भोजन, अचानक दरवाजे पर आ धमका हाथी, अफरातफरी में चार सदस्य घायल

मकड़ाई समाचार अंबिकापुर। सरगुजा जिले के मैनपाट में हाथी प्रभावितों के लिए तैयार कालोनी भी अब सुरक्षित नहीं रह गई है। यहां तक हाथियों का आना-जाना शुरू हो गया है। मंगलवार की रात एक हाथी कंडराजा के हाथी प्रभावितों की कालोनी के नजदीक पहुंच गया। यहां एक घर में परिवार के सदस्य भोजन कर रहे थे। दरवाजे के पास हाथी को खड़ा देख जान बचाकर सभी भागने लगे।

इस आपाधापी में अंधेरे की वजह से मची भगदड़ में परिवार के चार लोग घायल हो गए, इनमें से तीन को मेडिकल कालेज अस्पताल अंबिकापुर में शिफ्ट किया गया है। एक घायल ग्रामीण का उपचार नर्मदापुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है। ओडिशा के नौ हाथियों का दल पिछले कई महीने से मैनपाट में विचरण कर रहा है। इस दल का एक सदस्य अलग घूम रहा है। इस हाथी का स्पष्ट लोकेशन नहीं मिल पाने के कारण वन विभाग को भी दिक्कत हो रही है।

मंगलवार की शाम दल से अलग घूम रहा हाथी कंडराजा के बैगा पारा पहुंच गया। हाथी प्रभावितों की कालोनी से लगी हुए बैगापरा के एक कच्चे मकान में एतवा माझी के घर उसकी बहू उर्मिला, पोती जीवंती के अलावा परिवार का एक और सदस्य गणेश भोजन कर रहे थे। घर का दरवाजा खुला हुआ था। अचानक हाथी दरवाजे के पास आ गया, इसके पहले की हाथी घर के भीतर प्रवेश करता उसे देख कर लोग दहशत में आ गए।जान बचाने के लिए अंधेरे में ही सभी बदहवास भागने लगे। बारिश और धुंध की वजह से भगदड; में गिरकर सभी चोटिल हुए हैं। घटनास्थल के नजदीक रेंजर फेकू चौबे के नेतृत्व में वन विभाग का अमला मौजूद था।

रात में ही चारों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नर्मदापुर में भर्ती कराया गया। इनमें से जीवंती, उर्मिला और गणेश को मेडिकल कालेज अस्पताल अंबिकापुर भेज दिया गया है। जबकि एतवा माझी का उपचार नर्मदापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही चल रहा है। इधर दल से बिछड;े हाथी ने हाथी प्रभावितों की कालोनी से लगे दो घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया है।घर में रखा अनाज भी हाथी खाया और सारी रात आसपास विचरण करते हुए सुबह नजदीक के जंगल में चला गया।

मालूम हो कि कुछ वर्ष पहले कंडराजा में हाथियों ने भारी तबाही मचाई थी। माझी, मझवार समुदाय के लोगों का कच्चा घर जमींदोज कर दिया था। बार-बार हाथियों के पहुंचने के कारण वन विभाग ने ऊपरी क्षेत्र में प्रभावितों के लिए 44 नए मकानों का निर्माण कराया था। हाथियों से सुरक्षित जगह मानकर मुआवजा राशि और प्रशासन से अतिरिक्त सहायता लेकर तैयार कालोनी में पक्के मकान बनाए गए थे। वन अधिकारियों का मानना था कि जहां पर हाथी प्रभावितों को शिफ्ट किया जा रहा है वहां तक हाथियों की पहुंच नहीं होगी।

हाथियों से बचाव के लिए पक्के मकान और घरों के भीतर ही अनाज रखने की कोठी भी बनाई गई थी लेकिन यह स्थान भी अब सुरक्षित नहीं रह गया है।पक्के मकानों के अगल बगल में प्रभावितों ने कच्चा मकान भी बनाया है।हाथी की आवाजाही शुरू हो जाने से लोग दहशत में आ गए हैं। सारी रात हाथी प्रभावितों की कालोनी में भी भयमिश्रित कौतूहल का वातावरण बना रहा।

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