ब्रेकिंग
माघ मेला 2022: नहीं देखी होगी ऐसी साधना...पूजा पाठ का ये अनोखा तरीका, आकर्षण का केंद्र बना शिविर असदुद्दीन ओवैसी ने किया बाबू सिंह कुशवाहा और भारत मुक्त मोर्चा के साथ गठबंधन, निकाला 2 CM का फॉर्मूल... ओडिशा में 927 बच्चे Covid पॉजिटिव, 7 मरीजों की मौत- UP में स्कूल कॉलेज 30 जनवरी तक बंद कोरोना के बढ़ते मामले ने बढ़ाई चिंता, पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा, इन चीजों पर रहेगा प्रतिबंध Elections 2022: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, पांच राज्यों में चुनावी रैली पर जारी रहेगी पाबंदी जम्मू कश्मीर: शोपियां में शुरू हुई मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने ढेर किया एक आतंकी गोवा चुनाव: 24 घंटे के अंदर BJP को लगा दूसरा बड़ा झटका- पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने की ... MP NEWS : पत्‍नी के साथ अप्राकृतिक सेक्‍स कर नौकरों, दोस्‍तों से गैंगरेप करवाता था ये हैवान ! हरदा न्यूज़ : नवनिर्मित सिविल लाइन थाने का कृषि मंत्री कमल पटेल ने फीता काटकर किया उद्घाटन दिग्गज आइटी कंपनियों पर चीन ने कसा शिकंजा, गतिविधियों और वित्तीय क्षेत्र में निवेश पर पाबंदी

शव वाहन से डीजल चोरी के मामले में आरोपित निगमकर्मी को हटाया, जांच के आदेश

मकड़ाई समाचार भोपाल। भोपाल में नगर निगम के शव वाहन से डीजल चोरी करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। नवदुनिया द्वारा खबर प्रकाशित करने के तत्काल बाद नगर निगम आयुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी के निर्देश पर फायर ऑफीसर रामेश्वर नील ने वीडियो में दिखाई दे रहे कर्मचारी शावर को हटा दिया है। ड्रायवर की ड्रेस पहने एक कर्मचारी पांच लीटर की एक केन में शव वाहन से डीजल निकालकर अज्ञात जगह पर छुपा रहा था। इसका एक वीडियो इंटरनेट मीडिया में वायरल हुआ। वीडियो में कर्मचारी के पास कुछ लोग भी खड़े नजर आ रहे हैं। इसके चलते माना जा रहा है कि इस डीजल चोरी के मामले में अन्य लोग भी उसके साथ संलिप्त थे। लिहाजा पूरे मामले पर जांच बैठा दी गई है। डीजल कब से चोरी हो रहा है, कौन-कौन कर्मचारी और अधिकारी इस डीजल चोरी के मामले में संलिप्त हैं, इसके संबंध में नगर निगम के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

2017 में भी सामने आया था नगर निगम में डीजल घोटाला

गौरतलब है कि नगर निगम में डीजल चोरी या डीजल घोटाला पहली बार नहीं हुआ। इससे पहले भी डीजल चोरी के मामले सामने आ चुके है। 2017 में तत्कालीन कमिश्नर ने दिसंबर मे सीवेज व फायर के प्रभारी और जलकार्य के सहायक यंत्रियों को नोटिस दिए थे। फिर मार्च-18 में 19 एएचओ, 14 एई और फायर व सीवेज प्रभारी को जीपीएस रिपोर्ट के आधार पर नोटिस दिए गए। ये बेअसर हो चुके हैं। क्योकि आज तक इनमें से किसी ने भी इसका जवाब नहीं दिया है। लिहाजा कुछ कर्मचारियों पर तो गाज गिरी, लेकिन अधिकारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

एक अपर आयुक्त की भूमिका भी सवालों के घेरे में थी

डीजल चोरी की जांच तत्‍कालीन अपर आयुक्त मलिका निगम नागर से कराई गई थी। पिछले साल उन्होंने यह रिपोर्ट तत्कालीन निगमायुक्त अविनाश लवानिया को सौंप दी थी। इसमें उन्होंने खुलासा किया था कि किस तरह अधिकारियों, कर्मचारियों की मिलीभगत से रास्ते में ही टैंकर से डीजल चुरा लिया जाता था। फिर इसे कुप्पियों में भरकर बेच दिया जाता था। रिपोर्ट में एक अपर आयुक्त की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीजल टैंक प्रभारी रहे मधुसूदन तिवारी पर गाज गिरी। तिवारी के निलंबन अवधि को अवैतनिक अवकाश में बदलने के साथ दो इंक्रीमेंट पर भी रोक लगा दी गई थी। रिपोर्ट में बताए बाकी दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई। निगम के 785 वाहनों में जीपीएस लगा है। सिस्टम की मदद से कंट्रोल रूम में बैठकर वाहनों की मॉनिटरिंग की जाती है। इसके आधार पर वाहनों को दिए डीजल और कितना चले, इसकी रिपोर्ट तैयार की गई।

कागजों में सिमटी रही जांच

इस मामले में तब परिवहन अधिकारी रहे आरके परमार के खिलाफ जांच की जा रही है। जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। परमार के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत की गई थी। वर्कशॉप व डीजल टैंक मामले में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। परमार पीएचई के अधिकारी थे और निगम में प्रतिनियुक्ति पर थे। ऐसे में तत्कालीन कमिश्नर ने पीएचई के आला अफसर को पत्र लिखकर परमार को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई और परमार रिटायर भी हो गए।
Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Don`t copy text!