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जघन्य बर्बरतापूर्ण अपराध करने वाले आरोपियों को फाँसी या सीधे एनकाउंटर हो – श्याम सिंह कुमरे

मामला नेमावर : लापता आदिवासी परिवार माँ 3 बेटी 1 बेटे को रस्सी से गला घोंटकर, खेत में दफनाने का

मकड़ाई समाचार भोपाल। देवास जिले के नेमावर में मंगलवार को एक खेत से 5 शवो को जेसीबी से खोदकर निकाला गया।मृतको की निर्ममता से हत्या कर खेत में दफना दिया। उक्त मामले में आदिवासी संगठनों के पदाधिकारियों ने आक्रोश जताया और पुलिस कार्य प्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए है।

मामले में डा.श्याम सिंह कुमरे मूल निवासी स्वाभिमान सेना प्रमुख ने इस संबंध में कहा नेमावर मे एक ही परिवार के 5 सदस्यों की निर्मम हत्या पर हर जाति, धर्म की न्याय प्रिय जनता सदमे में है और वे यह सोचने के लिए मजबूर हैं कि ईश्वर न करें कभी इस प्रकार की घटना उनके परिवार के साथ हो। और उनकी यही इच्छा रही होगी कि दोषियों को तत्काल फांसी होना चाहिए।

पुलिस को 47 दिन लगे,जबकि काल डिटेल हाथ में थी

श्री कुमरे ने कहा कि दि 17 मई 2021 से 47 दिनों तक हमारी रक्षक पुलिस सूचना मिलने के बावजूद भी मोबाइल नंबर ज्ञात होने तथा मोबाइल चालू होने पर भी कितनी गहन विवेचना तत्परता पूर्वक कर ,कंकाल होने के पहले तक, कोई कारवाई करना जरूरी नहीं समझी। हमारी रक्षक पुलिस का मनोबल बढ़ाने के बहाने कहीं हम उसे दुस्साहसी तो नहीं बना रहे हैं जिससे वह चिंता मुक्त होकर किसी भी घटना की परवाह नहीं कर रही है।या उसकी प्राथमिकता में केवल वीआईपी से संबंधित घटना ही है। आमजन की कोई प्राथमिकता है ही नहीं। पुलिस की ऐसी उदासीनता आज नहीं तो कल वीवीआईपी को भी भारी पड़ेगी।
उच्च स्तर पर विचार होना चाहिए कि पर्याप्त समय पूर्व सूचना मिलने तथा मोबाइल नंबर ज्ञात होने व मोबाइल चालू होने पर एवम थाने के समीप ही अपहृत परिवार होते हुए भी, क्या पुलिस तत्काल अपहृत लोगों का पता लगा सकने में समर्थ नहीं थी।
इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।पुलिस ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में कोताही बरती है।

अपराधियों को फांसी हो या एनकांउटर

आदिवासी परिवार के 5 सदस्यो की निर्ममता पूर्वक हत्या करने वाले अपराधियो को फांसी या एनकांउटर किया जाना चाहिए।अगर आदिवासी परिवार को न्याय नही मिला तो अपराधियों के हौसले बुलंद हो जायेंगें और मानवता को शर्मसार करने वाली इनकी अपराधिक प्रवृत्ति का राजनीतिक पकड़ ने बढावा दिया है। ऐसे दोषियों को फांसी होना चाहिए तत्काल न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण कर एनकाउंटर कर दिया जाना चाहिए।मामले में पुलिस को भी खुद सोचना चाहिए एक गरीब आदिवासी परिवार की गुमशुदगी हुई और उसकी जांच पडताल नही कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी आखिर अपने कर्तव्य और दायित्व निर्वहन में कोताही क्यूं बरती ऐसे लोगो को तत्काल सरकार को निलंबित करना चाहिए।

पुलिस को स्वयं विचार करना चाहिए कि घटना की जानकारी होने पर भी विवेचना में कहा चूक हुई।पुलिस के लिए यह एक घटना मात्र हो सकती है किन्तु सभ्य समाज के लिए यह गंभीर चिन्ता का विषय है।पुलिस के संबंधितों को निलंबित कर उन्हें भी सह अभियुक्त बनाया जाना चाहिए ,शायद इससे कार्यप्रणाली में तत्परता आए।माना कि पर्याप्त पुलिस नहीं है, काम का बोझ है किन्तु ऐसा भी नहीं है कि ऐसी घटनाओं को रोका न जा सके। अधिकांश पुलिस बहुत तत्परता, संवेदनशीलता से काम भी करती है उनका संरक्षण और प्रशंसा भी करनी चाहिए।

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