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शिखरधाम पर विराजते है भीलटदेव हरदा के रोलगांव में जन्मे भीलटदेव ने नागलबाडी में बनाया अपना स्थान

     मध्य प्रदेश के बड़वानी में स्थित नागलवाड़ी शिखरधाम स्थित 700 साल पुराना भीलटदेव मंदिर है। दरअसल लोगों का मानना है कि बाबा भीलटदेव यहां नाग देवता बनकर रहते हैं।हजारो की तादात में श्रद्धालु नागपंचमी के दिन पूजा अर्चना करने आते हैं। नागलवाड़ी शिखरधाम घने जंगल एक विशाल पहाड़ी पर स्थित है। और यह मंदिर राजपुर तहसील में आता है। शिखरधाम के चारो और बहुत सुंदर प्राकृतिक मनोरम दृश्य है।जो यहां आने वाले लोगो का मन मोह लेती है।

 भीलट देव  का जन्म परिचय

भीलट देव लोकदेवता है जो लोगो की मन्नतों को पूरा करते हैं उन्हे जीवन में सुरक्षा प्रदान करते है। भीलट देव को भगवान शिव का पुत्र माना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार 853 साल पहले मध्य प्रदेश के हरदा जिले में माचक नदी किनारे स्थित रोलगांव पाटन के एक गवली परिवार में बाबा भीलटदेव का जन्म हुआ था। उनके माता-पिता मेदाबाई नामदेव शिवजी के परम भक्त थे.। ऐसा बताया जाता है कि उन्हें कोई संतान नहीं थी, तो उन्होंने शिवजी की कठोर तपस्या की. उसके बाद बाबा का जन्म हुआ था।इसके बाद भगवान ‘शिव-पार्वती ने इनसे वचन लिया था कि वो रोज दूध-दही मांगने आएंगे. अगर नहीं पहचाना, तो बच्चे को उठा ले जाएंगे. एक दिन इनके मां-बाप भूल गए, तो शिव-पार्वती बाबा को उठा ले गए. बदले में पालने में शिवजी अपने गले का नाग रख गए। इसके बाद मां-बाप ने अपनी गलती मानी. इस पर शिव-पावर्ती ने कहा कि पालने में जो नाग छोड़ा है, उसे ही अपना बेटा समझें। इस तरह बाबा को लोग नागदेवता के रूप में पूजते हैं।

भीलटदेव की शिक्षा दीक्षा
बताया जाता हैं भगवान शंकर ही उनके गुरु और मार्गददर्शक रहे है।भीलटदेव को पचमढी में अध्यात्म और तंत्र का ज्ञान दिया गया। इसके बाद उन्हे और भैरवनाथ को बंगाल की ओर जाने का आदेश दिया गया। जहां पर गंगू तेलन सहित बडे़ तांत्रिक लोगो का सामना किया सभी को हराया। बंगाल के राजा गंधी की पुत्री से विवाह कर भगवान महादेव के समक्ष पहुंचे तो उन्होने शिखरधाम जाकर लोगो की मनोकामना पूर्ण करने का आदेश दिया। जिन स्थानो से होते हुये वो निकले वहीं अनेक स्थानों पर कई चमत्कार हुए और बाबा के महत्वपूर्ण मंदिर स्थापित किए गए।

सिवनी मालवा में लगता है मेला

होशंगबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील में प्रति वर्ष चैत्र सुदी चैदस के दिन भीलट देव दरबार में मेला भरता है। इस दिन बाबा के भक्त पड़िहार के शरीर में भीलट बाबा की पवन आती है। परिहार मंदिर के बाहर नीम के पेड से लिपटकर दोनो एक दूसरे से गले मिलते है। जिसे हजारों भक्त देखते है यह पेड उस समय अपने आप बिना ऑंधी तूफान के तेजी से हिलता है और परिहाड उस समय हजारों की संख्या में उपस्थित जनसैलाव भक्तों के समक्ष वर्ष भर की भविष्यवाणी करते है जो सच साबित होती है।,

भीलटदेव निमाड़ के लोकदेवता होती है घर घर पूजा

जिस प्रकार हम देखते कि हमारे गांव की सीमा और चौक चैराहो पर हनुमानजी के मंदिर मिलते है। वैसे ही निमाड़ में भीलटदेव के मंदिर बहुत मिलते है गांव की सीमा हो या चैपाल आपको भीलटदेव के ही मंदिर मिलगे।भीलटदेव की घर घर में बहुत पूजा होती हैं।

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