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अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने की आदी रही है कांग्रेसः रमन सिंह

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5 फुट 10 इंच लंबे और 85 किलो के रमन सिंह का व्यक्तित्व जितना भारी-भरकम है, राजनीतिक करियर भी उतना ही बड़ा। मूलरूप से कांग्रेस के कहे जाने वाले इलाके छत्तीसगढ़ में वह पिछले तीन कार्यकाल से भाजपा के मुख्यमंत्री हैं और चौथी बार के प्रबल दावेदार। इसी व्यस्तता के बीच अकु श्रीवास्तव ने उनसे खास बातचीत की।

प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश :
पहला चरण हो चुका है और जिस तरह 76 फीसदी से ज्यादा मतदाता निकले हैं, उसे आप किस तरह देखते हैं?
चुनाव के पहले चरण में जिस तरह से लोग निकल कर सामने आए, इससे साफ जाहिर होता है कि वे हमारी सरकार के काम से खुश हैं और उन्होंने जिस तरह से नक्सल प्रभावी क्षेत्रों में अपने मताधिकार का प्रयोग किया है, उससे साफ लगता है कि हम पहले चरण के नतीजों से सरकार बनाने की बढ़त की स्थिति में होंगे और उससे हम आगे आ गए हैं। छत्तीसगढ़ में सरकार का रास्ता बस्तर से निकलता है।

कहा तो यह जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाता के निकलने का मतलब यह भी है कि वह बदलाव चाहता है?
यह कहना गलत है कि मतदाता अगर सामने ज्यादा संख्या में आया है तो वह बदलाव चाहता है। मेरे हिसाब से जो मतदाता नक्सलियों और माओवादियों के डर से पीछे रहता था वह अब उनके खिलाफ वोट की चोट करने के लिए सामने आया है। आज आदिवासियों का जीवन स्तर काफी ऊपर उठा है, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जिस तरह से बड़े-बड़े काम हुए हैं, उनकी शायद पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी और कांग्रेस ने इस नए राज्य के गठन से ही इसकी उपेक्षा की है।

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15 साल की सत्ता के विरोध में माहौल तो होगा?
तीन टर्म के शासन के दौरान हमने जिस तरीके से बदलाव किए, कार्यों को जो विस्तार रूप दिया है वो बहुत बड़ा है। आपको कहीं भी मुख्यमंत्री या नीति के खिलाफ कोई बात नहीं देखने-सुनने को मिली होगी। जो भी सुनने को आ रहा होगा तो हो सकता है कि किसी विधायक के खिलाफ व्यक्तिगत हो, लेकिन हमने ऐसे  मामलों को भी सही समय पर सही तरीके से निपटाया है।

कांग्रेस का चुनावी अभियान तो बहुत ही आक्रामक है। वह तो कहती है कि ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे उन्होंने ठगा नहीं। वे खासकर नर्सों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं, दैनिक वेतन भोगी, चिकित्सा सहायक की लम्बी हड़तालों का जिक्र करते हैं?
यह ठीक है कि कांग्रेस का अभियान आक्रामक है और पहले भी रहा, लेकिन कांग्रेस तो अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारती रही है। वह यह कहती है कि ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे उन्होंने ठगा नहीं, बकवास है। हमने समाज के ज्यादातर वर्ग की मांगें मानी हैं। हमने 1 लाख 8 हजार कर्मचारियों को नियमित किया। मैं दावे से कह सकता हूं कि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को किसी और राज्य में शायद ही नियमित किया गया होगा। कुछ लोगों की समस्याएं रह गई होंगी वह भी समय पर दूर की जाएंगी। कांग्रेस संगठन में जो सिर फुटव्वल हो रही है, वह भी सबको पता है। उस तरह की बात पर टिप्पणी मैं नहीं कर सकता। हां, कांग्रेस हमारा काम आसान कर रही है।

राहुल गांधी बहुत हमलावर हैं। आपके जीवन पर व्यक्तिगत हमले भी कर रहे हैं?
राहुल गांधी जिस तरह से हमले कर रहे हैं। जिस तरह वह बातें कर रहे हैं, उस तरह निचले स्तर पर जाकर बातें करना किसी पार्टी के मुुखिया को शोभा नहीं देता। लेकिन, वह कर रहे हैं तो मैं क्या कर सकता हूं। उनकी किसी भी बात में कोई दम नहीं है। हमने जो काम किए हैं उस पर कहने के लिए उनके पास कुछ नहीं है।

कांग्रेस ने आपको घेरा भी है। अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला ने आपके खिलाफ प्रचार किया?
कांग्रेस तो मुझे घेरेगी, क्यों नहीं घेरेगी। राजनीति है तो वह घेरेगी ही। हां, जहां तक करुणा शुक्ला जी का सवाल है तो उनको चुनाव मैदान में उतार दिया। मैं इसमें क्या कह सकता हूं, अटल जी का सम्मान पूरा देश करता है इसलिए मैं व्यक्तिगत रूप से करुणा जी के खिलाफ कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन अटल जी और भारतीय जनता पार्टी एक-दूसरे के पूरक हैं इसलिए उनके नाम से कोई भी ऐसी चीज नहीं हो सकती जो मेरे खिलाफ या पार्टी के खिलाफ जाए।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहली बार त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ में पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी और मायावती का गठजोड़ क्या रंग दिखाएगा?
जहां तक छत्तीसगढ़ की राजनीति की बात है तो वह और राज्यों से अलग है। आमने-सामने दो पार्टियां होती रही हैं कांग्रेस और भाजपा। भाजपा ने पिछले 3 बार से उनको हराया है। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी का अपना प्रभाव है, एक वर्ग विशेष पर वह अलग प्रभाव रखते हैं। उसमें 4-5 प्रतिशत उनका वोट रहा है तो इसलिए उनको आप नकार नहीं सकते हैं, उनको आप कहीं से भी किनारे नहीं कर सकते हैं। मायावती जी के साथ आने पर थोड़ा उन्हें बहुत फायदा होगा, लेकिन मुझे लगता है कि इससे भारतीय जनता पार्टी की संभावनाएं किसी भी तरीके से कम नहीं होती हैं।

माओवादी समस्या सबसे बड़ी है छत्तीसगढ़ में। इससे निपटने के लिए एक तरफ प्रशंसा हुई तो सवाल भी उठते रहे हैं?
हमने माओवादियों की समस्या को कम किया है। हमने सही समय पर और सही तरीके से उनसे निपटकर समस्या का हल निकाला है। उनका विस्थापन किया है और माओवादियों की जो आंच रायपुर तक आने वाली थी वह अब बहुत पीछे हो गई है। अब उनसे लड़ाई अंतिम चरण में है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में यह समस्या जड़ से ही खत्म हो जाएगी।

आपसे बातचीत से पहले अमित जी (शाह) कह रहे थे कि पहले ही चरण में हमने जीत ले ली। 18 में से 14 सीटेें जीतने का दावा किया। उनके मिशन 65 यानी विधानसभा की कुल 90 सीटों में से 65 जीतने के लक्ष्य का क्या हो रहा है?
हमें पहले चरण में बढ़त मिली है, हम इस चरण में हमेशा से पीछे रहे हैं। हमें पिछली दफा 18 में से 6 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार मुझे उम्मीद है कि दोगुने से ज्यादा सीटें मिलेंगी। यही एक ऐसा चरण है जिससे हम लोग सरकार बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।

आपको केन्द्र के लिए आगे किया जा रहा है, क्या कहेंगे?
देखिए राजनीति में कौन कहां होगा यह तय करना मेरा काम नहीं है, यह पार्टी तय करेगी। अभी तो यह चुनाव मेरे नेतृत्व में लड़ा जा रहा है तो मैं मानता हूं कि केन्द्रीय नेतृत्व मुझ पर विश्वास कर रहा है और आगे भी उसका जैसा आदेश होगा वैसा किया जाएगा, जहां मुझे भेजा जाएगा वहां जाऊंगा।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का और पार्टी का रुख जिस तरह रहा है, उस पर आपका क्या कहना है? 
अयोध्या मामले में जो कुछ भी सुप्रीम कोर्ट कह रहा है, पार्टी का जिस तरीके का रुख है उसमें मेरा बहुत साफ मानना है कि हम लोग मिलजुल कर इसका हल निकालें तो ज्यादा बेहतर होगा। अगर जनता की भावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा तो ही अच्छा होगा। यह एक आध्यात्मिक मुद्दा है और छत्तीसगढ़ का हर व्यक्ति चाहता है कि मंदिर बने। अब कितने दिन में होगा, कैसे होगा, यह कानून का मामला है और अगर कोई बीच का रास्ता निकल आता है तो ज्यादा अच्छी बात होगी।

राफेल मुद्दे को उठाया जा रहा है। पैट्रोल-डीजल, महंगाई समेत अन्य राष्ट्रीय मुद्दे  भी उठाए जा रहे हैं?
दस में से दो आदमी भी राफेल मुद्दे के बारे मेें बात नहीं करते। छत्तीसगढ़ जिस तरह का राज्य है, उसमें स्थानीय मुद्दे काम करते हैं। मुझे तो नहीं लगता कि छत्तीसगढ़ में राफेल का मुद्दा कुछ कर पाएगा। दूसरी बात राफेल को लेकर जितना शोर मचाया जा रहा है, गलत तरीके से चीजें प्रचारित की गई और सरकार ने उसको जिस तरह से बताया, उससे लोग संतुष्ट हैं। महंगाई और डीजल की बात करें तो आप देखिए पैट्रोल-डीजल के दाम हमने सबसे कम किए हैं, वैट दर घटाई है।

आखिर क्या वजह है कि लोग फिर आपको वोट दें? पांच ऐसी कौन सी चीजें होंगी, जो आप बताना चाहेंगे?
आप मुझसे केवल पांच ही ऐसी वजहें क्यों पूछ रहे हैं। मैं ऐसी पचास बातें गिना सकता हूं। हमने जो विकास का काम छत्तीसगढ़ में किया है उसकी झलक शायद ही पूरे राष्ट्र में कहीं और देखने को मिले। इसे यूं कह सकते हैं कि जो राज्य सबसे पीछे था वह अब काफी आगे आ चुका है। सड़कें, बिजली, पुल या किसानों के हित की बात करें तो ये सब इतने बड़े काम हैं कि इनको उंगलियों पर गिनाना मुश्किल है। कर्मचारियों के लिए हमने बहुत सारा काम किया है। राज्य के विकास के अन्य क्षेत्र चाहे वो शिक्षा हो या चिकित्सा, हमने कोई कसर नहीं छोड़ी है। आप देखिए कि छत्तीसगढ़ में कौन सा ऐसा संस्थान है जो नहीं है, चाहे वो मेडिकल कॉलेज हो, एम्स हो या फिर प्रबंधन का संस्थान हो। इन सबसे यहां के बच्चे शिक्षा लेकर सुनहरे भविष्य का ताना-बाना बुन रहे हैं।

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