banner add
banner ad 11

ग्वालियर-चंबल की इन सीटों पर होगा राजवंशों का मुकाबला, कांग्रेस को हराना BJP के लिए चुनौती

Header Top

ग्वालियर: ग्वालियर-चंबल अंचल मध्यप्रदेश की राजनीतिक दशा और दिशा दोनों ही तय करता है। कभी यह कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था लेकिन अब भाजपा यहां पैठ बनाये हुये है। ग्वालियर-चंबल अंचल में कुल 8 जिले हैं। इनमें विधानसभा सीटों की संख्या 34 है।

विधानसभा चुनाव 2013…
बात करें 2013 विधानसभा चुनावों की तो बीजेपी ने 34 में से 20 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने 12 सीटों पर कब्जा जमाया था। 2 सीटें बीएसपी के खाते में गई थी।  2013 के विधानसभा चुनावों में मुरैना और दतिया 2 ऐसे जिले रहे जहां कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पाई थी।

वहीं अगर हम बात करें यहां के नेताओं की तो कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया दिग्विजय सिंह का यहां खासा प्रभाव है। बीजेपी में नरेंद्र सिंह तोमर का गढ़ भी ग्वालियर-चंबल को कहा जाता है। वे ग्वालियर लोकसभा सीट से सांसद है और केंद्र की मोदी सरकार में प्रभावशाली मंत्री भी हैं। वर्तमान में टिकट वितरण को लेकर दोनों ही दलों के कई नेता पार्टी से बगावत कर चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में दोनों ही दलों के जीत के समीकरण गड़बड़ा गए है।

Shreegrah

इस बार के चुनावों में खास बात यह है कि, कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ग्वालियर-चंबल अंचल से ही हैं। कांग्रेस की तरफ से ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीजेपी से नरेंद्र सिंह तोमर को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। सिंधिया का सीएम बनने का ग्वालियर-चंबल अंचल को फतह करने के बाद ही साकार होगा वहीं नरेंद्र सिंह के लिये भी यह परीक्षा की घड़ी है।

बीजेपी के नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर-चंबल अंचल में बड़ा चेहरा… 
ग्वालियर-चंबल अंचल में जो सबसे बड़े चेहरे हैं जिनकी साख दांव पर है। उनमें दतिया से जनसम्पर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा मुख्य हैं। जिनके सामने कांग्रेस से राजेंद्र भारती मैदान में हैं। ग्वालियर से जयभान पवैया इनके सामने कांग्रेस से प्रद्युम्न सिंह तोमर मैदान में हैं। शिवपुरी से यशोधरा राजे सिंधिया जिनके सामने कांग्रेस के सिद्धार्थ लड़ा चुनाव मैदान में हैं। ग्वालियर दक्षिण से मंत्री नारायण कुशवाहा के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी से बागी हुई पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता हैं। जिनके चुनाव मैदान में आने से जीत के समीकरण बदल गए हैं। वहीं लहार विधानसभा सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता गोविंद सिंह के सामने इस बार भी बीजेपी ने रसाल सिंह को मौका दिया गया है।

शिवपुरी की पिछोर विधानसभा…
शिवपुरी जिले की पिछोर सीट पर कांग्रेस के केपी सिंह के सामने भाजपा ने केंद्रीय मंत्री उमाभारती के रिश्तेदार प्रीतम सिंह लोधी को उतारा है। दोनों नेताओं की छवि बाहुबली की है। हम बात करें मुरैना जिले की तो यहां से मंत्री रुस्तम सिंह का राजनैतिक कैरियर दांव पर है। उनके सामने बीएसपी के बलवीर दंडोतिया चुनाव मैदान में हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस और भाजपा के कई दिग्गजों का राजनैतिक भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

क्या है इस बार सबसे बड़ा मुद्दा…
इस बार के विधानसभा चुनावों में सबसे  बड़ा मुद्दा एससी-एसटी एक्ट और बढ़ती महंगाई बेरोजगारी, बंद पड़ी मिलें, अवैध उत्खनन, स्वास्थ्य सुविधाएं हैं। लेकिन सबसे ज्यादा असर 2 अप्रैल को हुई हिंसा का है लिहाजा दलित वर्ग का गुस्सा भाजपा को झेलना पड़ रहा है। साथ ही ओबीसी और सवर्णों की नाराजगी भी बीजेपी को भारी पड़ सकती है।

ग्वालियर जिले का हाल…
अब बात करें ग्वालियर जिले की 6 विधानसभा सीटों की तो यहां 4 पर भाजपा 2 पर कांग्रेस का कब्जा है। ग्वालियर विधानसभा सीट को 2013 के चुनावों में बीजेपी ने कांग्रेस से छीनी है। जबकि ग्वालियर पूर्व सीट परम्परागत बीजेपी की मानी जाती है। .यहाँ वर्तमान में माया सिंह विधायक हैं हलांकि इस बार उनका टिकट काट दिया गया है। ग्वालियर-चंबल अंचल में कांग्रेस के 7 ऐसे गढ़ है जिनको फतह करना बीजेपी के लिए सपना बना हुआ है। 1990 की राम लहर, 2003 की उमा लहर, 2008 की शिवराज लहर और 2013 की मोदी-शिवराज लहर में इन किलों पर बीजेपी को शिकस्त मिली है। इन किलों पर चढ़ाई करने के लिए इस बार बीजेपी के शाह खुद सियासी बिछात बिछाएंगे। बीजेपी विधानसभा में इन गढ़ों को भेदने के बाद ही 2019 में कामयाबी का रास्ता बनाएगी।

किला नंबर 1- राघौगढ़, जिला गुना… 
राघौगढ़ का किला जीतना आज भी बीजेपी के लिए सपना बना हुआ है। बीजेपी यहां अब तक जीत का स्वाद नहीं चख पाई है। 1990 की राम लहर, 2003 की उमा लहर, 2008 की शिवराज लहर और 2013 की मोदी-शिवराज लहर के बावजूद राघौगढ़ के किले पर कांग्रेस का ही कब्जा बरकरार रहा है। 2003 में तो यहां तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान को करारी शिकस्त दी थी।

आइए एक नजर डालते है राघौगढ़ के चुनावी इतिहास पर…

  • 1990 – लक्ष्मण सिंह ने रणछोड़ दास को 15063 वोटों से हराया।
  • 1993 – लक्ष्मण सिंह ने रामप्रसाद शिवहरे को 16886 वोटों से शिकस्त दी।
  • 1998 – दिग्विजय सिंह ने चंचल जैन को 54161 वोटों से मात दी।
  • 2003 – दिग्विजय सिंह ने बीजेपी तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान को 21,164 वोटों से हराया।
  • 2008 – कांग्रेस के मूल सिंह ने बीजेपी के भूपेंद्र रघुवंशी को 7628 वोटों से हराया।
  • 2013 – जयवर्धन सिंह ने राधेश्याम धाकड़ को रिकॉर्ड तोड़ 58204 वोटों से हराया।

किला नंबर 2 पिछोर, जिला शिवपुरी…
कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर कांग्रेस के केपी सिंह बीते 25 सालों से अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 5 चुनाव में केपी सिंह ने लगातार जीत दर्ज की है। बीजेपी कड़ी मशक्कत के बाद भी इस सीट पर जीत का सपना संजोए हुए हैं, केपी सिंह ने इस सीट पर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही उमा भारती के भाई और समधी को भी हराया है। आंकड़ों पर गौर करें तो….

  • 1993 – कांग्रेस के के पी सिंह ने जनता दल के कमल सिंह को 16377 वोटों से हराया।
  • 1998 – के पी सिंह ने बीजेपी के भैया साहब को 17984 वोट से हराया।
  • 2003 – के के पी सिंह ने बीजेपी के स्वामी प्रसाद लोधी को 16125 वोटों से हराया।
  • 2008 – के पी सिंह ने भारतीय जनशक्ति पार्टी के भैया साहब को करीब 26835 वोट से शिकस्त दी, बीजेपी तीसरे नंबर पर रही।
  • 2013 – के पी सिंह ने बीजेपी के प्रीतम लोधी को 7113 वोटों से शिकस्त दी

किला नंबर 3- लहार, जिला भिंड…
भिंड जिले की लहार विधानसभा भी कांग्रेस का वो किला है, जिसे बीजेपी बीते 28 सालों से भेद नहीं पाई है, इस सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ. गोविंद सिंह अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं। गोविंद सिंह ने लहार सीट पर 1990 की राम लहर, 2003 की उमा लहर, 2008 की शिवराज लहर और 2013 की शिवराज- मोदी लहर के बावजूद कामयाबी दिलाई है।

आइए देखते है लहार सीट का इतिहास…

  • 1990 – गोविंद सिंह ने बीजेपी के मथुरा महंत को 14617 वोटों से मात दी।
  • 1993 – गोविंद सिंह ने बीजेपी के मथुरा महंत को फिर से 7822 वोटों से हराया।
  • 1998 – गोविंद सिंह ने बीजेपी के मथुरा प्रसाद को 6086 वोटों से शिकस्त दी।
  • 2003 – गोविंद सिंह ने बीएसपी के रामाशंकर सिंह को 4085 वोटों से हराया, बीजेपी तीसरे स्थान पर खिसक गई।
  • 2008 – गोविंद सिंह ने बीएसपी के रमेश महंत को 4878 वोटों से शिकस्त दी, इस बार भी बीजेपी तीसरे नंबर पर रही।
  • 2013 – गोविंद सिंह ने बीजेपी के रसाल सिंह को 6272 वोटों से हराया।

किला नंबर 3 विजयपुर विधानसभा… 
विजयपुर सीट भी कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती है। इस सीट पर कांग्रेस के रामनिवास रावत ने पिछले 6 में से 5 चुनाव में जीत दर्ज की है रामनिवास रावत ने भी यहां पर 1990 की राम लहर 2003 की उमा लहर 2008 की शिवराज लहर और 2013 की शिवराज मोदी लहर में भी कांग्रेस का तिरंगा लहराया है।

  • 1990 – कांग्रेस के रामनिवास रावत ने यहां बीजेपी के बाबूलाल को 3101 वोटों से हराया।
  • 1993 – रामनिवास रावत ने बीजेपी के दुर्गा लाल को 8190 वोटों से हराया।
  • 1998 – रामनिवास रावत बीजेपी के बाबूलाल से 6112 वोटों से हारे।
  • 2003 – रामनिवास रावत ने बीजेपी के बाबूलाल को 18709 वोटों से हराया।
  • 2008 – रामनिवास रावत ने बीजेपी के सीताराम आदिवासी को 3011 वोटों से हराया।
  • 2013 – रामनिवास रावत ने बीजेपी के सीताराम आदिवासी को फिर से 2149 वोटों से शिकस्त दी

भिंड जिले की अटेर विधानसभा का इतिहास… 
यह सीट भी कांग्रेस के परंपरागत खेलों में शुमार है। इस सीट पर पिछले 8 चुनाव में से 6 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। इस सीट को कटारे परिवार की परंपरागत सीट माना जाता है।

  • 1985 – सत्यदेव कटारे ने इस सीट पर रमाशंकर सिंह को 9250 वोटों से शिकस्त दी।
  • 1993 – कांग्रेस के सत्यदेव कटारे ने बीएसपी के लाल सिंह कुशवाहा को 3156 वोटों से हराया, बीजेपी तीसरे नंबर पर खिसक गई।
  • 1998 – सत्यदेव कटारे बीजेपी के मुन्ना सिंह से हारे।
  • 2003 – उमा लहर में सत्यदेव कटारे ने मुन्ना सिंह को 10784 वोटों से हराया।
  • 2008 – सत्यदेव कटारे बीजेपी के अरविंद सिंह से 1851 वोटों से हारे।
  • 2013 – सत्यदेव कटारे ने अरविंद सिंह को 11426 वोटों से शिकस्त दी।
  • 2017 – उपचुनाव में हेमंत कटारे ने बीजेपी के अरविंद सिंह को 700 वोटों से हराया

ग्वालियर जिले के भितरवार सीट…
अस्तित्व में आने के बाद से करीब एक दशक से बीजेपी के लिए जीतना सपना बनी हुई है। इस सीट पर कांग्रेस के लाखन सिंह यादव अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं। एक बीते एक दशक में शिवराज लहर और शिवराज मोदी लहर के बावजूद यहां पर बीजेपी भितरवार में कांग्रेस के लाखन सिंह यादव को शिकस्त नहीं दे पाई है।

  • 2008 – कांग्रेस के लाखन सिंह यादव ने बीजेपी के बृजेंद्र तिवारी को 10488 वोटों से हराया।
  • 2013 – कांग्रेस के लाखन सिंह ने एक बार फिर बीजेपी के अनूप मिश्रा को 6548 वोटों से शिकस्त दी।

ग्वालियर जिले की डबरा सीट…
यह सीट भी बीते एक दशक से कांग्रेस के कब्जे में है।

  • 2008 – कांग्रेस की इमरती देवी ने बीएसपी के हरगोविंद जोहरी को 10630 वोटों से हराया, बीजेपी तीसरे नंबर पर आई
  • 2008 – इमरती देवी ने बीजेपी के सुरेश राजे को 33278 वोटों से हराया, ये ग्वालियर जिले में सबसे बड़ी जीत थी।

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Don`t copy text!
ब्रेकिंग
विवादित बयान से संविधान का अपमान ? गेस्ट हाउस में चल रहा था देह व्यापार, आपत्तिजनक हालत में 3 जोड़े गिरफ्तार, संचालक फरार राजगढ़ जिले में दो दिवस में विकास यात्राओं में 710 लाख के विकास कार्यो का लोकार्पण एवं 641 लाख के विक... लोक सेवा गारंटी अंतर्गत सेवाओं को समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण नहीं करने पर चार अधिकारियों पर लग... संत रविदास जयंती के उपलक्ष में हुआ कार्यक्रम का भव्य आयोजन, सिराली के मुख्य मार्गो से निकली शोभायात्... मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी हरदा ने दस्तक अभियान का किया शुभारंभ harda : आत्माराम की खुशी का आज ठिकाना न था, विकास यात्रा में पक्के मकान में परिवार सहित किया गृह प्र... टिमरनी विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँची ‘‘विकास यात्रा’’ harda : रमेश का सपना हुआ साकार विकास यात्रा में मिली पक्के मकान की सौगात मुख्यमंत्री चौहान ने सिंगल क्लिक के माध्यम लाड़ली लक्ष्मियों के खाते मे छात्रवृत्ति की राशि ट्रांसफर ...