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राजा परीक्षित जन्म, शुकदेव आगमन की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता,

मकड़ाई समाचार हरदा।
कहार समाज द्वारा खेड़ीपुरा में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित विद्याधर उपाध्याय जी ने परीक्षित जन्म, सुखदेव आगमन की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने से क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। ब्रह्मास्त्र से लगने से अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित जब बड़े हुए नाती पोतों से भरा पूरा परिवार था। सुख वैभव से समृद्ध राज्य था। वह जब 60 वर्ष के थे। एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए। अपने पिता के गले में मृत सर्प को देख मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने भी मेरे पिता के गले में मृत सर्प डाला है। उसकी मृत्यु सात दिनों के अंदर सांप के डसने से हो जाएगी। ऐसा ज्ञात होने पर राजा परीक्षित ने विद्वानों को अपने दरबार में बुलाया और उनसे राय मांगी। उस समय विद्वानों ने उन्हें सुखदेव का नाम सुझाया और इस प्रकार सुखदेव का आगमन हुआ।
कथा व्यास श्री उपाध्याय जी ने बताया की
भागवत कथा भगवान कृष्ण का दूसरा रूप है। इसे सुनने से मनुष्य को पापों से मुक्ति व सर्व सुखों की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि बिनु परतीती होई नहीं प्रीति अर्थात माहात्म्य ज्ञान के बिना प्रेम चिरंजीव नहीं होता, अस्थायी हो जाता है। उन्होंने कहा कि आत्मसात कर लेें तो जीवन से सारी उलझने समाप्त हो जाएगी। कथा के दूसरे दिन कुन्ती स्तुति को विस्तारपूर्वक समझाते हुए परीक्षित जन्म एंव शुकदेव आगमन की कथा सुनाई।
समाज के राजू हरणे ने बताया कि कहार समाज द्वारा मकर सक्रंति के अवसर पर श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आरंभ हुआ है जो 20 जनवरी तक चलेगा। जिसमे रोजाना संगीतमय कथा का लाभ धर्मप्रेमी जनता को मिल रहा है।
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