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एक दिन पहले शिकायत पर कार्रवाई का पत्र फिर अगले दिन कार्रवाई न करने का पत्र ! सीएमओ साहब पुलिस से कर रहे मज़ाक ! इधर पार्षद का कहना जब फाइल ले ही न गया तो वापिस कब और कैसे करूंगा ! एक ही व्यक्ति दो दिन में लिख रहा आपत्ति और अनुशंसा पत्र ! सीएमओ झूठ बोल रहे या पार्षद ! 

हरदा। खिरकिया नगर परिषद कार्यालय सरकारी भवन नहीं एक सराय है। जिसमें जब मन हो ठहर जाओ, जब मन हो निकल जाओ। न कुछ कहना, न कुछ सुनना। क्योंकि बोलने, देखने वाला कोई है ही नहीं।

जिले में शिकायत पत्र लिखने के बाद अनुशंसा पत्र लिखने का चलन बढ़ रहा है। पहले जनप्रतिनिधि ने लिखा अब सरकारी मुलाजिम ने कलम फंसाई।

उपर्युक्त बातें हम नहीं कह रहे। सरकारी फाइलें और चिट्ठियां बता रही हैं।

एक रोचक मामला खिरकिया में देखने को मिला है।

हुआ यूं कि सीएमओ खिरकिया ने एक शिकायती पत्र 26 अगस्त को थाना छीपाबड़ को देकर पार्षद पर कार्यालय से महत्वपूर्ण फाइलें ले जाने (चोरी करने ) की बात लिखकर कार्रवाई की मांग की। अगले दिन पत्र लिखकर कहा कि उक्त फाइलें पार्षद द्वारा भिजवा दी गई (26की देर रात की बात ) हैं। इसलिए कार्रवाई न करें।

 

इधर पार्षद नितिन गुप्ता ने मीडिया को बताया कि मैने फाइलों का कार्यालय में अवलोकन किया था, देखने के बाद जहां से ली थी वापिस रख दीं । उन्होंने फाइल घर ले जाने से साफ इनकार किया ।

 

सवाल उठता है कि जब वे कोई फाइल घर ले ही न गए तो उसे देर रात वापिस क्यों और कैसे करेंगे।

सवाल ये भी है कि कार्यालय में अति महत्वपूर्ण फाइल ( छीपाबड़ तालाब गहरीकरण और पार्क विकास कार्य ) के अवलोकन करने के दौरान संबंधित विभाग का कोई व्यक्ति मौजूद न था। इसलिए पार्षद मौका देखकर फाइल उठा ले गए।

 

छीपाबड़ थाना में 26अगस्त को तत्काल देर रात्रि पत्र लिखकर सूचना देने के बजाय सीएमओ द्वारा अगले दिन फाइल वापस आने संबंधी क्लीन चिट पत्र 27को थाना में दिया जाता है। इसमें क्या रहस्य है। सीएमओ जानें।

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अब नितिन गुप्ता ये फाइलें (जो वे नहीं ले गए, देखें वीडियो बयान ) 26अगस्त की देर रात कार्यालय में खुद वापिस देते हैं या किसी अन्य के द्वारा उन्होंने भिजवाई । ये फाइलें किसने सुपुर्दगी में ली। देर रात फाइलें झेलने के लिए कार्यालय में कौन मौजूद था। ये अहम सवाल हैं। ये भी जांच का विषय है।

वैसे 27 अगस्त के पत्र में सीएमओ लिखते हैं कि पार्षद द्वारा फाइलें भिजवा दी गई हैं।  

 

अगर सीसीटीवी हों तो फुटेज सभी जगह के देखे जा सकते हैं। 

 

यदि नितिन गुप्ता फाइल घर ले ही न गए हैं तो वापिस करने का तो सवाल ही न उठता है। ऐसे में सीएमओ के पत्र और शिकायतें संदिग्ध लगती हैं। यदि सीएमओ की शिकायतें सही हैं तो वे पार्षद के बचाव में क्यों लगे हैं। उन्हें कार्रवाई में सहयोग कर सबूत देने चाहिए।

 

जनचर्चा है कि इस मामले में आखिर कौन झूठ बोल रहा है। सीएमओ या पार्षद। जिला प्रशासन को मामले की जांच करवाना चाहिए इसमें सरकारी कार्यालय और उनके कामकाज के तरीके पर सवाल उठते हैं। 

 

इस मामले में यदि पार्षद नितिन गुप्ता दोषी हैं तो इनपर कार्रवाई होना चाहिए। और अगर सीएमओ खिरकिया महेंद्र शर्मा झूठे पत्र लिख कर पुलिस को दे रहे हैं तो इनपर कार्रवाई होना चाहिए।

 

अन्यथा शिकायत करने और अनुशंसा करने की, सरकारी फाइलें उठाकर घर ले जाने, वापिस भिजवाने की जिले में परंपरा बन जाएगी।

 इनका कहना है।

नपा सीएमओ ने शिकायत की थी दूसरे दिन फाइल मिल जाने का पत्र दिया गया। इस मामले में अब हम क्या कार्यवाही करे। पार्षद की छबि धूमिल हुई हो तो वो मानहानि का केस करे।  पार्षद के द्वारा अगर सीएमओ की शिकायत आयेगी तो जांच कर कार्यवाही करेंगे।

रामकुमार झरिया टी आई

 छिपाबड़ थाना जिला हरदा