बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार: मध्य प्रदेश के 30 जिलों में फसलों को भारी नुकसान
ग्वालियर में 2.5 इंच बारिश; 8 जिलों में गिरे ओले, स्कूलों में छुट्टी घोषित
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम ने अचानक करवट ली है। दो शक्तिशाली मौसम प्रणालियों (Systems) के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि हुई है। इस प्राकृतिक आपदा ने सबसे ज्यादा प्रहार खेती-किसानी पर किया है, जिससे गेहूं, चना और सरसों की खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
कहां कितनी हुई तबाही ?
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई है। मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं:
ग्वालियर-चंबल संभाग
ग्वालियर में सबसे ज्यादा 2.5 इंच बारिश दर्ज की गई। यहां भारी ओलावृष्टि के कारण फसलों को 40% से 60% तक नुकसान की आशंका है। खराब मौसम के चलते प्रशासन ने आज 8वीं तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है।
मालवा-निमाड़
इंदौर और उज्जैन में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने फसलों को बिछा दिया है।
महाकौशल और भोपाल जबलपुर और राजधानी भोपाल में रात भर रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहा, जिससे खेतों में पानी भर गया है।
फसलों पर संकट: गेहूं, चना और सरसों पर सबसे ज्यादा असर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय रबी की फसलों के पकने और तैयार होने का है। ऐसे में ओलावृष्टि “आसमानी बिजली” बनकर गिरी है:
1. गेहूं तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल खेतों में ही बिछ गई है (Lodging), जिससे दाना काला पड़ने या सिकुड़ने का डर है।
2. सरसों ओलों की मार से सरसों की फलियां टूट कर गिर गई हैं। ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में सरसों को सबसे अधिक नुकसान पहुँचा है।
3. चना ओलावृष्टि से चने के फूल और फलियां झड़ गई हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
दो सिस्टम सक्रिय, अभी राहत के आसार कम
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, वर्तमान में **दो वेदर सिस्टम** एक साथ सक्रिय हैं। एक चक्रवातीय परिसंचरण और अरब सागर से आ रही नमी के कारण यह स्थिति बनी है। बुधवार सुबह भी प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता (Visibility) कम रही और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। हालांकि रात के तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है।
प्रशासनिक मुस्तैदी
मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का तत्काल सर्वे (गिरदावरी) शुरू किया जाए ताकि पीड़ित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।

