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छत्तीसगढ़ पंचायत घोटाला 2026: सोशल ऑडिट में ₹151 करोड़ के फर्जी भुगतान का पर्दाफाश, मंत्री की सख्त चेतावनी

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 रायपुर । छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने में बड़ी सेंधमारी का मामला सामने आया है। वर्ष 2025-26 की नवीनतम सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपयों का बंदरबांट किया गया है।

ऑडिट रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े

सोशल ऑडिट टीम ने प्रदेश की कुल 11,717 पंचायतों में से 11,302 का गहन निरीक्षण किया। इस जांच में जो आंकड़े निकलकर आए हैं, वे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं:

फर्जी भुगतान- करीब 4,468 मामलों में ₹151.07 करोड़ का भुगतान बिना किसी ठोस आधार या नियमों के कर दिया गया।

सीधा गबन- 6,331 मामलों में ₹19.66 करोड़ की राशि का सीधे तौर पर गबन पाया गया है।

प्रक्रियात्मक उल्लंघन- टेंडर नियमों की अनदेखी और रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही के 13,861 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनसे जुड़ी राशि ₹20.49 करोड़ है।

बिलासपुर और कोरबा भ्रष्टाचार के ‘हॉटस्पॉट’

जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिलासपुर जिला वित्तीय अनियमितताओं में सबसे आगे रहा है, जहाँ ₹14.33 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी गई है। वहीं, सरकारी राशि के सीधे दुरुपयोग यानी गबन के मामलों में कोरबा जिला शीर्ष पर है, जहाँ 611 मामलों के जरिए ₹2.42 करोड़ की हेराफेरी की गई। जांजगीर-चांपा में भी ₹3.85 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है।

जनता का फूटा गुस्सा

प्रदेश मे राजनांदगांव शिकायतों में अव्वल पंचायतों में हो रही इस लूट के खिलाफ अब ग्रामीण भी लामबंद होने लगे हैं। प्रदेश भर से कुल 1,863 आधिकारिक शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इस मामले में सर्वाधिक शिकायतें- राजनांदगांव से 225 शिकायतें मिली है।

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प्रशासनिक लापरवाही- बालोदा बाजार जिला प्रक्रियात्मक उल्लंघन (989 मामले) में सबसे खराब स्थिति में है।

न्यूनतम शिकायतें- कोरिया (4), बेमेतरा (5) और जशपुर (6) जैसे जिलों में जागरूकता या गड़बड़ी कम दर्ज की गई है।

विश्लेषण सोशल ऑडिट 2025-26

गड़बड़ी की श्रेणी कुल मामले फंसी हुई राशि (करोड़ ₹)

फर्जी भुगतान- 4,468151.07

टेंडर व रिकॉर्ड उल्लंघन- 13,86120.49

सीधा वित्तीय गबन- 6,33119.66

डिप्टी सीएम की दो टूक: “दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई”

इस बड़े घोटाले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार सोशल ऑडिट की प्रक्रिया को जानबूझकर बेहद सख्त बनाया गया है ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके।

मंत्री शर्मा ने चेतावनी दी कि पंचायतों में “हल्का काम” या कागजी खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन भी अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता पाई जाएगी, उनके खिलाफ रिकवरी के साथ-साथ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।