प्रदेश संवाददाता
भोपाल/ हरदा । मप्र शासन के कृषि सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य केदार सिरोही ने मुख्यमंत्री , मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर दमोह कलेक्टर के भ्रामक व अवैज्ञानिक बयान को लेकर कार्रवाई व स्पष्टीकरण की मांग की है।
सिरोही ने बताया कि दमोह जिले के कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने किसानों से डीएपी उर्वरक का प्रयोग न करने की गैर जिम्मेदाराना सलाह दी है। कलेक्टर दमोह ने डीएपी के प्रयोग से भूमि के बंजर होने के साथ ही इसे मुद्रा का अपव्यय बताया।
केदार सिरोही ने सोशल मीडिया पर तथ्यात्मक बिंदुओं के साथ जवाबी पत्र को सार्वजनिक करते हुए किसान विरोधी बयानों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
◆ क्या लिखा है पत्र में –
प्रति,
माननीय मुख्यमंत्री/मुख्यसचिव महोदय
मध्य प्रदेश शासन,
भोपाल।
विषय: DAP उर्वरक को लेकर दमोह कलेक्टर के भ्रामक व गैर-वैज्ञानिक बयान पर कार्यवाही एवं स्पष्टीकरण हेतु निवेदन
महोदय,
जैसा की आपको विदित हैं की कृषि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का आधार स्तम्भ हैं इसलिए कृषि की उत्पादकता बनाएं रखना राज्य की प्रथम जिम्मेदारी हैं, किन्तु हाल ही में दमोह जिले के कलेक्टर श्री सुधीर कुमार कोचर द्वारा किसानों से DAP उर्वरक का प्रयोग न करने की गैर जिम्मेदाराना सलाह दी गई और यह भी कहा गया कि इससे भूमि बंजर होती है तथा यह मुद्रा का अपव्यय है। यह बयान न केवल वैज्ञानिक तथ्यों के विरुद्ध हैबल्कि किसानों में भ्रम फैलाने एवं सरकार की योग्यता पर प्रश्न खड़े करने वाला भी है।
श्री सुधीर कुमार द्वारा दिए गए सार्वजनिक वक्तव्य पर हम आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं:जो की निम्न हैं
1. वैज्ञानिक आधार पर DAP पूरी तरह सुरक्षित है:
DAP, NPK और TSP सभी फॉस्फेट आधारित उर्वरक हैं, जिनमें रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड होता है। DAP का भूमि को बंजर बनाने से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। यह देश की फॉस्फोरस की कमी वाली मिट्टियों के लिए आवश्यक है।अतः यह कहना की DAP से जमीन बंजर और NPK/TSP से उत्पादन बढ़ेगा, यह ठीक नही हैं
2. मुद्रा की चिंता तर्कहीन है:
चीन से भारत का कुल आयात $110 बिलियन से अधिक है, जिसमें DAP का हिस्सा लगभग 1. 1% के लगभग है।और DAP देश के 145 करोड़ लोगो को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने का आधार हैं, अतः इसे रोकने की बजाय देश को सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल्स जैसे बड़े आयातों को रोकने और लोगो को उपयोग ना करने के लिए जागरूक करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि किसानों की मूल जरूरत को पूरा करने की जगह गुमराह करना।
3. किसानों के आत्मसम्मान को ठेस:
कलेक्टर महोदय ने यह कहना कि “किसान देश का माल नहीं लेते, DAP मत मांगो”, सीधा किसानों की नीयत पर सवाल उठाना है और DAP की मांग को देश विरोधी के समक्ष बताना,यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण, असंवेदनशील और अनुचित है।
4. यदि आयात का विरोध करना है तो उदाहरण खुद श्री सुधीर दें:
1 क्या कलेक्टर महोदय साइकिल से चलते हैं?क्योंकि तेल आयात होता।
2 क्या वह कार्यालय में केवल स्वदेशी वस्तुएं इस्तेमाल करते हैं?क्योंकि विदेशी आयत से देश की पूजी खर्च होती।
3 क्या श्री सुधीर, सरकार द्वारा उनके ऊपर किए जा रहे खर्चो को रोकेंगे?क्योंकि देश को पूँजी की जरुरत हैं
यदि नहीं, तो किसानों को उपदेश देना नैतिक रूप से गलत है।स्वयं की अयोग्यता और प्रबंधन की कमी को छिपाने के लिए भावनात्मक खेल बंद करें और जिम्मेदारी पूर्वक जिले की व्यवस्था के लिए सुधारे यदि सुधार की गुंजाईश ना हो तो देश हित और किसान हित मे किसी योग्य व्यक्ति के लिए कुर्सी खाली करें।
हमारा आपसे आग्रह है कि:
1. कलेक्टर महोदय को निर्देशित किया जाए कि वे वैज्ञानिक सलाह लेकर ही इस प्रकार के बयान दें।
2. सभी कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि उर्वरकों को लेकर तथ्यहीन व अप्रमाणित बयान न दें।
3. किसानों को DAP की पर्याप्त आपूर्ति सरकार सुनिश्चित करे।
4. सोशल मीडिया युग में किसी भी प्रशासनिक वक्तव्य से पहले विशेषज्ञों से सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
5. DAP पर शोध को बढ़ावा मिले लेकिन भ्रम नहीं।
DAP देश के किसानों की आवश्यकता है, विलासिता नहीं। इसके खिलाफ बयानबाज़ी करके किसानों को देशविरोधी बताना शर्मनाक है। सरकार से अपेक्षा है कि वह किसानों की वैज्ञानिक जरूरतों का सम्मान करे और प्रशासन को भी वही करने को निर्देशित करे।
आपके सकारात्मक हस्तक्षेप की अपेक्षा के साथ।
श्री सुधीर कुमार का वक्तव्य संलग्न हैं ।
सादर,
केदार सिरोही
पूर्व सदस्य, कृषि सलाहकार परिषद, मध्य प्रदेश शासन
मोबाइल नंबर 9669800050

