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Harda: रहटगांव में एक भू माफिया ने छीन लिया गरीब परिवारो से उनका आशियाना, वन विभाग की भूमि पर 5 गरीब परिवारों का 50 साल पुराना कब्जा, इधर एसडीएम मीडियाकर्मियों को बोले डेढ़ वर्ष पुराना अतिक्रमण था!

प्रशासन राजस्व की भूमि को गरीब परिवारों से मुक्त कराकर खेत मालिक को क्यों सौंप रहा, उस भूमि का उपयोग पौधारोपण के लिए किया जाए, ताकि पर्यावरण को बढ़ावा मिल सके। नही तो ये माना जायेगा। की ये भूमि किसी भू माफिया को दी जा रही। ये सवाल आमजन में है। और ये जांच का विषय भी है। क्या प्रशासन उस भूमि का उपयोग जनहित में कर रहा या फिर व्यक्ति विशेष को उसका लाभ दिलवा रहा है।

हरदा। रहटगांव क्षेत्र में एक खेत मालिक गजेंद्र लोकरे ने प्रशासन के अधिकारियों को लाखो रुपए घूस देकर गरीब परिवारों को बेघर कर दिया ये आरोप उन गरीब परिवारों के सदस्यों ने लगाए। जिनको आठ दिन पहले टिमरनी रहटगांव प्रशासन ने अतिक्रमण का हवाला देते हुए हटा दिया। गरीब परिवारों ने तो ये तक कहा की करोड़पति सेठ पहले धर्म का चोला ओढ़कर पहले क्षेत्र में खूब धार्मिक कार्यक्रम करवाता था। प्रतिवर्ष किसी न किसी कथा वाचक को बुलवाकर धर्म और ज्ञान की गंगा बहाने की बात करता था। लेकिन आज समझ में आया धर्म के नाम भी ये लोग दिखावा करते है। धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करवाकर स्वार्थ से दूर रहने का संदेश देने वाले कितने स्वार्थी होगे। की उन्होंने उन गरीबों को बारिश में बेघर कर दिया।क्योंकि सेठ को अब वहा कॉलोनी काटना है। बीस बीस लाख रुपए कीमत में एक दुकान बेचना है। बड़ा सवाल तो इस बात का है। की रहटगांव तहसील में कई ऐसे गरीब किसानो के केस लंबित है। जिन गरीब किसानो के खेतो के सामने अतिक्रमण आज तक नही हटाया गया। फिर इस मामले में प्रशासन ने ऐसी दिलचस्पी क्यों दिखाई। की बारिश में गरीबों के आशियाने तोड़े गए।

बेटे की मौत की तेरहवीं के चार दिन बाद अब प्रशासन ने थमाया नोटिस।

जिस घर में जवान बेटे की अभी बीस दिन पहले हुई मृत्य। उस मृतक बेटे के बुजुर्ग माता पिता पत्नी और बच्चों के घर दो दिन बाद चलने वाला है। बुलडोजर ।क्या अब प्रशासन में इंसानियत मानवता भी नहीं बची की जिस घर में जवान बेटे की मौत का गम है। उन बुजुर्ग माता पिता को भी मकान तोड़ने का नोटिस दिया गया। सदमे में माता पिता दोनो बीमार है। मकड़ाई एक्सप्रेस ने उनसे बात की तो दोनो के आंखों से आशु झलक आए बोले जवान बेटा चला गया। हमारी बहु तीन बच्चो और हमारा भरण पोषण कैसे करेगी। ऊपर से प्रशासन के अधिकारी घर तोड़ने की बात कर रहे है। हम जाए तो अब कहा जाए। दोनो बुजुर्ग दंपति बोले इससे अच्छा तो सरकार हमे जहर दे दे।

पूर्व में पाच परिवारों के अतिक्रमण हटाने के बाद किसी भी प्रकार की कोई आर्थिक मदद प्रशासन के द्वारा पीड़ित परिवारों को नही दी गई।

तो क्या पूर्व सीएम शिवराज का ये भाषण झूठा था,जो मंचो से कई बार अधिकारियों से कहा गया??

मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कई बार सार्वजनिक मंचो से कहा है। जो भी भूमिहीन परिवार तीस वर्षों से एक ही स्थान पर निवास करते आ रहे है। उन गरीब परिवारों को भाजपा सरकार के द्वारा सरकारी पट्टे दिए जायेगे। भूमाफियाओं को बक्शा नही जायेगा। गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को दस फीट जमीन में गाड़ दिया जायेगा। किसी भी गरीब भाई बहन को जमीन से बेदखल नही होने देगे ।उसको उस जगह का मालिकाना हक दिया जाएगा। उस जमीन से उसे बेघर नही होने दिया जायेगा। ये भाषण बाजी सिर्फ चुनावी जुमला साबित हुई।

पूर्व सीएम ने कई बार मंचो से कहा है। 

वर्तमान में मामा शिवराज सिंह चौहान आप केंद्र में मंत्री है। और मध्यप्रदेश में भी मोहन यादव की सरकार है। फिर गरीबों को अतिक्रमण के नाम पर क्यों हटाया जा रहा है ।

अब ऐसे में आमजन में जन चर्चा है की मामा जी के अभी तक के भाषण सिर्फ हवा हवाई थे।

क्योंकि मध्यप्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी विकासखंड में अभी दो मामले सामने आए। टिमरनी नगर परिषद में वर्षो से एक कच्चे मकान में रह रही बुजुर्ग महिला को बेघर कर दिया गया। उक्त महिला के पास उस जगह का पुराना पट्टा भी था। पीड़ित महिला के कच्चे मकान पर एसडीएम ने बुलडोजर चलवा दिया।वही दूसरा मामला रहटगांव में कुछ ऐसा ही हुआ।

रहटगांव में पिछले पंचास वर्षो से गरीब परिवार फारेस्ट की भूमि पर निवास करते आ रहे थे। उनको बारिश में बेघर कर दिया। उनके आशियाने पर बुलडोजर चला दिया गया।

आज सभी पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। इधर सूत्रों की माने तो व्यक्ति विशेष व्यक्ति को लाभ दिलाने के उद्देश्य से इस भूमि का मद परिवर्तित वर्ष 2021 22 में किया गया है।

बड़ी बात तो ये है। की वन विभाग ने उन्हें नही हटाया। और नही ग्राम पंचायत को कोई दिक्कत थी। स्थानीय ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत ने तो उनको सरकारी पट्टा दिलवाने की अपने लेटर पेठ के माध्यम से विधायक और प्रभारी मंत्री पूर्व मुख्यमंत्री की मांग कर चुके गरीब परिवार जिनको बेघर किया गया। लेकिन दुर्भाग्य कहे की एक दबंग भू माफिया जो दो सो एकड़ का आसानी है। उसके कहने पर राजनीति दबाव में उन गरीबों को बेघर कर दिया गया।

चर्चा तो इस बात की है की उक्त खेत मालिक गरीबों मकान के पीछे दुकानें और प्लाट काट रहा है। अभी हाल ही में एक एक दुकान बीस लाख कीमत में बेची है। पीड़ितों का आरोप है की अगर हमारा मकान तोड़ा गया। तो ये को खेत मालिक पीछे है। इसकी दुकानें भी आंधी वन विभाग की भूमि में आ रही फिर प्रशासन ने उनका पक्का अतिक्रमण क्यों नही हटाया।

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फारेस्ट और ग्राम पंचायत ने हटाने आज तक कोई नोटिस नही दिया,,,

बड़ा सवाल तो इस बात का है। की वो भूमि फारेस्ट विभाग की है। उस भूमि से बेदखल करने के लिए फारेस्ट के किसी भी अधिकारी ने उनको आज तक नोटिस नही दिया। और नही ग्राम पंचायत ने। पीड़ित परिवारों के पास वो समस्त दस्तावेज मौजूद है। जिसमे उन्होंने अभी तक शासन प्रशासन और सरकार के जन प्रतिनिधियों तक भेजे है।

आखिर इन गरीबों को  बारिश के चार माह बाद भी तोड़ा जा सकता था। ऐसी क्या मजबूरी थी। प्रशासन की।

लेकिन पीड़ितों को एक और जिला कलेक्टर महोदय चार माह का समय देते है। दूसरी ओर उनके अधीनस्थ अनुविभागीय अधिकारी नोटिस जारी करने के दूसरे दिन ही पूरा राजस्व पुलिस अमला लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंच जाते है।प्रशासन की इस कार्यवाही की जनचर्चा शहर में है।

 

इनका कहना है।

प्रशासन ने एक किसान के कहने पर हमको बेघर कर दिया। उस किसान से पूर्व में वन विभाग ने जमीन खरीदी थी। राजस्व विभाग ने अतिक्रमण हटाकर फारेस्ट को भूमि नही दी। किसान को कब्जा दिलाया। पीड़ितों का आरोप है की अभी भी कई लोगो के कब्जे है। सिर्फ हमारे परिवार को बारिश में बेघर किया।प्रशासन ने जमीन का टुकड़ा दिया वो भी नाले में। अब हम हमारे बच्चो को लेकर कहा जाए। आठ दिन बीत जाने के बाद कोई मदद नहीं मिली।

पीड़ित परिवार के लोग।

डेढ़ वर्ष पुराना कब्जा हमने हटवाया है। आगे भी अन्य लोगो को नोटिस दिया है। उनका कब्जा भी हटवाया जायेगा। जनसहयोग से उनकी मदद करेगे।

महेश बड़ोले एसडीएम टिमरनी

फारेस्ट ने हमारे से पूर्व में जमीन खरीदी थी। फारेस्ट की सड़क बनने के बाद जो जमीन हमारे खेत के सामने खाली थी। उस पर इन लोगो का अतिक्रमण था। हमने कानून से लड़ाई लड़ी प्रशासन ने कब्जा हटवाया।इन लोगो ने हमारे खेत में जाने का रास्ता भी बंद कर दिया था।

 गजेंद्र लोकरे खेत मालिक

हमारी वहा अब कोई जमीन नहीं है। वो राजस्व विभाग की है।

श्री नाग

रेंजर वन परिक्षेत्र अधिकारी रहटगांव

 

इस खबर से सबंधित और पचास साल पुराने सभी रिकार्ड दस्तावेज मकड़ाई एक्सप्रेस के पास मौजूद है। जो की न्यायालय में जरूरत पड़ने पर काम आयेगे। 

 

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