मकड़ाई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली/मंगलुरु। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध के कारण जहाँ पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया है, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईंधन की किल्लत की आशंकाओं के बीच, विदेशी जहाजों के जरिए हजारों टन एलपीजी (LPG) भारत पहुँचनी शुरू हो गई है। रविवार को ‘पाइक्सिस पायनियर’ जहाज के आगमन के साथ ही देश में गैस की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जग गई है।
पाइक्सिस पायनियर का आगमन और पहली खेप
आपूर्ति शृंखला में सुधार की शुरुआत रविवार, 22 मार्च को हुई, जब पाइक्सिस पायनियर नामक जहाज न्यू मंगलुरु बंदरगाह पर पहुँचा। सिंगापुर के झंडे वाला यह विशालकाय जहाज पोर्ट ऑफ नीदरलैंड से 14 फरवरी को अपनी यात्रा पर निकला था। यह अपने साथ लगभग 16,714 टन एलपीजी लेकर आया है। एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के लिए यह गैस उतारी जा रही है, जिसके बाद सोमवार सुबह यह जहाज अपनी अगली यात्रा पर रवाना हो जाएगा।
अगले हफ्ते तक पहुँचेगी 72,700 टन गैस
न्यू मंगलुरु पोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, केवल एक जहाज ही नहीं, बल्कि अगले कुछ दिनों में कुल 72,700 टन एलपीजी भारत पहुँचने वाली है। हालांकि, पहले ‘शिवालिक’ नामक टैंकर को 18 मार्च को आना था, लेकिन उसने अपना माल गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर ही अपोलो ओसिएन नामक जहाज को ट्रांसफर कर दिया। अब वियतनाम के झंडे वाला यही ‘अपोलो ओसिएन’ जहाज 25 मार्च को मंगलुरु पहुँचेगा, जो करीब 26,687 टन गैस लेकर आएगा। यह स्टॉक इंडियन ऑयल (IOCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के लिए होगा।
अमेरिका से भी आ रही है मदद की खेप
घरेलू रसोई गैस की मांग को पूरा करने के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) भी सक्रिय है। जानकारी के मुताबिक, 29 मार्च को अमेरिका से एक और टैंकर लगभग 30,000 टन एलपीजी लेकर मंगलुरु तट पर पहुँचेगा। मंगलुरु स्थित HPCL का प्लांट इस गैस को प्रोसेस कर स्थानीय बॉटलिंग यूनिट्स और पाइपलाइन के जरिए बेंगलुरु समेत दक्षिण भारत के अन्य प्रमुख शहरों में सप्लाई करेगा।
युद्ध के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश
मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक तेल और गैस बाजार को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में भारत द्वारा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मार्गों (नीदरलैंड, वियतनाम और अमेरिका) से गैस का आयात करना एक रणनीतिक जीत मानी जा रही है। जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में एलपीजी आने से देश के भीतर गैस की किल्लत दूर होगी और कीमतों पर भी नियंत्रण बना रहेगा।

