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खंडवा : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष, पानी में तैरते हुए योग, इस शख्स की कला देखकर हो जाएंगे हैरान

अजब-गजब , पानी पर योग मुद्राएं देख चौंक जाते हैं लोग, गणगौर घाट रोज सुबह बच्चे युवा बुजुर्ग करते हैं पानी पर योग…

खंडवा : लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ऐसा ही कुछ करके दिखाया है खंडवा शहर के गणगौर घाट पर लहरों के राजा तैराकी संघ द्वारा रोजाना तैराकी के साथ, पानी पर योग की क्रियाएं भी युवाओं को सिखाई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर लोग योग ही नहीं जल योग करते हुए भी नजर आ रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं लहरों के राजा ग्रुप द्वारा छोटे-छोटे बच्चों को एक और तैराकी सिखाई जा रही है सुबह 6:00 बजे से ही शहर के गणगोर घाट पर छोटे-छोटे बच्चों के साथ, युवा बुजुर्ग महिलाएं तैराकी सीख रही है, तैराकी कोच राजकुमार सिसोदिया ने बताया कि कई वर्षों से गणगोर घाट पर तैराकी की सिखाई जा रही है, पूर्व में नागचुन तालाब पर और गणगौर घाट आमना नदी पर लहरों के राजा ग्रुप द्वारा तैराकी करते हुए तिरंगा यात्रा भी निकाली गई थी इसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर युवाओं की तारीफ की थी, इस वर्ष 21 जून विश्व योग |

दिवस के रूप में मनाया जाता है और तरह- तरह के योग किये जाते हैं,पानी में योग करने से जमीन पर किए गए योग की तुलना में अधिक लाभ होता है.
लेकिन हम आपको एक अलग तरह के योग के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में आपने शायद न सुना होगा और न देखा होगा. हम बात कर रहे हैं जलयोग की. जल की सतह पर योगासन करना और घंटों तक योगासन की मुद्रा में सतह पर बने रहना आपको सुनने में कुछ अजीब सा जरूर लगता है, लेकिन सुबह से ही गणगौर घाट पर युवक-युवती छोटे बच्चे बुजुर्ग पानी पर योग करते हैं, योग दिवस को लेकर पानी पर योग करना एक कठिन कार्य है लेकिन उसे बड़ी ही सरलता से छोटे बच्चे बुजुर्ग और महिलाएं गणगौर घाट पर कर रही है यहां के बालक बालिका है पानी में योग करने का अभ्यास शुरू किया. हर रोज दो घंटे का अभ्यास और अपनी लगन से महज दो महीने में किताबों में लिखीं. कल्पना को साकार करने में सफल हो गये.

पानी पर जल योग –

गणगौर घाट पर सुबह से ही पानी पर योग किया जाता है, वही कई युवक युवती से सीख भी रहे हैं पानी की सतह पर घंटों प्राणायाम, पद्मासन, ब्रह्मासन, ताड़कासन, गरुणासन की मुद्रा में खड़े और बैठे रहते हैं और लगभग चार घंटे तक लगातार वो ये योग पानी पर कर सकते हैं. वे कहते हैं कि यह एक तपस्या है, जिसे सीखने के लिए योग और तैराकी आना जरुरी है. इस कार्य को करते समय कई खतरे भी हैं, इसे प्रशिक्षकों की निगरानी में किया जा रहा है।

पानी के ऊपर लेटा रहता है 50 साल का ये शख्स युवाओं को देता है प्रेरणा –

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गणगौर घाट पर कई ऐसे युवा और बुजुर्ग हैं जो अपनी प्रतिभा तैराकी के साथ-साथ, पानी पर लेट कर अपनी प्रतिभा दिखाते हैं राजेश सिकलीकर, संजय शर्मा, युसूफ राजा, मोहन जैन, अरविंद सिंह सचदेवा, गजेन्द्र मालवे रणधीर जांगिड नितिन चौरसिया, दीपक भावसार यह न सिर्फ तैरते हैं बल्कि अलग-अलग तरह के जल योग भी करते हैं. नदी में कुछ देर तैरते हैं फिर आराम से नदी के पानी में ही लेट जाते है. बिना शरीर में कोई हलचल किए नदी के पानी के ऊपरी सतह पर घंटों तैरते रहते हैं, लेकिन वे डूबते नहीं है. मोहन जैन,राजेश सिकलीकर कहना है कि लगातार ऐसे योग करने के कारण उन्हें कोई बीमारी नहीं हुई है. न ही उनको ब्लड प्रेशर की शिकायत है न ही शुगर जैसी कोई बीमारी हुई. यही कारण है कि वे आज भी इस उम्र में रोजाना एक से दो घंटा गणगोर घाट पर जल योग जरूर करते हैं. कुछ लोगों को उन्होंने यह योग सिखाया भी है. आज भी कुछ बच्चों को यह योग सिखाने का काम करते हैं. एक नियमित योग अभ्यास को बनाए रखते हुए जलयोजन को अधिकतम करना एक संतुलनकारी कार्य है। जल योग में प्राणायाम, पद्मासन, ब्रह्मासन, ताड़कासन, गरुणासन की मुद्रा में खड़े और बैठे रहते हैं. पानी पर योग करना एक तपस्या है।

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