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श्री गोदा रंगनाथ कल्याण उत्सव धूमधाम से मना ! 

हरदा के “श्री रामानुज कोट मंदिर” में श्री गोदा रंगनाथ भगवान् के सगाई उत्सव को बडी धूमधाम और हर्षोल्लास से बडी संख्या में उपस्थित भागवत जनों की उपस्थिति में मनाया गया , जिसमें श्री गोदा रंगनाथ जी की आरती , पाठ और भजन गोष्ठी का सारे भागवत् जनों ने मिलकर तीस दिनीं धनुर्मास उत्सव में उपस्थिति देकर पुण्य लाभ लिया !! सगाई उत्सव गत वर्ष 31 दिसंबर 2024 मंगलवार को यह आयोजन किया गया।

■ तीस दिनी धनुर्मास महोत्सव 

धनुर्मास उत्सव मनाने के पीछे जो कथा प्रचलित है वो इस प्रकार है :-

तमिलनाडु के विल्लीपुत्तूर गाँव में विष्णुचित्तजी रहते थे इन्हीं के उद्यान की तुलसी की क्यारी में गोदाम्माजी का प्राकट्य हुआ। उस समय श्रवण मास, शुक्ल पक्ष पूर्वी फाल्गुनी नक्षत्र तथा कर्क की संक्रांति थी।

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गोदाम्माजी के जन्म के समय आकाशवाणी हुई थी कि हे विष्णुचित्तजी ये वही भूमि देवी है जिनका विष्णु भगवान ने वराह अवतार लेकर उद्घार किया था तब भूमि देवी द्वारा भगवान से पूछने पर कि आप दास की किस सेवा से प्रसन्न होते है, भगवान बोले जो मुझे पुष्पमाला अर्पण कर मेरा स्तोत्र पाठ करते हैं उन पर मैं विशेष प्रसन्न होता हूँ।

इसी सेवा भाव को मन में धार भूमि देवी ने भूतल अवतार लिया और भगवान की पुष्पमाला की सेवा की तथा ‘तिरूप्पावै’ नामक सुंदर प्रबंध पाठ भी रचा। गोदाम्माजी ने अपने पिताजी से 108 अर्चावतारों भगवानों का महत्व सुन रंगनाथ भगवान को अपने हृदय में विराजमान कर भगवत्ताप्राप्ति अर्थात रंगनाथ प्रभु के लिए धन संक्रांति से मकर संक्रांति तक तीस दिनों के व्रत का अनुष्ठान किया था।

गोदाम्माजी द्वारा किए गए यही तीस दिन के व्रत विधान को हर वर्ष धनुर्मास उत्सव के रूप में मनाते हैं। इस व्रत का अनुष्ठान करते हुए , *16 वें दिन श्री गोदा रंगनाथजी का सगाई उत्सव*  एवं *27वें दिन गोदाम्माजी को रंगनाथ भगवान की प्राप्ति हुई थी। इसी 27वें दिन को गोदा रंगनाथ कल्याण उत्सव* के रूप में हर वर्ष मंदिर में मनाते हैं।

इस महोत्सव के तहत देवस्थान में प्रभु वेंकटेश की विशेष आरती, गुरु परंपरा आलवंदार स्तोत्र, वेंकटेश स्तोत्र आदि का वाचन किया जाता है। इस पूरे माह भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है।