मकड़ाई एक्सप्रेस 24 धर्म- अध्यात्म । 17 फरवरी 2026 को साल का एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाक्रम ‘सूर्य ग्रहण’ होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र और विज्ञान दोनों ही दृष्टिकोणों से इस ग्रहण को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। यहाँ इस ग्रहण से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं।
सूर्य ग्रहण का समय और अवधि
भारतीय समयानुसार, यह सूर्य ग्रहण दोपहर के समय शुरू होगा और रात होने तक चलेगा:
ग्रहण का प्रारंभ: दोपहर 03:26 बजे
ग्रहण का मध्य काल: शाम 05:41 बजे
ग्रहण का समापन: रात 07:57 बजे
इस खगोलीय घटना की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 31 मिनट की होगी।
भारत में सूतक काल मान्य क्यों नहीं है ?
शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल केवल उसी स्थान पर प्रभावी माना जाता है जहाँ ग्रहण नग्न आंखों से दिखाई दे। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल के कोई भी नियम लागू नहीं होंगे।
मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और सामान्य पूजा-पाठ किया जा सकेगा।
गर्भवती महिलाओं को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारत में इसका कोई धार्मिक प्रभाव नहीं होगा।
किन क्षेत्रों में दिखाई देगा यह ग्रहण ?
यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ सूर्य के अस्त होने से पहले ग्रहण की छाया नहीं पड़ेगी।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
खगोलविदों के अनुसार, यह एक ‘आंशिक सूर्य ग्रहण’ (Partial Solar Eclipse) हो सकता है, जहाँ चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से को ढकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भले ही यह भारत में न दिखे, लेकिन इस दौरान सौर हवाओं और ब्रह्मांडीय ऊर्जा में परिवर्तन का अध्ययन किया जा सकता है।
यदि आप इस ग्रहण को देखना चाहते हैं, तो आप नासा (NASA) या अन्य विश्वसनीय खगोलीय संस्थाओं के यूट्यूब चैनलों पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं।

