हंडिया : न कोई दिखावा, न कोई मंच, न कोई प्रचार… फिर भी हर शाम भक्तिभाव से भर उठता है पागल बाबा आश्रम घाट
हंडिया। एक तरफ मोबाइल की स्क्रीन पर सिमटती दुनिया है, दूसरी ओर मां नर्मदा का पावन तट, जहां हर शाम भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। पागल बाबा आश्रम घाट पर परम पूज्य गुरुदेव पं. श्री रामकृष्ण दाधीच के नेतृत्व में होने वाला नर्मदाष्टक पाठ इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का विशेष केंद्र बना हुआ है।
जैसे ही “नमामि देवि नर्मदे…” के स्वर घाट पर गूंजने लगते हैं, वैसे ही वातावरण में एक अलग ही आध्यात्मिक आभा फैल जाती है। लयबद्ध स्वर, सामूहिक पाठ और मां नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा का ऐसा संगम बनता है कि वहां मौजूद हर व्यक्ति कुछ देर के लिए सांसारिक चिंताओं को भूल जाता है।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां न कोई भव्य मंच है, न प्रचार-प्रसार की होड़ और न ही किसी प्रकार का दिखावा। केवल मां नर्मदा के प्रति समर्पित श्रद्धा, भक्ति और सामूहिक साधना का भाव ही लोगों को प्रतिदिन यहां खींच लाता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि दिनभर की भागदौड़, तनाव और मानसिक व्यस्तताओं के बीच नर्मदाष्टक का यह पाठ मन को अद्भुत शांति प्रदान करता है। पाठ की लय और स्वर ऐसे वातावरण का निर्माण करते हैं कि कुछ ही देर में मन स्वतः एकाग्र और प्रसन्न हो जाता है।
आज जब लोग मानसिक शांति की तलाश में दूर-दूर तक भटक रहे हैं, तब पागल बाबा आश्रम घाट पर हर शाम गूंजता नर्मदाष्टक यह संदेश दे रहा है कि सुकून का रास्ता दिखावे में नहीं, बल्कि श्रद्धा और आध्यात्मिकता में छिपा है।

