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आज 9 अप्रैल CRPF शौर्य दिवस जब 150 जवानों ने कच्छ के रण में धूल चटा दी थी 3500 पाकिस्तानी सैनिकों को

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली । भारतीय सैन्य इतिहास में 9 अप्रैल का दिन स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। यह वह दिन है जब साहस ने संख्या बल को मात दी और देशभक्ति ने आधुनिक हथियारों के घमंड को चूर-चूर कर दिया। आज पूरा देश केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का ‘शौर्य दिवस’ मना रहा है। 1965 में आज ही के दिन गुजरात के कच्छ के रण में स्थित ‘सरदार पोस्ट’ पर सीआरपीएफ के मुट्ठी भर जवानों ने जो पराक्रम दिखाया, वह आज भी हर भारतीय की रगों में जोश भर देता है।

सरदार पोस्ट की वो ऐतिहासिक जंग

साल 1965 की तपती गर्मी और कच्छ का रेतीला रण। पाकिस्तान की सेना ने ‘ऑपरेशन डेजर्ट हॉक’ के तहत भारत की सीमा में घुसपैठ की नापाक साजिश रची थी। 9 अप्रैल की अलसुबह, करीब 3500 सैनिकों वाली पाकिस्तान की एक पूरी ब्रिगेड ने भारी तोपखाने और आधुनिक हथियारों के साथ ‘सरदार पोस्ट’ पर हमला बोल दिया।

भारतीय जवानो के मजबूत इरादे

आश्चर्य की बात यह थी कि उस समय इस पोस्ट की सुरक्षा की कमान सेना के पास नहीं, बल्कि CRPF की केवल दो कंपनियों (लगभग 150 जवान) के पास थी। दुश्मन को लगा था कि वह चंद मिनटों में इस चौकी पर कब्जा कर लेगा, लेकिन भारतीय जवानों के इरादे चट्टान की तरह मजबूत थे।

साहस बनाम संख्या बल: 12 घंटे का भीषण संघर्ष

जैसे ही पाकिस्तानी सेना ने हमला शुरू किया, सीआरपीएफ के जवानों ने अपनी पोजिशन ली और जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। संख्या में 20 गुना ज्यादा होने के बावजूद पाकिस्तानी सैनिक भारतीय जवानों की रणनीतिक मोर्चाबंदी को भेद नहीं पाए।

जवानो का अदम्य साहस और बलिदान

करीब 12 घंटों तक चली इस भीषण मुठभेड़ में सीआरपीएफ के जवानों ने दुश्मन की भारी गोलाबारी का सामना किया। इस जंग में पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए और 4 को जीवित पकड़ लिया गया। मातृभूमि की रक्षा करते हुए सीआरपीएफ के 6 वीर जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। यह सैन्य इतिहास की पहली ऐसी घटना थी, जहां पुलिस बल की एक छोटी सी टुकड़ी ने एक पूर्ण सैन्य ब्रिगेड को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।

अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि: “शौर्य को नमन”

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऐतिहासिक दिन पर सीआरपीएफ के जवानों को नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट के जरिए वीर जवानों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

गृह मंत्री ने कहा, “सीआरपीएफ शौर्य दिवस पर हमारे बहादुर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को सलाम। 1965 में आज ही के दिन सरदार पोस्ट पर जो गौरव गाथा लिखी गई थी, वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।” उन्होंने जवानों के परिवारों के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिनके धैर्य की वजह से ये वीर सीमा पर डटे रहते हैं।

CRPF: आंतरिक सुरक्षा का मजबूत आधार

कच्छ के रण से शुरू हुआ वीरता का यह सफर आज भी जारी है। सीआरपीएफ आज भारत का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है, जो न केवल नक्सल विरोधी अभियानों में अग्रणी है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद के खिलाफ भी मजबूती से खड़ा है।

शौर्य दिवस का महत्व

यह दिन जवानों के आत्मबल और रणनीतिक कौशल का प्रतीक है।

यह सिखाता है कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि जिगर से जीते जाते हैं।

यह पुलिस और अर्धसैनिक बलों के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है।

सेना का संकल्प राष्ट्र सर्वोपरि

आज जब हम शांति और सुरक्षा के माहौल में सांस ले रहे हैं, तो हमें उन 150 वीरों को नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने कच्छ की तपती रेत को अपने लहू से सींचकर तिरंगे की शान को झुकने नहीं दिया। ‘सरदार पोस्ट’ की जीत महज एक सैन्य सफलता नहीं थी, बल्कि यह भारतीय सुरक्षा बलों के उस अटूट संकल्प की विजय थी, जो कहता है— ‘राष्ट्र सर्वोपरि’।

जय हिन्द!