हद कर दी आपने : हरदा जिला पंचायत सीईओ का खुला संरक्षण ! खूब करो भ्रष्टाचार। आखिर क्यों नहीं हो रही कार्यवाही
मकड़ाई एक्सप्रेस के द्वारा भ्रष्टाचार उजागर करने के एक पखवाड़े बाद भी नहीं हुई कोई कार्यवाही ! न ही बनी जांच टीम
मकड़ाई समाचार हरदा। प्रदेश के मुखिया मोहन यादव ग्राम पंचायतों में बिकास के नाम करोड़ो रुपए दे रहे ताकि जमीनी स्तर पर गांव में ग्रामीणों को सर्व सुविधाएं आसानी से मिल सके। लेकिन उनकी उम्मीदों पर जिले के अधिकारी पानी फेर रहे है।
अभी तो हरदा जिला पंचायत में कोई सुनने वाला जिम्मेदार अधिकारी नहीं है।
जिले की दो ग्राम पंचायतों में शासकीय राशि नियमों के विपरीत फर्जी बेडरो के खातों में डाली गई। लाखों का भ्रष्टाचार हुआ। लेकिन कार्यवाही नहीं हुई।
केस नंबर 1
टिमरनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पांडर माटी में 36 लाख की लागत से बन ग्राम पंचायत भवन में लाखों रुपए के फर्जी बिल बिना जीएसटी के फर्जी वेंडर के लगाए गए है।इस मामले में ग्राम पंचायत भवन का कार्य भी घटिया स्तर का हुआ ।
दान की भूमि पर ग्राम पंचायत ने निर्माण कार्य किया।
निर्माण कार्य में लगभग 18 लाख रुपए निकल चुके लेकिन मौके पर अगर कार्य की जांच कर मूल्यांकन किया जाए तो पांच लाख से ज्यादा का कार्य नहीं हुआ। फर्जी वेंडर बनाकर प्रतिमाह कभी मजदूरी तो कभी लोहा सरिया सीमेंट ,पानी के टैंकर के नाम से मजदूरी के नाम से ही लाखों रुपए का भुगतान सरपंच सचिव ने बिना हस्ताक्षर सील के ही कर दिया।नियमानुसार पंचायत को जीएसटी के दायरे में काम करना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया। वहीं टिमरनी जनपद के जिम्मेदार पंचायत इंस्पेक्टर शर्माजी तो सीधे पत्रकारों को कहते है। लिखित शिकायत करो तब कार्यवाही करूंगा।
मालूम हो कि पंचायत इंस्पेक्टर का पूर्व में आय से अधिक संपत्ति मामले में विवादों में रह चुके है। वहीं नियमों की बात करे तो शिकायत मिलने पर भी उन्हें नजर अंदाज कर दोषियों को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
केस नंबर 2
दूसरा मामला खिरकिया जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कालधड़ का है। जहा सचिव रंगलाल थारे ने नियम विरुद्ध तरीके से लगभग 20 हजार का मोबाइल खरीदा, फोटो कॉपी की दो दुकान से 18 हजार का नेट बैलेंस भी डलवाया।
सचिव ने सरपंच की फोटो कॉपी की दुकान से फर्जी बिल लगाकर हजारों रुपए निकाले ।
मकड़ाई एक्सप्रेस ने भी इस मामले को प्रमुखता से उजागर किया लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। दोनों ही मामले जनपद सीईओ से लेकर जिला पंचायत सीईओ के संज्ञान में है। लेकिन कार्यवाही नहीं हुई।
उल्टा अभी सचिवों के स्थानांतरण में कालधड़ पंचायत के सचिव रंगलाल थारे को तो उनके अपने गृह ग्राम की पंचायत का प्रभार दे दिया।
इधर जिला पंचायत सीईओ की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। की जिला पंचायत सीईओ भ्रष्टचार के दल दल में डूबे सचिवों को अभयदान क्यों दे रही है।
वहीं ग्राम पंचायत के जागरूक लोगों का कहना है । की भ्रष्टाचार की काली कमाई नीचे से ऊपर तक अधिकारी डकार रहे। इसलिए शासकीय राशि की हेराफेरी गड़बड़ घोटाला जिले में हो रहा है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच कर रिकवरी और दोषी सरपंच सचिव फर्जी बेंडर पर FIR होना चाहिए। लेकिन अधिकारियों के संरक्षण में कार्यवाही नहीं हो रही।
जिलाधीश महोदय को ऐसे मामलों को संज्ञान में लेकर जांच करवाना चाहिए। ताकि अमानत में ख़यानत करने वालों के हौसले बुलंद न हो सके। वहीं प्रदेश के मुखिया मोहन यादव सरकार की छबि भी धूमिल न हो।
टिमरनी: ग्राम पंचायत में सरपंच पति का दबदबा: पहली बार बनी ग्राम पंचायत पांडर माटी में सरपंच सचिव ने धुंधले बिल वाउचर लगाकर फर्जी वेंडरो के नाम से निकाले लाखों, जिला पंचायत सीईओ बोली जांच दल बनाकर कार्यवाही करेंगे।
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