बदले की आग में हुए हत्याकांड के विरोध मे गुर्जर व क्षत्रिय समाज ने राजीनामा शुरु कराया मिल रही है ,सफलता
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 मुरैना| जिले के लेपा गांव में जमीन के विवाद में 10 साल बाद बदले की आग में हुए हत्याकांड ने चंबल को पूरे देश में कलंकित कर दिया। यहां की धरती पर बदले के भावना में हत्याओं का इतिहास पुराना है। इस खूनी परंपरा को मिटाने यहां के गुर्जर व क्षत्रिय समाज ने पहल करते हुए पंचायत बैठाकर राजीनामा का सिलसिला शुरू कराया था। इसमें उन्हें सफलता भी मिली, जो पक्ष एक दूसरे के खून के प्यासे थे, वह साथ-साथ शांति से रह रहे रहे हैं।
संत हरिगिरी महाराज की भी अहम भूमिका रही। क्षत्रिय महासभा की टीम चंबल से लेकर राजस्थान व उप्र तक में ऐसे विवादों को समाज की पंचायत के जरिए सुलझाया गया है। लेपा हत्याकांड के बाद समाज अब शांति की इस पहल को और अधिक तेजी से गांव-गांव तक पहुंचाने पर विचार कर रहा है। ताकि ऐसे तमाम विवादों पर अंकुश लग सके और शांति कायम रहे।
मामला 01 – जमीन व खेत के रास्ते का विवाद
रायपुर जखोना गांव के सोवरन सिंह तोमर, रामनाथ सिंह तोमर का अपने ही परिवार के रामेश्वर सिंह तोमर व शेरसिंह तोमर से जमीन व खेत के रास्ते को लेकर विवाद ऐसा विवाद था, कि दोनों में कई बार खूनी संघर्ष हो गया। दोनों पक्षों ने गांव खाली कर दिया। महिला, बच्चे व मवेशियों तक को रिश्तेदारों के पास भेज दिया। सात साल से चले आ रहे विवाद को क्षत्रिय महासभा ने चार बार पंचायत कर सुलझाया। आज गांव में दोनों पक्ष बिना विवाद रह रहे हैं।
मामला 02-
भिंड जिले की अटेर तहसील के खड़ेरी गांव में देवेंद्र सिंह व बृजेंद्र सिंह का उनके ही परिवार के सदस्य श्यामवीर सिंह, भोलेसिंह भदौरिया से जमीन को लेकर झगड़ा चल रहा था। 2018 में हुए खूनी संघर्ष में दोनों पक्षों से एक-एक व्यक्ति की जान चली गई। क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वृंदावन सिंह सिकरवार व प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने पांच माह में कई बार दोनों पक्षों को बैठाकर समझाइश दी। बीते साल दोनों पक्षों का राजीनामा हो गया|
गुर्जर समाज के संत, राजनीतिज्ञ व समाजसेवियों ने गांव में पंचायत बुलाई। आरोपित पक्ष से मुआवजे दिलाकर राजीनामा करवाकर दुश्मनी का अंत कराया।जो पक्ष एक दूसरे के खून के प्यासे थे, वह साथ-साथ शांति से रह रहे रहे हैं।जो पक्ष एक दूसरे के खून के प्यासे थे, वह साथ-साथ शांति से रह रहे रहे हैं।

