मकड़ाई समाचार खिरकिया। ब्लॉक के 64 पंचायत सचिवों को विगत चार माह से वेतन नहीं मिला है , जिसके चलते सचिवों को काफी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिससे घर गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया है। वहीं लोन पर उठाई गई बाइक तथा होमलोन की ईएमआई भरने में भी परेशानी हो रही है। हसनपुरा ग्राम पंचायत सचिव हरिहर शर्मा सहित अन्य सचिवों ने बताया ग्राम पंचायत सचिव शासन की योजनाओं के क्रियांवयन करने की मुख्य कड़ी है। समय- समय पर पंचायत सचिवों से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियांवयन के साथ अन्य विभागों के कार्यो को कराया जाता है। इसके बावजूद उन्हें अतिरिक्त वेतनमान तो दूर मूल वेतनमान ही नहीं दिया गया है। कई सचिव अपने परिवार का भरण पोषण करने में असमर्थ है। उन्होंने शासन – प्रशासन से मांग की है कि सचिवों का वेतन तत्काल कराया जाए। ग्राम पंचायत सचिवों ने कहा है कि शासन की ओर से सभी नियमित कर्मचारियों को वेतन भुगतान किया जा रहा है। केवल पंचायत सचिवों का वेतन ही क्यों नहीं दिया जाता। जानकारी के अनुसार ब्लॉक में पंचायत सचिवों को सितंबर माह से ही वेतन नहीं मिला है। ग्राम पंचायत सचिवों रामनारायण राजपूत, सुरेश सोलंकी, शंकरलाल कोगे, हेमंत जगताप आदि ने कहा है कि शासन की ओर से सभी नियमित कर्मचारियों को वेतन भुगतान किया जा रहा है। केवल पंचायत सचिवों का वेतन ही नहीं दिया गया। जबकि त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था में सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना को सचिव ही ग्रामीणों तक पहुंचाते हैं। योजनाओं पर केंद्र व राज्य सरकार काफी राशि खर्च कर रही हैं, लेकिन सचिवों को वेतन भुगतान में आर्थिक तंगी होना बताया जाता है। कोई योजना बिना सचिवों के ग्रामीण हितग्राही तक पहुंचाना संभव नहीं है। पंचायत राज व्यवस्था में सरकार और हितग्राही के बीच सचिव महत्वपूर्ण कड़ी होता है। आर्थिक तंगहाली में सचिव कैसे काम करेंगे यह बात सरकार को विचार करना चाहिएइस संबंध में जनपद पंचायत सीईओ स्वतिसिंह बघेल ने बताया कि पंचायत सचिवों के वेतन का आवंटन शासन से नहीं होने के कारण उन्हें वेतन नहीं दिया गया है। इधर शासन ने भी सभी जनपद पंचायत सीईओ के आहरण वितरण अधिकार निलंबित कर रखें है। बताया जाता है कि जनपद पंचायत सीईओ को सिर्फ तीन महीने के लिए आहरण वितरण अधिकार दिए जाते हैं। ब्लॉक अध्यक्ष व संभागीय महामंत्री पंचायत सचिव संघ हरिहर शर्मा का कहना है कि न जाने क्यों सरकार कोई भी हो पंचायत सचिवों की ओर किसी की नजर तक नहीं जाती। जहां अन्य कर्मचारियों को महीने की 1 तारीख को वेतन मिल जाता हैं। वहीं पंचायत सचिवों को 3 से 5 माह तक यह पीड़ा भोगनी पड़ती हैं।
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