ये शीर्षक कोई मामूली प्रश्न नहीं जो आभासी जवाब देकर पीड़ितों को संतुष्ट किया जा सके। 6 फरवरी के धमाकों में जहां लोगों ने अपने 13 परिजनों को खोया है और करीब 200 लोग घायल हुए, वहीं करीब 50 परिवार के 250 लोग बेघर हुए हैं।
हरदा । आज बैरागढ़ बारूद विस्फोट विभीषिका को 8 माह पूर्ण हो चुके हैं। हममें से अधिकांश शायद इस विस्फोटक घटना को धीरे धीरे विस्मृत कर चुके हों। विस्फोट की भयानक गूंज जिनके जेहन पर हर रोज़ दस्तक देती है वे वही लोग हैं जो इस घटना के चश्मदीद रहे हैं। ये लोग अपने बर्बाद आशियाने की तस्वीर यादों में लेकर प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था के तहत भवनों में अस्थायी रूप से अभी भी रहके भविष्य के सपने संजो रहे हैं।
आईटीआई संस्थान में जहां 17 परिवार 3 बड़े कमरों में एकाधिक परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। यहां रहने वाले स्कूली बच्चों की संख्या एक कक्षा के बराबर है। 3 परिवार सिविल लाइन पुलिस थाना के भवन में हैं। अन्य 5-6 परिवार बैरागढ़ पंचायत भवन के कमरों में गुजर बसर कर रहे हैं।
मिली जानकारी में कुल 50 परिवारों में से लगभग आधे परिवार शहर के अलग अलग वार्ड में किराए के भवन में रह रहे हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा इन्हें समय पर नाश्ता खाना उपलब्ध कराया जाता है। 150 लोगों का खाना रोजाना तैयार होता है। साथ ही अधिकारी समय समय पर जानकारी लेते रहते हैं। दो नपाकर्मी, पटवारी, और पुलिसकर्मी की यहां ड्यूटी रहती है।
बावजूद उपलब्ध सब सुविधाओं के यहां निवासरत महिलाएं अपने घर और बच्चों के सुखद भविष्य को लेकर बेहद चिंतित रहती हैं। बच्चों के ट्यूशन आने जाने को लेकर फिक्रमंद होती हैं। वे कहती हैं अपना घर अपना घर ही होता है साहब जी।
मकड़ाई एक्सप्रेस ने इन जगहों पर जाकर परिवारों से बातचीत की ।
◆ आईटीआई छात्रावास के कमरे रह रहीं बुजुर्ग कमला बाई बताती हैं
कि अपना घर तो अपना घर ही होता है। पराए बंधन में सुविधाएं भी हों तो क्या काम की। हमारी इच्छा है कि हम जल्द से जल्द अपने घर में जाएं ।
गृहिणी आरती पत्नी भीम सिंह राजपूत बताती हैं कि मेरी तीन छोटी बेटियां हैं। यहां एक कमरे में 2 परिवारों को रहना पड़ता है। बीच मे रस्सी चादर से पार्टीशन करते हैं। ये बड़ा अजीब लगता है। हम सब जल्द से जल्द अपने अपने घर जाएं अब तो यही एक सपना है।
तीन छोटे बच्चों की मां मोनिका पत्नी जितेंद्र पवार भी ऐसा ही चाहती हैं। वे कहती हैं कि यहां रहते 8 माह हो गए और कब तक रहना होगा क्या मालूम !
कक्षा दसवी की छात्रा मोनिका संतोष चौहान, संयुक्त रूप से रह रहे परिवारों के बीच पढ़ाई करने व रहने में असहज महसूस करती है।
◆ सिविल लाइन चौकी के पुराने भवन में निवासरत
बसंती बाई 55, पत्नी रेवाराम परमार, धमाके के बाद पैर में रॉड डली थी। इंदौर इलाज हुआ, दुबारा न जा पायीं।
-बसंती बाई ने बताया कि मीना बाई बेलदार जो मेरी पुत्री है उसके पति नहीं हैं। बारूद धमाके के बाद चोट से उसका पेट दर्द होता रहता है। अभी भी ठीक नहीं है। इलाज की दरकार है।
-मोहन परमार (32) बताते हैं कि मौसी की लड़की की मौत और परिस्थिति के चलते इलाज न करवा पाया । अभी भी पैर दर्द करता है।
◆ बैरागढ़ पंचायत भवन –
(5 परिवार, 23 लोग 5 बच्चे)
– सचिन चौहान कहते हैं कि 3 माह से काम बंद है । अब क्या बताएं। मां जानकी बाई 45 को पिछले सप्ताह हार्ट अटैक आया था। हरदा सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती किया था ।
यहां बिजली की समस्या रहती है। लाइट कभी भी बंद हो जाती, वोल्टेज की दिक्कत , खेत और खुला मैदान होने से जहरीले जीव जंतुओं का डर बना रहता है। एक बच्चे को जहरीले जीव ने काटा था।
◆ हरदा भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा, “हमने उनसे मुलाकात की और हर तरह की मदद का आश्वासन दिया। हमने उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर देने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने यह कहकर ढाई लाख लेने से इनकार कर दिया कि उनके घरों की कीमत बहुत ज़्यादा है। उन्हें जल्द ही मुआवज़ा मिल जाएगा।
◆ कांग्रेस नेता और वकील अवनी बंसल ने कहा, “उन्हें मुआवजा देना चाहिए था और बाद में नीलामी से पैसा वसूलना चाहिए था। राज्य सरकार ने पहले तो अवैध पटाखा फैक्ट्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और अब मुआवजे के लिए पीड़ितों को मानसिक रूप से परेशान कर रही है।”
पुलिस ने इस मामले में फैक्ट्री मालिक राजेश अग्रवाल और सोमेश अग्रवाल समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। विस्फोट के बाद गृह विभाग की एक समिति ने जांच की, जिसमें पाया गया कि यह एक “मानव निर्मित त्रासदी थी ।
बंसल ने कहा कि 2015 और 2021 में भी फैक्ट्री में इसी तरह की घटनाएं हुईं, लेकिन संचालन बंद नहीं किया गया।
अवनी बंसल ने कहा, “इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।” जांच पैनल ने पाया कि सैकड़ों टन पटाखे अवैध रूप से बनाए गए थे, जबकि फैक्ट्री के पास एक महीने में पटाखे बनाने के लिए केवल 15 किलोग्राम विस्फोटक इस्तेमाल करने का लाइसेंस था।
◆ कलेक्टर का कहना है –
हरदा जिला कलेक्टर आदित्य सिंह ने कहा कि मुआवजे का मुद्दा अदालत में लंबित है। “हमने हरदा के बैरागढ़ क्षेत्र में मिट्टी और पानी के प्रदूषण परीक्षण जैसे सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर लिए हैं, जहां विस्फोट हुआ था। अदालत के आदेश के बाद, हम परिवारों को मुआवजा देने के लिए संपत्ति की नीलामी करेंगे।” फिलहाल हम यहां रह रहे सभी विस्थापितों को अच्छी से अच्छी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रतिबद्ध हैं।

