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बाबा महाकाल श्रृंगार के नियमों में बड़ा बदलाव, पढ़ें नए नियम

उज्जैन। स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल मंदिर में देश-विदेश से भक्त दर्शन के लिए उमड़ते हैं। यहां शिवलिंग के क्षरण की समस्या को मंदिर प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। मंदिर की भस्म आरती और भव्य श्रृंगार भक्तों को मंत्रमुग्ध करते हैं, लेकिन अब शिवलिंग की सुरक्षा के लिए मंदिर प्रशासन ने श्रृंगार के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

बाबा महाकाल श्रृंगार के नियमों में बड़ा बदलाव
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की एक संयुक्त रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शिवलिंग पर भस्म रगड़ने, स्पर्श करने और पूजा सामग्री के कणों के चिपकने से क्षरण हो रहा है। इससे छोटे-छोटे बैक्टीरिया पनप रहे हैं, जो शिवलिंग में छिद्रों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस समस्या को रोकने के लिए विशेषज्ञों ने कई सुझाव दिए, जिनमें से एक प्रमुख उपाय भांग की मात्रा को सीमित करना है।

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भांग की मात्रा अब 3 KG तक सीमित
महाकाल ज्योतिर्लिंग के श्रृंगार में पहले 5 से 7 किलो भांग का उपयोग होता था, जिसे अब घटाकर अधिकतम 3 किलो कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने भांग की मात्रा को सटीक नापने के लिए तोला-कांटा स्थापित करने का फैसला किया है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने कहा कि अब भगवान महाकाल के श्रृंगार में अधिकतम 3 किलो भांग का ही उपयोग होगा। श्रृंगार से पहले भांग का वजन अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

बाबा महाकाल का अनोखा श्रृंगार
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने बताया कि सुबह की भस्म आरती में भूत वाहन महाकाल को भस्म रमाया जाता है, जबकि शाम को भांग से उनका भव्य श्रृंगार होता है। भगवान को गणेश, श्रीकृष्ण, हनुमान, शेषनाग, तिरुपति बालाजी जैसे विभिन्न रूपों में सजाया जाता है, जो भक्तों के लिए दैवीय दर्शन का अनुभव होता है। यह श्रृंगार जन्म तिथि, विवाह वर्षगांठ, विशेष तिथियों या त्योहारों के अनुसार किया जाता है।

श्रृंगार के लिए नियम और खर्च
बाबा महाकाल का श्रृंगार कराने के लिए भक्तों को 1100 रुपए की शासकीय रसीद कटानी होती है। इसमें भांग, सूखे मेवे, वस्त्र और पूजन सामग्री शामिल होती है, जिसका कुल खर्च 5,000 से 6,000 रुपए तक आता है। श्रृंगार कराने वाले भक्तों को शाम की संध्या आरती और पूजा के लिए नंदी हॉल में उपस्थित होने की अनुमति मिलती है. मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में भगवान को चंदन, कुमकुम, भांग, मावे और सूखे मेवों से अलग-अलग स्वरूपों में सजाया जाता है।