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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मप्र में मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट पर खड़े किए सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में विकास एवं आवास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा हुई। इस दौरान मेट्रो परियोजना को लेकर संसदीय कार्य मंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि अधिकारियों ने मेट्रो की प्लानिंग जनप्रतिनिधियों से चर्चा किए बिना तैयार कर ली और इसे सीधे शहर पर लागू कर दिया। अब सरकार अलाइनमेंट की समीक्षा कर सुधार की कवायद शुरू करेगी।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में कहा कि,भोपाल के सांसद आलोक शर्मा और विधायक रामेश्वर शर्मा ने उनसे मेट्रो को लेकर बैठक बुलाने का आग्रह किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही भोपाल मेट्रो की समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सभी जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस दौरान रामेश्वर शर्मा ने लोक भवन क्षेत्र में चल रहे कार्य को लेकर चिंता जताई और कहा कि, यदि काम नहीं रोका गया तो विधानसभा पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। इस पर मंत्री ने भरोसा दिलाया कि अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान निकाला जाएगा।

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इंदौर में भी नहीं हुई चर्चा
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि, इंदौर में भी मेट्रो की योजना बनाते समय विधायकों से राय नहीं ली गई। वहीं, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सुझाव दिया कि,भोपाल और इंदौर में मेट्रो तभी सफल होगी जब इसे अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ा जाएगा। इस पर विजयवर्गीय ने कहा कि, प्रारंभिक योजना शहर के भीतर मेट्रो चलाने की नहीं थी, बल्कि भोपाल-विदिशा, भोपाल-होशंगाबाद और भोपाल-रायसेन जैसे मार्गों पर इसे जोडक़र शहर का घनत्व कम करने का उद्देश्य था। इसी तरह इंदौर को देवास, महू और उज्जैन से जोडऩे की परिकल्पना थी। उन्होंने कहा कि, बीच में 15 माह की कमलनाथ सरकार के दौरान भूमिपूजन के बाद काम शुरू हुआ, लेकिन अब योजना को दूरदर्शी दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया जाएगा।

अंडरग्राउंड तकनीक पर भी दिया जवाब
भोपाल में अंडर ग्राउंड मेट्रो का मुद्दा कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने उठाया था। भोपाल में अंडरग्राउंड निर्माण के दौरान कब्रिस्तान को नुकसान पहुंचने के सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले दिनों दिल्ली के चांदनी चौक में मेट्रो की ऑस्ट्रेलियन नेटम तकनीक देखकर आया हूं। इसीलिए भोपाल में भी आधुनिक ‘नेटम’ तकनीक से लगभग 20 मीटर गहराई में टनल बनाई जाएगी, जिससे सतह पर किसी संरचना को नुकसान नहीं होगा। इस चर्चा के बाद विभाग की 21 हजार करोड़ रुपये तथा राज्य विधानमंडल के लिए 152 करोड़ रुपये की अनुदान मांग को सदन ने स्वीकृति दे दी गई।