मुंबई महाराष्ट्र
भारतीय संस्कृति एवं कला बहुत आकर्षक एवं मनमोहक है। हम सकारात्मक दृष्टि डाले तो मुगलकाल से पहले देश में अनेक प्रकार की कलाए पूर्णत विकसित थी।मूर्तिकला,पत्थरो को काट कर महल मंदिर गुफाएं उनमे भी चित्रकला अपने आप आश्चर्यजनक कला थी। जो भारत के अलावा पूरी दुनिया में कहीं देखने को नही मिलता है। ऐसा एक स्थान जो मशहूर एलीफेंटा की गुफा जो महाराष्ट्र राज्य के मुंबई से के पास घारपुरी द्धीप पर स्थित हैं।
शैव और बौद्ध संप्रदाय से संबंध है
यहा पर शिवभक्ति के प्रमाण मुर्तियां देखने को मिलती लगता है शैव संप्रदाय का खासा असर रहा होगा। ऐलिफेंटा की गुफाओ में भगवान शिव के तीन स्वरुपों की भव्य मूर्ति स्थापित हैं। यह भारत के प्रमुख ऐतिहासिक एवं प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। यह भव्य गुफाएं 2 भागो में बटी है। जिसके एक भाग में हिन्दू धर्म दूसरे अन्य में बौद्ध धर्म से प्रेरित नजर आता है। गुफाओ के इतिहासिक महत्व 987 में यूनेस्को ने इन गुफाओ के इतिहासिक साक्ष्य को देख इसे विश्व धरोहर की लिस्ट में स्थान दिया है। यह गुफाएं करीब 6-8 वी शताब्दी की बताई जाती हैं इनका क्षेत्रफल 60 हजार वर्ग फिट का क्षे़त्रफल है और यहां भगवान शिव और बौद्ध प्रतिमाएं मिलती है।
एतिहासिक झलक
एलीफेंटा की गुफाओं का जो जानकारी मिलती है कि बादामी चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्धितीय द्धारा कोंकण के मौर्य शासकों की हार के समय से मिलता हैं। उस दौरान भगवान शिव को समर्पित इन विशाल एलीफेंटा गुफाओं को पुरी या पुरिका के नाम से जाना जाता था और यह घारापुरी द्धीप पहले कोंकण मौर्यों की राजधानी थी। इतिहासकारो के अलग अलग मत हैं। कोई ईन्हे कोंकण मौर्यो तो कोई राष्ट्रकूटो,चालुक्य आदि द्वारा बनवाया जाना बताते है।भारतीय मान्यता के अनुसार इन गुफाओ का निर्माण इनका निर्माण पांडवों द्धारा करवाया गया था। जबकि कुछ विद्धान एलीफेंटा गुफाओं का निर्माण शिव भक्त बाणासुर द्धारा कराया गया होगा।
पुर्तगालियों का रहा केंद्र
पुर्तगालियों का शासन इस क्षेत्र में रहा हैं उन्होने जब इस दीप पर हाथी कि विषाल प्रतिमा देखी तो उन्होने इसे एलिफेंटा नाम दिया। 16 शताब्दी में पुर्तगालियों ने यहां पर शासन किया और यह स्थान उनके लिए बहुत महत्व रखता था। उस काल में भी विदेषी पर्यटक यहां पर आते थे।
जाने कैसी है एलीफेंटा गुफाओं की वास्तुकला और संरचना
विश्व प्रसिद्ध ऐलिफेंटा गुफाए की वास्तुकला अत्यंत सुंदर है। जो बरबस लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती है। महाराष्ट्र के मुंबई से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एलीफेंटा की प्रसिद्ध गुफाएं 60 हजार वर्ग फीट के क्षेत्रफल में फैली हुई हैं। इसके परिसर में कुल 7 गुफाएं हैं , जिनमें से 5 गुफाएं हिन्दू धर्म से संबंधित है, जबकि अन्य दो गुफाएं बौद्ध धर्म से संबंधित हैं। घारपुरी द्धीप में स्थित एलीफेंटा गुफा की गुफा नंबर 1, ग्रेट गुफा के नाम से जानी जाती है, जिसके अंदर भगवान शिव की कई मूर्तियां विराजित हैं। इस गुफा के केन्द्र में भगवान शिव को समर्पित त्रिमूर्ति स्थापित हैं,जो कि सदाशिव के नाम से जानी जाती हैं। इस गुफा में भगवान शिव की अन्य एक और मूर्ति है, जिसमें गंगा को धरती पर लाते हुए शिव का चित्रण दिखाया गया है।
वहीं ऐलीफेंटा गुफा की गुफा नंबर 2 से गुफा नंबर 5 कैनन हिल के नाम से जानी जाती हैं। यहां पर गुफा नंबर 6 और 7 के लिए स्तूप हिल्स हैं। वहीं गुफा नंबर 6 को सीताबाई गुफा के नाम से भी जाना जाता है।वहीं इसकी गुफा नंबर 7 के आगे एक तालाब है, जो कि बौद्ध तालाब के नाम से जाना जाता है।
भगवान शिव को समर्पित ऐलीफेंटा गुफाए मुंबई से जा सकते हैं
मुंबई के पास घारपुरी द्धीप में स्थित यह गुफाएं भगवान शंकर को समर्पित हैं। इन गुफाओं में भगवान शंकर की कई प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां भगवान शिव के तीनों रुपों का वर्णन करती हुईं मूर्तियां स्थापित है कैलाश पर शिव-पार्वती, नटेश्वर, अर्धनारीश्वर, महेशमूर्ति शिव, पार्वती-परिणय, कैलाशधारी रावण एवं भैरव आदि की प्रतिमाएं स्थापित हैं।मुंबई से महज 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एलीफेंटा गुफा की सैर करने पर्यटक सड़क,रेल और वायु तीनों परिवहन के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं।वायु मार्ग से आने वाले यात्री मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज एयरपोर्ट पर उतरकर यहां से टैक्सी या फिर कैब आदि के माध्यम से एलीफेंटा गुफा देखने जा सकते हैं।

