मकडा़ई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इन नियमों की संवैधानिक वैधता और समाज पर पड़ने वाले उनके दीर्घकालिक प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक पुराने 2012 के नियम ही प्रभावी रहेंगे।
अलग हॉस्टल की व्यवस्था पर CJI की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सबसे तीखी टिप्पणी अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए अलग हॉस्टल बनाने के प्रावधान पर आई। मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र सरकार और UGC को फटकार लगाते हुए कहा
> “कृपया ऐसा न करें। हम एक जातिविहीन समाज बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन ये नियम हमें पीछे ले जा रहे हैं। आरक्षित वर्गों में भी अब कई लोग सामाजिक और आर्थिक रूप से समृद्ध हो चुके हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम छात्रों को बांटने के बजाय उन्हें साथ लाने का काम करें।”
अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालयों में एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी वातावरण होना चाहिए, न कि ऐसा जो छात्रों को उनकी पहचान के आधार पर अलग-थलग कर दे।
नियमों की अस्पष्टता और ‘3C बनाम 3E’ प्रणाली पर विवाद
कोर्ट ने नियमों की परिभाषाओं को “अस्पष्ट” बताते हुए इनके दुरुपयोग की आशंका जताई। विशेष रूप से, ‘जाति-आधारित भेदभाव’ की परिभाषा को केवल कुछ श्रेणियों तक सीमित रखने पर सवाल उठाए गए।
पीठ ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी सवाल भी किया “जब देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में पहले से ही 3E (Equity, Efficiency, Excellence) प्रणाली मौजूद है, तो नई 3C प्रणाली को लागू करने की क्या प्रासंगिकता है ?”
अदालत का मानना है कि नई व्यवस्था अनावश्यक जटिलताएं पैदा कर सकती है और विशेषज्ञों को इन नियमों में संशोधन के सुझाव देने चाहिए।
UGC के इन नए नियमों के विरौध में देश भर में उबाल जगह जगह छात्रों का उग्र प्रदर्शन
UGC के इन नए नियमों के खिलाफ देशभर के विश्वविद्यालयों में विरोध की लहर
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के नॉर्थ कैंपस के बाहर छात्रों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और नियमों को ‘विभाजनकारी’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
लखनऊ यूनिवर्सिटी के न्यू कैंपस में विभिन्न छात्र संगठनों ने सड़क जाम कर नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
कानपुर में विरोध का एक अनोखा तरीका देखने को मिला, जहाँ भरत शुक्ला नामक व्यक्ति ने नियमों के विरोध में अपना सिर मुंडवा लिया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
छात्रों का तर्क है कि ये नियम कैंपस में सद्भाव बिगाड़ सकते हैं और भेदभाव को कम करने के बजाय उसे कानूनी रूप से संस्थागत बना सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में समर्थन: एमके स्टालिन का रुख
जहाँ एक ओर छात्र और सुप्रीम कोर्ट नियमों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इन नियमों का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि:
> “UGC नियम 2026 भले ही देरी से उठाया गया कदम है, लेकिन यह उच्च शिक्षा में व्याप्त भेदभाव और उदासीनता को दूर करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। यह सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।”
स्टालिन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे दबाव में आकर इन सुधारों को वापस न लें, क्योंकि ये हाशिए पर मौजूद समुदायों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।
आगे क्या होगा..?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की गई है। तब तक के लिए नए नियमों के क्रियान्वयन पर पूरी तरह से रोक रहेगी।

