जाट से बौद्ध बनकर आरक्षण का लाभ लेने का मामला
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “आरक्षण के लिए धर्म बदलना धोखाधड़ी का नया तरीका, अल्पसंख्यकों के हक पर डाका बर्दाश्त नहीं”
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली | उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए धर्म परिवर्तन कर अल्पसंख्यक कोटा का लाभ लेने की कोशिश करने वाले उम्मीदवारों को सर्वोच्च न्यायालय ने करारा झटका दिया है। एक मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने इसे “धोखाधड़ी का नया तरीका” करार देते हुए स्पष्ट किया कि केवल आरक्षण के लाभ के लिए धर्म बदलना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
क्या है पूरा मामला ?
हरियाणा के हिसार जिले के दो भाई-बहन, निखिल कुमार पुनिया और एकता पुनिया ने स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने सामान्य श्रेणी (Jat Punia) से होने के बावजूद बौद्ध धर्म अपना लिया था और हिसार के उपमंडल अधिकारी (SDO) से ‘बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र’ प्राप्त कर लिया था। इस प्रमाण पत्र के आधार पर वे मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज (जो एक अल्पसंख्यक संस्थान है) में दाखिला चाहते थे।
जाट से बौद्ध बनकर आरक्षण का लाभ लेने की कोशिश
मुख्य न्यायाधीश की तीखी टिप्पणी: “आप किस तरह के पुनिया हैं ?”
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कड़े सवाल पूछे।
CJI की टिप्पणी: “वाह! यह तो धोखाधड़ी का एक नया तरीका है। आप समृद्ध समुदाय से आते हैं, आपके पास जमीनें हैं और सुख-सुविधाएं हैं। आपको अपनी योग्यता (Merit) पर गर्व होना चाहिए, न कि असली अल्पसंख्यकों के हक छीनने पर।”*
अदालत का सवाल कैसे बने अल्पसंख्यक
अदालत ने पूछा कि जो उम्मीदवार NEET-PG 2025 की परीक्षा में ‘सामान्य श्रेणी’ के रूप में शामिल हुए और जिन्होंने खुद को ‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग’ (EWS) से बाहर बताया, वे अचानक परीक्षा के बाद अल्पसंख्यक कैसे बन गए ?
अदालत ने हरियाणा सरकार और प्रशासन को फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार के ढीले रवैये और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में पूछा:
हिसार के SDO ने बिना किसी ठोस जांच के यह अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया ?
क्या कोई भी सामान्य वर्ग का व्यक्ति केवल कागजों पर धर्म बदलकर अल्पसंख्यक आरक्षण का हकदार हो सकता है ?
अदालत ने हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें, जिसमें अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने की वर्तमान गाइडलाइंस और इस मामले में हुई चूक का विवरण हो।
संविधान और आरक्षण और विशेषज्ञों की राय
पूर्व लोकसभा सदस्य और दलित नेता उदित राज ने भी इस प्रवृत्ति को गलत बताया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आरक्षण का उद्देश्य उन समुदायों को मुख्यधारा में लाना है जिन्होंने सदियों से सामाजिक भेदभाव झेला है। यदि कोई व्यक्ति केवल आर्थिक या शैक्षणिक लाभ के लिए धर्म बदलता है, तो यह ‘संवैधानिक धोखाधड़ी’ की श्रेणी में आता है।
निष्कर्ष और कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मेडिकल कॉलेज में दाखिले की मांग को तत्काल खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच के लिए इस मामले को खुला रखा है। अदालत का यह रुख उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो आरक्षित वर्गों के अधिकारों का गलत तरीके से लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।

