मकड़ाई एक्सप्रेस 24 ग्वालियर। प्रशासन और पुलिस द्वारा चलाए जा रहे तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आया है, जहाँ ठगों ने एक रिटायर्ड रजिस्ट्रार अधिकारी को अपना शिकार बनाकर उनसे 1 करोड़ 12 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि ठग ली।
मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर पैदा किया ‘गिरफ्तारी’ का डर
पीड़ित 75 वर्षीय बिहारी लाल गुप्ता, जो रजिस्ट्रार विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, को ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग (विदेशी मुद्रा के अवैध लेन-देन) के फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी थी। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए उन्हें डराया कि उनके नाम पर अवैध ट्रांजैक्शन हुए हैं और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है।
डेढ़ महीने तक चला ठगी का सिलसिला
यह ठगी कोई एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि ठगों ने महीनों तक पीड़ित को मनोवैज्ञानिक जाल में उलझाए रखा।
ठगो द्वारा पहली कॉल
ठगों ने सबसे पहले 16 नवंबर 2025 को पीड़ित से संपर्क किया। उन्हें वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया, यानी उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी को न बताने की सख्त हिदायत दी गई। डर के मारे रिटायर्ड अधिकारी ने ठगों द्वारा बताए गए चार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।
अन्तिम लेन देन – ठगी का यह सिलसिला 3 जनवरी 2026 तक चला, जब उन्होंने आखिरी किश्त जमा की।
जागरूकता वीडियो ने खोला ठगी का राज
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित को ठगी का एहसास तब हुआ जब उन्होंने सोशल मीडिया पर डिजिटल अरेस्ट से संबंधित एक जागरूकता वीडियो देखा। उस वीडियो में दिखाई गई कार्यप्रणाली बिल्कुल वैसी ही थी जैसी उनके साथ घटित हुई थी। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस की कार्रवाई और साइबर सेल की चेतावनी
पीड़ित की शिकायत पर ग्वालियर साइबर क्राइम पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया था।
पुलिस दे रही लोगो को समझाईश
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसों की मांग नहीं करती है।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें ?
अनजान कॉल से सावधान रहे
अगर कोई खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताकर डराए, तो घबराएं नहीं।
आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी को भी साझा न करें। बैंक खाता, आधार नंबर या ओटीपी कभी किसी को न दें।
शंका होने पर क्रॉस चेक करें ।ऐसी स्थिति में तुरंत अपने नजदीकी थाने जाकर संपर्क करें या 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।

