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19 साल में भी दुकान बिक्री की राशि जमा नहीं चेहरा देखकर कार्रवाई कर रही हरदा नगर पालिका – बकायेदारों को राजनीतिक संरक्षण, ईमानदारों पर सख्ती!

हरदा,-नगर पालिका परिषद हरदा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। वर्ष 2006 में वरदान परिसर की दुकानों की नीलामी नगर पालिका द्वारा की गई थी, जिसमें नीलामी की शर्तों के अनुसार सम्पूर्ण राशि 30 दिनों के भीतर जमा करना अनिवार्य था। परंतु नियमों का पालन न करने वालों को संरक्षण मिल रहा है।

विशेष रूप से श्री योगेश सिंह पिता श्री मनोहर सिंह ने ₹98,000/- में एक दुकान क्रय की थी, लेकिन आज 19 वर्ष बीत जाने के बाद भी मात्र ₹34,000/- की राशि जमा की गई है और शेष ₹64,000/- आज तक बकाया है। इतने वर्षों तक राशि की वसूली न होना यह दर्शाता है कि नगर पालिका ने इस मामले को जानबूझकर दबा रखा है।

 

यह मामला अकेले एक दुकान तक सीमित नहीं है — सूत्रों के अनुसार, ऐसी अनेक फाइलें वर्षों से नगर पालिका कार्यालय में धूल खा रही हैं, और वसूली के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।

पक्षपात का खुला उदाहरण:

कल एक ही परिसर में में नगर पालिका द्वारा राकेश कुमार मोहनलाल तलरेजा की दुकान को सील कर दिया गया, जबकि उसी परिसर में लाखों की बकाया दुकान – श्री योगेश सिंह की – को सील नहीं किया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब नगर पालिका की टीम लगभग 15–20 कर्मचारियों के साथ योगेश सिंह की दुकान सील करने पहुँची, तभी एक प्रभावशाली नेता के फोन पर कार्यवाही रोक दी गई और टीम वापस लौट गई। यह पूरी घटना नगर पालिका में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप और पक्षपात को उजागर करती है।

 

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यह बेहद चिंताजनक है कि नगर पालिका प्रशासन चेहरा देखकर कार्रवाई कर रहा है, जिससे पारदर्शिता, न्याय और नियमों की पूरी तरह से अनदेखी हो रही है।

हमारी प्रमुख मांगें:

1. जिन दुकानों की पूर्ण राशि नियत समय में जमा नहीं की गई है, उनकी अनुमति तत्काल निरस्त की जाए और उन्हें पुनः नीलाम किया जाए।

2. योगेश सिंह की दुकान को सील न करने के पीछे किस नेता का दबाव था, इसकी निष्पक्ष जांच कर जनता के समक्ष सच रखा जाए।

3. पूरे प्रकरण में शामिल नगर पालिका कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए

नेता प्रतिपक्ष श्री अमर रोचलानी ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संभवत: राजनीतिक दबाव और भ्रष्टाचार का उदाहरण है। यदि शीघ्र उचित कदम नहीं उठाए गए तो नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास उठ जाएगा।

 

कांग्रेस पार्षदगण और नागरिक समाज यह मांग करता है कि नगर पालिका को राजस्व की हानि रोकते हुए जवाबदेही तय की जाए। अन्यथा हम सड़क से सदन तक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।