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गणगौर लोक उत्सव में सामूहिक झालरिया देना लोक परंपरा, भक्ति और समरसता का अद्भुत संगम होता है – अशोक गुर्जर

टिमरनी। नगर के मध्य स्थित ईश्वर गौरी आश्रम एवं पंचमुखी हनुमान मंदिर में इन दिनों पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ गणगौर लोक उत्सव मनाया जा रहा है। इस पावन आयोजन का मार्गदर्शन आश्रम के संस्थापक ब्रह्मचारी श्री ओमप्रकाश गुर्जर “मोनी बाबा” के सान्निध्य में किया जा रहा है, जो विगत लगभग 16 वर्षों से निरंतर गणगौर मैया का आवाहन कर पावनी बुलाते आ रहे हैं और लोक आस्था की इस परंपरा को समाज में जीवंत बनाए हुए हैं।

आयोजन की जानकारी देते हुए भाजपा के पूर्व जिला प्रवक्ता अशोक गुर्जर ने बताया कि गणगौर लोक उत्सव भारतीय संस्कृति की उस प्राचीन परंपरा का प्रतीक है, जिसमें भक्ति, लोकजीवन और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि गणगौर मैया की आराधना में होने वाली झालरिया देना केवल वाद्य यंत्रों की थाप पर किया जाने वाला नृत्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में निहित आध्यात्मिक और संगीत का संयुक्त नृत्य स्वरूप है।

उन्होंने बताया कि इस परंपरा में भक्तजन माँ गणगौर का आवाहन कर सामूहिक रूप से झालरिया देते हैं, जिसमें ताल, लय और भक्ति का ऐसा वातावरण बनता है कि व्यक्ति का शरीर और मन दोनों आनंद और ऊर्जा से भर उठते हैं। इस प्रकार झालरिया देना केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति नहीं बल्कि भक्ति भाव से की जाने वाली सामूहिक साधना है, जिसके माध्यम से श्रद्धालु अपनी भावनाओं को माँ गणगौर की सेवा में समर्पित करते हैं।

अशोक गुर्जर ने कहा कि वर्तमान समय में जब आधुनिक जीवनशैली के कारण लोक परंपराएँ धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं, तब ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। गणगौर उत्सव में सामूहिक रूप से झालरिया देना समाज में समरसता, सहभागिता और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक बन जाता है।

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इसी भावना को समाज में और अधिक व्यापक बनाने के उद्देश्य से रविवार, 15 मार्च को सायंकाल 8:15 बजे से 9:15 बजे तक ईश्वर गौरी आश्रम, पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर, टिमरनी में विशेष सामूहिक झालरिया देने का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

इस अवसर पर नगर के श्रद्धालुओं, सामाजिक एवं समविचारिक संगठनों के कार्यकर्ताओं तथा सनातन संस्कृति से जुड़े सभी नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे बड़ी संख्या में उपस्थित होकर माँ गणगौर की सेवा में सहभागी बनें।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन उन सभी लोगों के लिए है जो लोक व्यवहार, लोक परंपरा और सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के साथ जीवन जीना चाहते हैं।

साथ ही पत्रकार बंधुओं को भी इस आयोजन में सादर आमंत्रित किया गया है, कि वे पधारकर इस लोक उत्सव की सांस्कृतिक महत्ता को समाज तक पहुँचाने में अपना सहयोग दें तथा माँ गणगौर के पंडाल में स्वयं झालरिया देकर इस आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करें।