सोयाबीन किसान के लिए खुशखबरी अब 40 क्विंटल पर सीधे होगा 28000 रुपये का लाभ, देखे पूरी खबर Soybean Price:
Soybean Price: सरकार ने हाल ही में सोयाबीन खरीद के नियमों में बदलाव किया है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। अब सरकारी खरीद केंद्रों पर सोयाबीन में 15% तक नमी स्वीकार की जाएगी। पहले यह सीमा 12% थी, जिसके चलते कई किसानों को उनकी उपज बेचने में दिक्कत हो रही थी। इसके अलावा, हर किसान के लिए सोयाबीन बेचने की अधिकतम सीमा 25 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल कर दी गई है।
15% नमी वाला सोयाबीन भी होगा स्वीकार
नए नियमों के तहत अब 15% तक नमी वाले सोयाबीन को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाएगा। पहले केवल 12% नमी तक ही सोयाबीन स्वीकार किया जाता था। इस बदलाव के बाद अब किसान बिना किसी झंझट के अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेच सकते हैं। यह फैसला खासतौर पर उन किसानों के लिए मददगार साबित हो रहा है, जिनकी फसल में नमी की वजह से उनकी उपज नहीं बिक पा रही थी।
40 क्विंटल तक बेच सकेंगे किसान
सोयाबीन बेचने की सीमा बढ़ाकर 40 क्विंटल कर दी गई है, जो पहले 25 क्विंटल थी। इससे किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर पहले एक किसान 25 क्विंटल सोयाबीन बेचता था, तो उसे MSP पर लगभग 17500 रुपये मिलते थे। लेकिन अब वह 40 क्विंटल बेचकर 28000 रुपये तक कमा सकता है।
खरीद प्रक्रिया में तेजी
इस फैसले के बाद सरकारी केंद्रों पर सोयाबीन खरीद में तेजी आई है। पहले, नमी और लिमिट जैसी शर्तों की वजह से खरीद की प्रक्रिया धीमी हो रही थी। राजस्थान के कोटा जिले में, जहां सोयाबीन उत्पादन का बड़ा क्षेत्र है, खरीद लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा था। लेकिन अब किसान बड़ी मात्रा में अपनी उपज बेचने के लिए केंद्रों पर पहुंच रहे हैं।
समर्थन मूल्य पर ज्यादा फायदा
सरकारी केंद्रों पर MSP 4892 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि खुले बाजार में सोयाबीन की कीमत औसतन 4200 रुपये प्रति क्विंटल है। इसका मतलब है कि सरकारी केंद्रों पर सोयाबीन बेचने से किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 692 रुपये का अतिरिक्त लाभ हो रहा है।
किसानों की खुशी और नए केंद्रों की शुरुआत
नए नियम लागू होने के बाद से किसानों में उत्साह देखने को मिला है। कोटा जिले में अब तक 1002 किसानों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से 184 ने अपनी फसल बेच भी दी है। बाकी किसान भी जल्द ही अपनी उपज बेचने के लिए तैयार हैं। राज्य सरकार ने खरीद प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए नए केंद्र खोलने की भी व्यवस्था की है।
क्यों हुआ बदलाव?
सरकार ने यह कदम किसानों की समस्याओं को देखते हुए उठाया है। पहले 12% नमी और 25 क्विंटल की सीमा के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने में असमर्थ थे। इससे सरकारी खरीद का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो रहा था। अब इन शर्तों में ढील देकर किसानों को राहत दी गई है और खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने की कोशिश की गई है।
किसानों को भुगतान का वादा
राज्य सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी उपज का पूरा भुगतान समय पर किया जाएगा। केंद्र सरकार की नोडल एजेंसियां, जैसे कि NAFED और NCCF, राज्य एजेंसियों को नमी के आधार पर समायोजित मूल्य का भुगतान करेंगी।
एक बार के लिए लागू होगा फैसला
यह फैसला फिलहाल सिर्फ इस सीजन के लिए लागू किया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस बदलाव को मंजूरी दी है। किसानों को उम्मीद है कि यह बदलाव आगे भी जारी रहेगा।
सरकार के नए नियम किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं। नमी की सीमा और बेचने की लिमिट बढ़ाने से किसानों को न केवल आर्थिक फायदा हो रहा है, बल्कि उन्हें अपनी उपज बेचने में भी आसानी हो रही है। इस कदम से न केवल किसानों का मनोबल बढ़ा है, बल्कि सरकारी खरीद का लक्ष्य भी पूरा होने की संभावना बढ़ गई है। किसानों के हित में ऐसे फैसले आगे भी लिए जाने चाहिए।
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