विगत 10 दिनों की जंग में अमेरिका को भारी चपत, वायुसेना की साख पर सवाल
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 दिल्ली।मध्य पूर्व में विगत 10 दिनों से जारी भीषण संघर्ष ने वैश्विक राजनीति और सैन्य संतुलन को हिलाकर रख दिया है। वाशिंगटन से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना को इस छोटी सी अवधि में अब तक का सबसे बड़ा तकनीकी और मानवीय नुकसान उठाना पड़ा है। कुल 16 सैन्य विमानों के नष्ट होने की खबर ने पेंटागन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
गंभीर सैन्य क्षति: रीपर ड्रोन्स का काल बना ईरान
अमेरिका, जो अपनी ‘ड्रोन तकनीक’ के दम पर दुनिया भर में दबदबा रखता है, उसे इस युद्ध में सबसे अधिक नुकसान MQ-9 Reaper आर्म्ड ड्रोन्स का हुआ है।
नुकसान का आंकड़ा: अब तक 12 रीपर ड्रोन ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा मार गिराए गए हैं।
एक ड्रोन 250 करोड़ का हो रहा आर्थिक नुक्सान
एक अकेले रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये है। इस लिहाज से केवल ड्रोन्स के रूप में ही अमेरिका को 3000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ है। ये ड्रोन ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के ठिकानों पर हमला करने के लिए तैनात किए गए थे, लेकिन वे अपने लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही मलबे में तब्दील हो गए।
ग़लती की भारी क़ीमत: ‘फ्रेंडली फायर’ में गिरे F-15 जेट्स
युद्ध के मैदान में समन्वय की कमी का खामियाजा भी अमेरिका को भुगतना पड़ा है। कुवैत की वायुसेना ने पहचान में हुई चूक के कारण तीन अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स को अपना निशाना बना लिया।
इस ‘फ्रेंडली फायर’ की घटना में अमेरिका के 3 अनुभवी पायलटों की मौत हो गई।
अमेरिका लॉजिस्टिक फेलियर
इसके अतिरिक्त, इराक की सीमा के पास एक KC-135 स्ट्रैटोटैंकर (हवा में ईंधन भरने वाला विमान) भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें क्रू के 6 सदस्यों की जान चली गई। रिफ्यूलिंग टैंकर का गिरना अमेरिकी एयर ऑपरेशन के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका है।
ग़लत साबित होते ट्रंप के वादे ?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव और उसके बाद भी यह दावा किया था कि ईरान के खिलाफ कोई भी सैन्य कार्रवाई बहुत ‘त्वरित और साफ-सुथरी’ होगी। उन्होंने इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी सफलता दिलाने का वादा किया था, जहाँ अमेरिका का कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत है। न केवल विमानों का नुकसान हुआ है, बल्कि अमेरिकी सैनिकों की मौतों ने ट्रंप प्रशासन को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।
गहन संकट: अब आगे क्या ?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब एक दोराहे पर है। यदि ट्रंप हमलों की तीव्रता बढ़ाते हैं और F-35 या B-2 जैसे और भी महंगे विमानों को युद्ध में झोंकते हैं, तो ईरान की ओर से और भी घातक प्रतिक्रिया की संभावना है। वहीं दूसरी ओर, युद्ध को रोकना ट्रंप की ‘शक्तिशाली नेता’ वाली छवि को नुकसान पहुँचा सकता है। फिलहाल वाशिंगटन में इस बात को लेकर मंथन जारी है कि इस ‘महंगी जंग’ को विराम कैसे दिया जाए।

