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मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था: कर्मचारियों को करनी होगी 3 महीने की ट्रेनिंग

भोपाल। एमपी में कर्मचारियों के लिए तीन माह के ट्रेनिंग कार्यक्रम की घोषणा की गई है। प्रदेश के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के लिए यह ट्रेनिंग होगी। लेखा प्रशिक्षण-सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ होगा और 30 जून तक चलेगा। स्थानीय निकायों और अर्धशासकीय संस्थाओं के जिन लिपिक वर्गीय कर्मचारियाों की परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है वे भी लेखा प्रशिक्षण के लिए पात्र होंगे। वित्त विभाग के निर्देशानुसार ऐसे कर्मचारियों को ट्रेनिंग के लिए 5 हजार रुपए का चालान भरना होगा। यह ट्रेनिंग लेने के इच्छुक लिपिक वर्गीय कर्मचारियों को अपने आवेदन-पत्र 16 मार्च तक जमा कराने को कहा गया है।

नियमित लेखा प्रशिक्षण सत्र लेखा प्रशिक्षण शाला भोपाल में संचालित होगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के अंतर्गत सभी जिलों के लिपिकवर्गीय कर्मचारियों को आवेदन कार्यालय प्रमुख से अभिप्रमाणित कराकर ही जमा कराने के लिए निर्देशित किया गया है। आवेदन लेखा प्रशिक्षण शाला में तीन मूल प्रतियों में जमा कराने होंगे।

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वित्त विभाग के अनुसार वही लिपिकवर्गीय शासकीय कर्मचारी प्रशिक्षण के पात्र होंगे जिनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है तथा जिन्होंने सीपीसीटी परीक्षा पास की हो या फिर उन्हें नियमानुसार छूट प्राप्त हो। लेखा प्रशिक्षण शाला के प्राचार्य ने बताया कि आवेदन-पत्र के साथ शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र की कापी अनिवार्य रूप से देना होगी। आवेदन-पत्र पर कर्मचारी को पासपोर्ट साइज फोटो लगाना होगा। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को जाति प्रमाण-पत्र भी संलग्न करना होगा। वित्त विभाग के निर्देशानुसार ये प्रमाणपत्र कार्यालय प्रमुख से सत्यापित कराने होंगे।

5 हजार रूपए का चालान जमा कराना होगा
प्रदेश के स्थानीय निकाय और अर्धशासकीय संस्थाओं के ऐसे लिपिकवर्गीय कर्मचारी भी ट्रेनिंग ले सकेंगे जिनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है। ऐसे कर्मचारियों को प्रशिक्षण शुल्क के रूप में 5 हजार रूपए का चालान जमा कराना होगा। सत्र में प्रवेश के समय यह चालाना देना होगा।